नागपुर: भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) के अमरावती केंद्र में हिंदी पत्रकारिता का पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स इस शैक्षणिक सत्र में एक भी छात्र के दाखिले के बिना बंद कर दिया गया है। चार साल पहले शुरू हुए इस कोर्स में 30 सीटों की स्वीकृत क्षमता थी, लेकिन इस साल एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया। संस्थान के मुताबिक, किसी कोर्स को चलाने के लिए कम से कम 10 छात्रों का होना जरूरी है।
अमरावती केंद्र में हिंदी पत्रकारिता के अलावा अंग्रेजी पत्रकारिता और मराठी पत्रकारिता के कोर्स भी चल रहे हैं, लेकिन इनमें भी सीटों के मुकाबले दाखिले काफी कम रहे। अंग्रेजी पत्रकारिता में 30 सीटों के मुकाबले सिर्फ 9 छात्र और मराठी पत्रकारिता में 30 सीटों के मुकाबले 10 छात्रों ने दाखिला लिया। यानी तीनों पत्रकारिता पाठ्यक्रमों में कुल 60 स्वीकृत सीटों के मुकाबले सिर्फ 19 छात्र हैं।
छात्रों की संख्या कम होने से बंद हुआ हिंदी कोर्स
IIMC-अमरावती के क्षेत्रीय निदेशक राज सिंह कुशवाहा ने हिंदी पत्रकारिता कोर्स बंद किए जाने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि किसी पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स को संचालित करने के लिए न्यूनतम 10 छात्रों का होना जरूरी है। हिंदी पत्रकारिता में इस साल कोई दाखिला नहीं हुआ, इसलिए कोर्स को बंद करना पड़ा।
उन्होंने बताया कि केंद्र ने छात्रों को आकर्षित करने के लिए प्रचार-प्रसार समेत कई प्रयास किए थे। IIMC में पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में दाखिले CUET के माध्यम से होते हैं।
हिंदी पत्रकारिता में दाखिला लेने वाले कुछ छात्र अब IIMC के जम्मू कैंपस में शिफ्ट हो गए हैं।
छात्रों ने प्लेसमेंट और करियर को लेकर उठाए सवाल
छात्रों का कहना है कि अमरावती केंद्र में पत्रकारिता पाठ्यक्रमों के प्रति रुचि कम होने की एक बड़ी वजह प्लेसमेंट और करियर के सीमित अवसर हैं। मराठी पत्रकारिता के छात्रों ने आरोप लगाया कि संभावित छात्र रोजगार की उम्मीदों के साथ दाखिला लेते हैं, लेकिन बाद में उन्हें पर्याप्त प्लेसमेंट सपोर्ट नहीं मिल पाता।
कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि नौकरी पाने के लिए उन्हें व्यक्तिगत संपर्कों और नेटवर्किंग पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है।
फैकल्टी को लेकर भी उठे सवाल
अमरावती केंद्र में फैकल्टी की उपलब्धता को लेकर भी छात्रों ने सवाल उठाए हैं। छात्रों का दावा है कि हिंदी और अंग्रेजी पत्रकारिता में पढ़ाने के लिए एक असिस्टेंट प्रोफेसर का पद शैक्षणिक वर्ष के दौरान खाली रहा।
हालांकि, क्षेत्रीय निदेशक राज सिंह कुशवाहा ने इस आरोप से इनकार किया है। उनका कहना है कि केंद्र में UGC के मानकों के अनुरूप चार फैकल्टी सदस्य मौजूद हैं।
अंग्रेजी पत्रकारिता के छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले शैक्षणिक वर्ष में हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने के बावजूद उन्हें अंग्रेजी पत्रकारिता कार्यक्रम में दाखिला लेना पड़ा और हिंदी में पत्रकारिता के लिए पर्याप्त शिक्षण व्यवस्था नहीं थी।
चार साल पहले शुरू हुआ था अमरावती केंद्र
IIMC का अमरावती केंद्र करीब चार साल पहले शुरू किया गया था। इसकी स्थापना पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की पहल के बाद विदर्भ में पत्रकारिता और पेशेवर मीडिया शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी।
लेकिन मौजूदा आंकड़े केंद्र के सामने खड़ी चुनौती को दिखाते हैं। हिंदी पत्रकारिता में 30 में से शून्य दाखिले, अंग्रेजी पत्रकारिता में 30 में से 9 और मराठी पत्रकारिता में 30 में से 10 दाखिले हुए हैं।
इस तरह 60 स्वीकृत सीटों में सिर्फ 19 छात्रों के दाखिले के बीच हिंदी पत्रकारिता पाठ्यक्रम का बंद होना IIMC-अमरावती के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। छात्रों की कम होती संख्या, प्लेसमेंट को लेकर असंतोष और फैकल्टी से जुड़े सवालों ने इस केंद्र में पत्रकारिता शिक्षा की मौजूदा स्थिति पर बहस तेज कर दी है।


