नई दिल्ली। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने सभी निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों को अपने सभी कार्यक्रमों के दौरान नशीली दवाओं के खिलाफ जागरूकता संदेश दिखाने की सलाह दी है। मंत्रालय ने 20 अगस्त को जारी एडवाइजरी में कहा है कि यह निर्देश समाचार और सामान्य मनोरंजन समेत सभी तरह के कार्यक्रमों पर लागू होगा।
चैनलों को स्क्रीन पर यह संदेश दिखाने के लिए कहा गया है— “Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.” यानी “अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को बर्बाद करते हैं और जेल की सजा की गारंटी देते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”
तय नहीं किया गया डिस्क्लेमर का समय और संख्या
मंत्रालय ने डिस्क्लेमर को कितनी बार और कितनी देर तक दिखाना है, इसकी कोई निश्चित संख्या या अवधि तय नहीं की है। चैनलों को इसे कार्यक्रमों के दौरान “उचित अंतराल” पर दिखाने को कहा गया है। संदेश साफ, प्रमुख और इतनी देर तक स्क्रीन पर रहना चाहिए कि दर्शक उसे आसानी से पढ़ और समझ सकें।
इसका मतलब है कि चैनलों को इसे लागू करने के तरीके में कुछ छूट मिलेगी, लेकिन एंटी-ड्रग संदेश को पूरे कार्यक्रम शेड्यूल का हिस्सा बनाना होगा।
युवाओं पर नशीले पदार्थों के असर को लेकर चिंता
मंत्रालय ने कहा कि नारकोटिक ड्रग्स, साइकोट्रॉपिक पदार्थ और दूसरे नशीले पदार्थ गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा हैं। इनका खासतौर पर युवाओं पर बुरा असर पड़ता है। नशे से सामाजिक, आर्थिक और व्यवहारिक समस्याएं भी पैदा होती हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, टेलीविजन देश में सबसे ज्यादा पहुंच वाले संचार माध्यमों में से एक है। ऐसे में नशीली दवाओं के नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने में टीवी प्रसारकों की अहम भूमिका हो सकती है।
Programme Code का भी दिया हवाला
एडवाइजरी में मंत्रालय ने केबल टेलीविजन नेटवर्क्स रूल्स, 1994 के तहत बनाए गए Programme Code का भी हवाला दिया है। निजी सैटेलाइट चैनलों पर प्रसारित कार्यक्रम और विज्ञापन इसी नियामक ढांचे के तहत आते हैं।
मंत्रालय ने इस एडवाइजरी की प्रतियां Indian Broadcasting & Digital Foundation (IBDF), News Broadcasters Federation और अन्य ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशनों को भी भेजी हैं।
OTT प्लेटफॉर्म के बाद अब टीवी चैनलों पर फोकस
यह कदम मंत्रालय की नशीली दवाओं के चित्रण को लेकर पहले की चिंता के बाद आया है। नवंबर 2024 में MIB ने OTT प्लेटफॉर्म्स को एडवाइजरी जारी कर ऐसे कंटेंट को लेकर सावधानी बरतने को कहा था, जिसमें नशीली दवाओं के सेवन को फैशनेबल, स्वीकार्य या ग्लैमराइज्ड तरीके से दिखाया जाता है।
हालांकि टीवी चैनलों के लिए जारी मौजूदा एडवाइजरी का दायरा अलग है। इसमें डिस्क्लेमर को सिर्फ उन कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रखा गया है, जिनमें ड्रग्स का इस्तेमाल दिखाया जाता है। मंत्रालय ने सभी कार्यक्रमों के दौरान तय संदेश को उचित अंतराल पर दिखाने की सलाह दी है।
फिलहाल मंत्रालय ने डिस्क्लेमर की स्क्रीन पर जगह, फॉन्ट साइज, सटीक अवधि या किसी कार्यक्रम में इसे कितनी बार दिखाया जाना चाहिए, इसे लेकर कोई समान तकनीकी मानक तय नहीं किया है।


