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वेब-सिनेमा

तो असग़र वजाहत साहब बिना पड़ताल फेक न्यूज़ का शिकार हो गए!

अखिलेश श्रीवास्तव-

थोड़ा रुक के, थोड़ा बच के..सोशल मीडिया के समंदर में गोता लगा रहीं फेक न्यूज

असग़र वजाहत साहब की एक फेसबुक पोस्ट सुबह से खूब वायरल हो रही है, जिसमें उन्होंने किसी वेबसाइट पर प्रकाशित फिल्म समीक्षा का एक स्क्रीन शॉट शेयर किया है। इस लेख में उन्हें एक ‘पाकिस्तानी लेखक’ बताया गया है। असग़र साहब को मिली अधिक जानकारी के मुताबिक ये फिल्म समीक्षा नवभारत टाइम्स की है, जबकि उनका ये दावा सरासर गलत है।

असग़र साहब की चिंता बहुत जायज है, लेकिन जब सोशल मीडिया, फेक न्यूज का समंदर हो, बिना जांचे-परखे कोई फैसला दे देना थोड़ी जल्दबाजी ही कही जाएगी। इसी तरह NBT के मिलते-जुलते कार्ड्स पर नेताओं के कई फर्जी बयान रोज वायरल किए जाते है। जाने-अनजाने में इन बयानों को कई नेता, पार्टियों के हैंडल्स और कुछ वरिष्ठ पत्रकार तक अपने-अपने स्वार्थ के मुताबिक शेयर करते रहते हैं। जो हमारे संज्ञान में आते हैं, उनका हम अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स पर इनका खंडन करते हैं।

जैसे पढ़े-लिखे और जागरुक माने-जाने वाले लोग, आईएएस, आईपीएस, जज तक साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं, उसी तरह कई नामी पत्रकार और लेखक भी बिना जांचे-परखे कई फर्जी सूचनाओं, पोस्ट को शेयर कर धोखा खा चुके हैं। एआई के इस दौर में फर्जी/मॉर्फ्ड कंटेंट का प्रवाह इतना अधिक है, किसी के साथ भी ये धोखा होना स्वाभाविक है।

इस परिप्रेक्ष्य में ये कहना बहुत जरूरी है कि हम ये दावा नहीं कर रहे कि हमसे गलतियां नहीं होती। डिजिटल न्यूज रूम में जहां स्पीड के साथ काम का दबाव बहुत ज्यादा होता है, इस तरह की गलतियां होना स्वभाविक है, लेकिन इसे संज्ञान में आने पर तुरंत ठीक भी कर लिया जाता है। ऐसी ‘नापाक गलती’ जो की ही नहीं गई, उसके बारे में निर्णय दे देना थोड़ी ज्यादती है।

मेरा मानना है कि सीधा फैसला देने से पहले न्यूनतम जांच-परख जरूर की जाए। जैसे किसी के शेयर किए हुए कंटेंट पर आंख-मूदकर भरोसा करने से अच्छा है कि ऑफिशियल प्लेटफॉर्म पर जाकर उसे वेरिफाई किया जाए। असग़र साहब की पोस्ट पर आए कमेंट्स में ही कुछ जागरुक लोगों ने इसका फैक्ट चेक कर सही तस्वीर को सामने रखा है। बाकी खलिहरों के लिए शुभेच्छाएं, वो अपने समय का सदुपयोग करते रहें।

यहां यह गौर करने लायक बात है कि इसका कंटेंट और दिए गए स्क्रीन शॉट का कंटेंट बिल्कुल अलग है। पब्लिश्ड टाइम के बाद कोई अपडेट नहीं किया गया. मतलब किसी तरह का कोई एडिटेड वर्जन नहीं है।

Facebook post by Asghar Wajahat in Hindi claiming he was labeled a Pakistani writer; includes a long quoted explanation about a Hindi journalist and a book/review.
Poster for the film Batwara 1947 showing four people with a blazing fire in the background, used in a movie review article.

कुछ चुनिंदा कमेंट पढ़िए…

आलोक शुक्ला-
मैंने जानकारी ली है ये आज तक का आलेख है NBT का नहीं, आपको आज तक को शिकायत करनी चाहिए सर

हरि मृदुल-
असगर साहब, आप हम सबके बहुत आदरणीय हैं। आपसे मेरे व्यक्तिगत दोस्ताना संबंध भी हैं। अच्छा परिचय है। लेकिन माफ कीजिएगा सर, आप से चूक हो गई है। जैसा कि अब स्पष्ट हो चुका है, जिस रिव्यू पर आपने एतराज जताया है, वह रेखा खान लिखित ‘नवभारत टाइम्स’ का रिव्यू नहीं है। वह ‘आज तक’ वेबसाइट पर प्रकाशित हुआ है। आपसे विनम्र निवेदन है कि आप एक स्वतंत्र पोस्ट में यह स्पष्ट कर दीजिए, ताकि सच सामने आ सके।

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