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चीन के सहाराश्री ‘हुई का यान’ को उम्रकैद!

Two men sit at a banquet table, one in a dark suit and the other in a blue plaid shirt, with drinks and plates in front while people stand in the background.

डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी-

42 अरब डॉलर के मालिक का हुआ सहारा जैसा पतन… जैसे भारत में कभी सुब्रत रॉय सहारा की तूती बोलती थी, वैसे ही चीन में रियल एस्टेट डेवलपर एवरग्रैंड ग्रुप के ‘हुई का यान’ का डंका बजता था। जेल जाने के बाद सुब्रत रॉय बीमार पड़ा और लाखों लोगों के अरबों रुपये लौटाए बिना मर गया, चीन के सबसे बड़े रियल एस्टेट डेवलपर एवरग्रैंड ग्रुप के मालिक हुई का यान को शेनझेन अदालत ने बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुना दी है और उनकी पाई-पाई जब्त कर करके ताउम्र जेल भेज दिया।

जैसा भारत में सहारा समूह का नाम था, उससे ज्यादा चीन के रियल एस्टेट डेवलपर एवरग्रैंड ग्रुप का रहा।

Man in a dark suit at a meeting rubs his eye, with a blue Hindi caption banner across the bottom.
हुई का यान

हुई का यान कभी एशिया का सबसे मालदार आदमी माना जाता था, लेकिन जब कानून के शिकंजे में फंसा तो सभी 8 बड़े आपराधिक आर्थिक घोटाले की बात कबूल कर ली।

भारत में इन्हें बिल्कुल ‘सुब्रत रॉय सहारा’ की तर्ज पर देखा जा रहा है! इन दोनों अरबपतियों की कहानी एक जैसी है। चीन जैसे साम्यवादी देश में भी ऐसा और इतना बड़ा घोटाला हो गया, यह दुनिया को समझ नहीं आ रहा है।

हुई का यान पर 2016 से 2021 के बीच षड्यंत्रपूर्वक वित्तीय अपराध करने के आरोप लगे, जिनमें 8 प्रमुख आरोप शामिल थे :

  • वित्तीय आंकड़ों की जालसाजी। उसने कंपनी के राजस्व और मुनाफे को कागजों पर कई अरब डॉलर बढ़ाकर दिखाया और भारी कर्ज को छुपाया।
  • फर्जी वित्तीय रिपोर्टों के आधार पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से बॉन्ड और फंड जुटाए।
  • जनता से अवैध रूप से जमा राशि ली। गैर-कानूनी तरीके से आम जनता और रिटेल निवेशकों से वेल्थ मैनेजमेंट प्रोडक्ट्स के जरिए भारी रकम जुटाई।
  • कंपनी और जनता के पैसों को निजी फायदे और जोखिम भरे उपक्रमों में डायवर्ट किया।
  • फर्जी प्रतिभूतियों का गोरखधंधा। नियामक नियमों का उल्लंघन कर भ्रामक दावों के सहारे बॉन्ड और शेयर जारी किए।
  • रिश्वतखोरी की। वो भी चीन में। नियमों को दरकिनार करने, लोन पास कराने और रेगुलेटरी मंजूरियां हासिल करने के लिए अधिकारियों व वित्तीय संस्थानों को रिश्वत दी।
  • अवैध लोन आवंटन का जाल। समूह के भीतर और अन्य संस्थाओं को गैर-कानूनी तरीके से कर्ज मुहैया कराया गया।

सुब्रत की तरह हुई का यान भी वैसी ही करतूतें करता रहा। दोनों की शुरुआत बेहद साधारण परिवारों से हुई थी। किसी खानदानी विरासत के बिना, सिर्फ अपनी असीम महत्वाकांक्षा, कड़ी मेहनत, बदनीयती और षड्यंत्रों के दम पर दोनों ने देखते-देखते विशाल व्यावसायिक साम्राज्य खड़े कर लिये।

दोनों ने बड़े-बड़े दांव चले और आक्रामक विस्तार किया। सुब्रत रॉय ने छोटे निवेशकों और ग्रामीण भारत के भरोसे को चूना लगाया तो हुई का यान ने अंधाधुंध कर्ज के बलबूते पर एवरग्रैंड को चीन का ताज पहना दिया।

दोनों का खेल बिगड़ गया। दोनों पर ही जनता के पैसों के साथ खिलवाड़ करने और वित्तीय आंकड़ों में हेरफेर करने के गंभीर आरोप लगे। सहारा पर अवैध बॉन्ड के जरिए पैसे जुटाने का दाग लगा, तो हुई का यान पर अपनी कंपनियों के फर्जी और बढ़े-चढ़ाकर आंकड़े दिखाने के सबूत मिले।

भारत में सहारा का सामना सेबी और अदालतों से हुआ, तो चीन में हुई कायान का पाला वहां की सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति से पड़ा, गलती की कोई गुंजाइश नहीं।

इन दोनों महा-साम्राज्यों के ढहने का असली खामियाजा किसी उद्योगपति ने नहीं, बल्कि उस आम इंसान ने भुगता जिसने अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई इनके सपनों के प्रोजेक्ट्स या फ्लैट्स में लगा दी थी। एवरग्रैंड का 300 अरब डॉलर से ज्यादा का कर्ज संकट तो पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख गया था!

जब कोई बिजनेस सिर्फ कागजी जालसाजी, दिखावे और असीमित लालच पर टिक जाता है, तो उसका अंत ऐसा ही भयानक होता है। चाहे आप चीन के सबसे रईस इंसान ही क्यों न हो!

(मेरी भेंट कभी चीनी फ्रॉड से तो नहीं हुई, लेकिन सुब्रत रॉय से कई बार हुई। फोटू उसके जेल जाने के कई साल पहले के, इंदौर के रेडिसन होटल के हैं।… सबसे ऊपर)

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