मोदी सरकार द्वारा तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म से उन तमाम आवाजों को दबाए जाने का बड़ा आरोप लग रहा है, जो सरकार से सवाल कर रहे हैं, या अपना विरोध जता रहे हैं। इसके आंकड़े भी चौंकाने लायक हैं। जिसके मुताबिक सरकार ने प्रतिदिन 1275 ब्लॉकिंग ऑर्डर दिए हैं। और अब तक यह संख्या 1.95 लाख जा चुकी है…नीचे पढ़िए
अजीत अंजुम-
सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को हर मिनट एक ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजा
मार्च से जुलाई के बीच सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को हर 68 सेकंड में औसतन एक ब्लॉकिंग ऑर्डर भेजा।
इनमें से आधे से ज्यादा आदेश इंस्टाग्राम को भेजे गए, जो विरोध-प्रदर्शनों के लिए एक प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बन गया था। वहीं, अक्टूबर 2024 से सितंबर 2025 के बीच रोजाना कंटेंट हटाने के औसत आदेशों की संख्या छह थी। यह जानकारी ‘सहयोग’ (Sahyog) के आंकड़ों से सामने आती है .
औसतन हर 68 सेकंड में एक ब्लॉकिंग ऑर्डर। यानी हर दिन करीब 1,275 आदेश। और केवल पांच महीनों में लगभग 1.95 लाख आदेश।
द इंडियन एक्सप्रेस द्वारा हासिल किए गए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल मार्च से जुलाई के बीच इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब को ऑनलाइन कंटेंट प्रतिबंधित करने के लिए सरकार की ओर से भेजे गए निर्देशों में जबरदस्त उछाल आया।
गौरतलब है कि इस अवधि में छात्रों का परीक्षा-पर्चा लीक होने के खिलाफ प्रदर्शन भी शामिल था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह छात्र आंदोलन जून की शुरुआत में शुरू हुआ था और 25 जुलाई को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद इसे समाप्त कर दिया गया था।
मोदी सरकार किस तेजी से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कंटेंट हटवा रही है।
उसका आंकड़ा देखिए-
पिछले 5 महीने में सरकार ने Meta और YouTube जैसे प्लेटफ़ॉर्म को 1.95 लाख ब्लॉकिंग ऑर्डर दिए
यानी- हर 68 सेकंड पर एक ब्लॉक ऑर्डर दिया गया
एक दिन में औसतन 1,275 ब्लॉक ऑर्डर
मतलब- इधर सरकार ने ऑर्डर भेजा और उधर लोगों का कंटेंट उनके पेज से उड़ गया।
-गोविंद प्रताप सिंह, पत्रकार



