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सियासत

राफेल से भी बड़ा स्कैम है प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना; किसानों का हक मारकर कॉरपोरेट को लाभ- पी. साईनाथ

नई दिल्ली। प्रख्यात ग्रामीण पत्रकार और कृषि मामलों के विशेषज्ञ पी. साईनाथ (Palagummi Sainath) ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि फसल बीमा योजना का मौजूदा ढांचा किसानों को पर्याप्त राहत देने के बजाय निजी बीमा कंपनियों के लिए मुनाफे का जरिया बन गया है। साईनाथ ने सार्वजनिक मंचों पर योजना की आलोचना करते हुए इसे किसानों के साथ ‘धोखाधड़ी’ तक करार दिया है।

‘राफेल से भी बड़ा गोरखधंधा’

साईनाथ के मुताबिक, फसल बीमा योजना में किसानों के साथ-साथ केंद्र और राज्य सरकारें बड़ी रकम प्रीमियम के तौर पर देती हैं, लेकिन फसल खराब होने पर किसानों को मिलने वाला मुआवजा उसके मुकाबले काफी कम रहता है। उनका दावा है कि इस व्यवस्था से चुनिंदा निजी बीमा कंपनियों को बड़ा आर्थिक फायदा पहुंचता है।

उन्होंने इसे ‘राफेल सौदे से भी बड़ा गोरखधंधा’ बताते हुए योजना की पारदर्शिता और बीमा कंपनियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं।

परभणी का उदाहरण देकर समझाया गणित

साईनाथ ने महाराष्ट्र के परभणी जिले का उदाहरण देते हुए योजना के तहत प्रीमियम और मुआवजे के बीच कथित अंतर को सामने रखा। उनके अनुसार, एक सीजन में सोयाबीन की फसल के लिए किसानों, महाराष्ट्र सरकार और केंद्र सरकार की ओर से मिलकर एक निजी बीमा कंपनी को करीब 173 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया गया।

उनका दावा है कि उस सीजन में फसल को भारी नुकसान हुआ और इसके बावजूद किसानों को करीब 30 करोड़ रुपये ही मुआवजे के तौर पर मिले। साईनाथ के मुताबिक, इस तरह प्रीमियम और भुगतान के बीच करीब 143 करोड़ रुपये का अंतर रहा।

हालांकि, बीमा कंपनियों के मुनाफे की गणना केवल प्रीमियम और किसानों को दिए गए दावों के अंतर से नहीं की जा सकती, क्योंकि बीमा कारोबार में पुनर्बीमा, प्रशासनिक खर्च, अन्य दावे और जोखिम लागत जैसे कई दूसरे घटक भी होते हैं। इसलिए साईनाथ का यह आंकड़ा योजना की संरचना पर सवाल उठाने वाला उनका तर्क है, न कि कंपनी के वास्तविक शुद्ध लाभ का स्वतंत्र ऑडिटेड आंकड़ा।

‘किसानों से ज्यादा कॉरपोरेट को फायदा’

साईनाथ का आरोप है कि PMFBY में सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रीमियम सब्सिडी का बड़ा हिस्सा निजी बीमा कंपनियों तक पहुंचता है। उनका कहना है कि जिस योजना का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक आपदा और फसल नुकसान से सुरक्षा देना है, उसका ढांचा ऐसा होना चाहिए जिसमें किसान को समय पर और पर्याप्त मुआवजा मिले।

उन्होंने फसल बीमा व्यवस्था को सार्वजनिक क्षेत्र के नियंत्रण में लाने की वकालत की है। साईनाथ के मुताबिक, जब तक बीमा कंपनियों पर प्रभावी निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक किसानों को नुकसान की स्थिति में उनका उचित हक दिलाना मुश्किल रहेगा।

ग्रामीण भारत पर लंबे समय से लिखते रहे हैं साईनाथ

पी. साईनाथ ग्रामीण भारत, किसानों और कृषि संकट से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय से लिखते और बोलते रहे हैं। अपनी चर्चित किताब ‘Everybody Loves a Good Drought’ में उन्होंने ग्रामीण भारत की गरीबी, सरकारी योजनाओं और व्यवस्था की खामियों को विस्तार से सामने रखा है। इसी संदर्भ में उनका चर्चित व्यंग्य है कि गांवों में रबी और खरीफ के अलावा ‘भ्रष्टाचार की तीसरी फसल’ भी पैदा होती है।

फसल बीमा योजना पर साईनाथ की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि किसानों के लिए बनाई गई बीमा व्यवस्था में प्रीमियम, सरकारी सब्सिडी, दावों के भुगतान और बीमा कंपनियों के जोखिम का संतुलन वास्तव में किसानों के पक्ष में कितना है।


Older man in a beige vest and white shirt speaks during a video interview, with a Hindi caption banner at the bottom and Reels UI icons overlaid.

ये पी साईनाथ जी हैं जो बहुत बड़े पत्रकार रहे हैं इन्होंने पद्मश्री जैसे अवार्ड को लेने से मना कर दिया था संयोग की बात है jNU में हम लोग साथ पढ़े हैं इसलिए उनकी योग्यता को बहुत करीब से जानते हैं बाकी उनको द हिन्दू अंग्रेजी अखबार में पढ़ने वाले जानते हैं कि उन्होंने किसानों की आत्महत्या पर कितना महान खोजी पत्रकारिता किया है …
यहां वे एक इंटरव्यू में यह बता रहे हैं कि किस तरह से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में घोटाला करके अर्थात जेनुइन किसानों का हक़ मार कर बीमा का 80 फीसदी पैसा निजी कंपनियां डकार जा रही हैं
योजना प्रतिवर्ष 20 हजार करोड़ की है जिसमें फ्राड करके किसानों के क्लेम को रद्द कर दिया जाता है और वह पैसा निजी कंपनियां दोनों हाथ से लूट रही हैं किसकी मेहरबानी से यह सब हो रहा है क्या यह भी हमें ही बताना पड़ेगा …?
-असरार खान

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