नई दिल्ली। सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने Zee Entertainment Enterprises (ZEEL) को बड़ी राहत देते हुए ₹3,143.5 करोड़ की प्रस्तावित फंडरेजिंग आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी है। हालांकि, कंपनी पर SEBI की ओर से लगाया गया दो महीने का सिक्योरिटीज मार्केट बैन बरकरार रहेगा।
SAT ने ZEEL को प्रमोटर ग्रुप की कंपनी Sunbright Mauritius Investments को प्रेफरेंशियल आधार पर फुली कन्वर्टिबल वारंट जारी करने की अनुमति दी है। यह राहत इस शर्त के साथ दी गई है कि ZEEL और उसके CEO पुनीत गोयनका SEBI की ओर से लगाए गए जुर्माने की पूरी राशि एक सप्ताह के भीतर जमा करें।
ट्रिब्यूनल ने वारंट जारी करने की समयसीमा भी एक सप्ताह बढ़ा दी है। इसकी मौजूदा समयसीमा शुक्रवार को खत्म हो रही थी।
सिर्फ फंडरेजिंग के लिए राहत
SAT का आदेश केवल ₹3,143.5 करोड़ की फंडरेजिंग तक सीमित है। बाकी मामलों में ZEEL पर SEBI का दो महीने का सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंध जारी रहेगा।
12 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान SAT ने SEBI से सवाल किया था कि अगर दो महीने की पाबंदी खत्म होने के बाद कंपनी यही फंडरेजिंग कर सकती है, तो अभी इसे रोकने से क्या हासिल होगा।
ZEEL की ओर से वरिष्ठ वकील रवि कदम ने दलील दी थी कि SEBI के आदेश से कंपनी की पूंजी जुटाने की योजना प्रभावित हो रही है। कंपनी के शेयरहोल्डर्स ने 31 जुलाई को फंडरेजिंग को मंजूरी दी थी और प्रेफरेंशियल इश्यू को 15 दिनों के भीतर पूरा करना जरूरी था।
पुनीत गोयनका की ओर से पेश वरिष्ठ वकील पेसी मोदी ने बताया कि 96 फीसदी पब्लिक शेयरहोल्डर्स ने फंडरेजिंग के पक्ष में वोट किया है।
क्यों लगा था Zee पर SEBI का बैन?
SEBI का 31 जुलाई का आदेश 2018 में ZEEL की हैदराबाद स्थित जमीन को प्रमोटर से जुड़ी कंपनियों के लिए लिए गए लोन की सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल किए जाने से जुड़े मामले में आया था।
SEBI के मुताबिक, चार कंपनियों ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस से कुल ₹726 करोड़ का लोन लिया था। इसके लिए ZEEL की जमीन को कंपनी के बोर्ड, ऑडिट कमेटी या किसी सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी के बिना सिक्योरिटी के तौर पर इस्तेमाल किया गया।
रेगुलेटर ने कहा था कि इस लेनदेन की जानकारी स्टॉक एक्सचेंजों को सही तरीके से नहीं दी गई। मामले में पूर्व चेयरमैन सुभाष चंद्र और पुनीत गोयनका को जिम्मेदार ठहराया गया था।
SEBI ने ZEEL को दो महीने और पुनीत गोयनका व सुभाष चंद्र को 12-12 महीने के लिए सिक्योरिटीज मार्केट से प्रतिबंधित किया था। साथ ही ZEEL पर ₹30 लाख, गोयनका पर ₹58 लाख और सुभाष चंद्र पर ₹60 लाख का जुर्माना लगाया था।
म्यूचुअल फंड निवेश के इस्तेमाल पर भी शर्त
SAT ने कहा है कि ZEEL अपने म्यूचुअल फंड निवेश का इस्तेमाल रोजमर्रा के कारोबारी खर्चों के लिए कर सकती है। हालांकि, इन फंड्स का इस्तेमाल अन्य उद्देश्यों, जिसमें प्रस्तावित डिविडेंड भी शामिल है, के लिए नहीं किया जा सकेगा।
इस आदेश से Zee को समयबद्ध तरीके से ₹3,143.5 करोड़ की पूंजी जुटाने का रास्ता मिल गया है, लेकिन SEBI की ओर से लगाए गए बाकी प्रतिबंध फिलहाल जारी रहेंगे।


