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हरियाणा

पत्रकार हत्याकांड केस में बढ़ सकती हैं राम रहीम की मुश्किलें!

नई दिल्ली: डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सिरसा के पत्रकार राम चंद्र छत्रपति की 2002 में हुई हत्या के मामले में राम रहीम को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी है। कोर्ट ने मामले से जुड़े ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड भी तलब किए हैं। अंतिम सुनवाई नवंबर के आखिरी सप्ताह में होगी।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने राम रहीम के वकील आर. बसंत की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि मामले में विचार की जरूरत है। पीठ ने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ बरी किए जाने की पुष्टि का मामला नहीं, बल्कि ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटने से जुड़ा मामला है।

राम रहीम के वकील ने क्या कहा?

राम रहीम की ओर से दलील दी गई कि यह बरी किए जाने का मामला है और राज्य की ओर से इस फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की गई है। वकील ने यह भी कहा कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्य गवाह की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए थे।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को फिलहाल स्वीकार नहीं किया। पीठ ने कहा कि वह मुख्य गवाह से जुड़ी परिस्थितियों और उसके बयान के साक्ष्य मूल्य की जांच करेगी।

बेटे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

यह याचिका मारे गए पत्रकार राम चंद्र छत्रपति के बेटे और शिकायतकर्ता अरिंदम छत्रपति ने दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि ट्रायल कोर्ट ने हत्या की साजिश को लेकर स्पष्ट निष्कर्ष दिए थे और तीन सह-आरोपियों को IPC की धारा 302 के साथ 120-B के तहत दोषी ठहराया था। इसके बावजूद हाई कोर्ट ने राम रहीम की साजिश में भूमिका को साबित नहीं माना।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड, जिसमें गवाहों के बयान भी शामिल हैं, मंगवाए हैं।

राम रहीम के पूर्व ड्राइवर की गवाही पर होगी नजर

मामले में जिस मुख्य गवाह का जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने किया है, वह राम रहीम का पूर्व ड्राइवर बताया गया है। उसने न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बयान दर्ज कराया था और हत्या में राम रहीम की भूमिका का आरोप लगाया था।

पुलिस जांच में खामियों के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने नवंबर 2003 में मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा रिकॉर्ड मंगाए जाने और मुख्य गवाह के बयान की दोबारा जांच की बात कहे जाने से पत्रकार हत्याकांड में राम रहीम की कानूनी मुश्किलें फिर बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं।

हालांकि, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने राम रहीम को दोषी नहीं ठहराया है। कोर्ट अब रिकॉर्ड और साक्ष्यों की जांच के बाद मामले पर आगे फैसला करेगा।

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