संजय शर्मा-
पत्रकारिता करनी है या समाज में जहर घोलकर पैसा कमाना है, शुभांकर मिश्रा जी!
कभी हिंदू-मुसलमान. कभी किसी छात्र आंदोलन को भी हिंदू-मुसलमान के चश्मे से देखने और उसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश. और जब इससे फुर्सत मिले तो पॉडकास्ट में सेक्स क्षमता बढ़ाने वाली दवाओं और ऐसे उत्पादों का प्रचार, जिनके बारे में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं – दो मिनट में ताकत आ जाएगी, जवानी लौट आएगी, बाल काले हो जाएंगे!

आखिर पत्रकारिता का स्तर कहां ले जाना चाहते हैं!
छात्र सड़क पर अपने अधिकार के लिए उतरे तो उसकी असली समस्या पर बात करने के बजाय उसमें भी हिंदू-मुसलमान खोज लिया जाए. समाज के संवेदनशील मुद्दों को ऐसी भाषा और ऐसे कोण से पेश किया जाए जिससे लोगों के बीच धार्मिक खाई और चौड़ी हो. क्या यही पत्रकारिता है! और दूसरी तरफ उसी पत्रकार की विश्वसनीयता के सहारे स्वास्थ्य और यौन क्षमता से जुड़े उत्पाद बेचे जाएं.
सवाल बेहद गंभीर है – जिन उत्पादों का प्रचार किया जा रहा है, उनके दावों की वैज्ञानिक पुष्टि क्या है!
क्या दर्शकों को उनके संभावित नुकसान बताए जाते हैं! क्या साफ-साफ बताया जाता है कि यह पैसा लेकर किया गया प्रचार है!
पैसा कमाइए शुभांकर जी, खूब कमाइए. किसी को आपकी कमाई से परेशानी नहीं होनी चाहिए. लेकिन पत्रकारिता की कुर्सी पर बैठकर पहले हिंदू-मुसलमान का बाजार गर्म करना और फिर उसी दर्शक को चमत्कारी दवाओं और उत्पादों का ग्राहक समझना पत्रकारिता नहीं है.
पत्रकार का काम समाज की आग बुझाना होता है, हर मुद्दे में धर्म खोजकर उस आग को हवा देना नहीं. और पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी उसका बैंक बैलेंस नहीं, उसकी विश्वसनीयता होती है.
जिस दिन पत्रकार को यह फर्क समझ में आना बंद हो जाए कि वह खबर दिखा रहा है, सांप्रदायिक उत्तेजना पैदा कर रहा है या कोई उत्पाद बेच रहा है, उस दिन सवाल सिर्फ उस पत्रकार पर नहीं उठता – पूरी पत्रकारिता की साख पर उठता है.
कलम और कैमरा बहुत ताकतवर चीजें हैं. इन्हें समाज को जोड़ने के लिए इस्तेमाल कीजिए, हिंदू-मुसलमान की दुकान और चमत्कारी दवाओं का बाजार सजाने के लिए नहीं.



Rahul
August 23, 2026 at 1:20 pm
हर रोज थंबनिल में मोदी योगी सरकार गिराने वाले संजय शर्मा ने अपना चेहरा आइने में देख लिया होता, इतनी फेक न्यूज फैलाई है 4पीएम ने हिसाब नहीं. ये लेख नहीं संजय शर्मा की कुढ़न है जो उन्होंने अपने पेपर पर ली दी है. कैसे शुभांकर जैसा युवा उनकी कथित एकाधिकार को चुनौती दे रहा है.