डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म न्यूज़लॉन्ड्री इन दिनों अपने ही कुछ पूर्व कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर चर्चा में है। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से न्यूज़लॉन्ड्री और उसके कर्मचारियों से जुड़े कई आरोपों को लेकर बहस चल रही है। मामला बढ़ने के बाद संस्था ने अपना पक्ष सार्वजनिक किया है।
न्यूज़लॉन्ड्री का कहना है कि वह 2017 से POSH यानी कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न रोकने वाले कानून का पालन कर रहा है। संस्था के मुताबिक, उसके यहां Internal Complaints Committee (ICC) मौजूद है और अब तक यौन उत्पीड़न से जुड़ी चार शिकायतों पर इसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा चुकी है। इन मामलों में बर्खास्तगी और निलंबन जैसी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हुई है।
न्यूज़लॉन्ड्री ने कहा- सवाल हमसे भी पूछिए
अपने बयान में न्यूज़लॉन्ड्री ने साफ किया कि POSH कानून का पालन करने का मतलब यह नहीं है कि संस्था में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है। उसने अपने मौजूदा और पूर्व कर्मचारियों से अपील की है कि अगर उन्हें कोई शिकायत है तो वे सीधे संस्था के सामने अपनी बात रखें।
संस्था ने यह भी कहा कि वह पिछले पांच दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं पर नजर रख रही है। न्यूज़लॉन्ड्री का दावा है कि इस दौरान कुछ ऐसे आरोप भी लगाए गए हैं जिनका कोई आधार नहीं है या जो तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
साथ ही संस्था ने कहा है कि उसके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। हर आरोप का सार्वजनिक तौर पर जवाब न देना उसकी कमजोरी या बचाव की कोशिश नहीं माना जाना चाहिए।
‘हम परफेक्ट होने का दावा नहीं करते’
न्यूज़लॉन्ड्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि उसने कभी खुद को परफेक्ट संस्था नहीं बताया। उसका कहना है कि वह लगातार सीखने, अपनी गलतियों से सुधार करने और बेहतर कार्यस्थल बनाने की कोशिश करता रहा है।
लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है। जिस न्यूज़लॉन्ड्री ने वर्षों तक दूसरे मीडिया संस्थानों, पत्रकारों और सार्वजनिक संस्थाओं से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग की, अब वही कसौटी उसके अपने न्यूज़रूम पर भी लागू हो रही है।
‘सबकी धुलाई’ की कसौटी अब न्यूज़लॉन्ड्री पर
न्यूज़लॉन्ड्री की पत्रकारिता का एक चर्चित पहलू रहा है—मीडिया और ताकतवर संस्थानों से सवाल पूछना और उन्हें आलोचना से ऊपर न मानना। लेकिन अब पूर्व कर्मचारियों के आरोपों के बाद सवाल उसके अपने संस्थागत सिस्टम को लेकर उठ रहे हैं।
मुद्दा सिर्फ इतना नहीं है कि न्यूज़लॉन्ड्री को अपना बचाव करने का अधिकार है। असली सवाल यह है कि क्या पारदर्शिता, जवाबदेही और जांच-पड़ताल की वही कसौटी अब न्यूज़लॉन्ड्री पर भी लागू होगी, जिसे वह लंबे समय से दूसरों के लिए जरूरी बताता रहा है?
फिलहाल संस्था ने POSH अनुपालन और चार शिकायतों पर कार्रवाई की जानकारी दी है। हालांकि, उसके बयान में पूर्व कर्मचारियों की ओर से लगाए गए विशिष्ट आरोपों का विस्तृत जवाब सामने नहीं आया है। ऐसे में विवाद के दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि और पूरे मामले के तथ्य सामने आना अभी बाकी है।


