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नवभारत टाइम्स की रेखा खान के स्पष्टीकरण के बाद असग़र वजाहत की सफाई पढ़िए!

Older man with a gray beard and bald head, wearing round sunglasses and a brown plaid shirt, outdoors (backpack strap over his shoulder).

असग़र वजाहत-

मुझे पाकिस्तानी लेखक बना दिया के संदर्भ में सुश्री रेखा खान जी का स्पष्टीकरण…

वजाहत साहब आदाब,

आपने बटवारा की समीक्षा को लेकर हाल ही में जो पोस्ट लिखी, ‘मुझे पाकिस्तानी राइटर बना दिया गया’ उसमें आपने रिव्यू के जिस पैरा का उल्लेख किया है, उसे आपने नवभारत टाइम्स की समीक्षा का हिस्सा बताया है, नवभारत टाइम्स एक विश्वसनीय और प्रतिष्ठित अखबार है, फ़िल्म की समीक्षा मैंने की थी और ऐसा कोई पैरा या आपको “पाकिस्तानी राइटर” जैसा कोई उल्लेख रिव्यू में नहीं है

असल में वो नवभारत टाइम्स का रिव्यू नहीं है।

वो आज तक का रिव्यू है ।आपकी ग़लत जानकारी देती इस पोस्ट से नवभारत टाइम्स और मेरी छवि को बहुत ज़्यादा ठेस पहुँची है।

मैं एक जिम्मेदार, संवेदनशील और सीनियर जर्नलिस्ट हूँ, मैं ऐसा क्यों लिखूँगी । आपको बहुत अच्छे तरीके से जानती हूँ, आपसे सलाम-दुआ भी है । इस तरह की ग़लत और बेबुनियाद जानकारी में नहीं दे सकती। आपसे गुज़ारिश है कि अपनी पोस्ट में सुधार करें।

आप समझ ही सकते हैं कि विश्वसनीयता और नाम कमाने में सालों की मेहनत, निष्ठा और ईमानदारी लगवाती है”

मैं पुरानी पोस्ट को संशोधित कर रहा हूं.

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