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झारखंड

पाँचवी की किताब में कविता छपी ‘बन गया खाना..’ कवि का नाम गायब; JCERT पर लीगल एक्शन लेंगे वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार!

Dainik Bhaskar front-page Hindi news article about allegations of publishing poetry without consent; dated 30-09-2026.

झारखंड में स्कूली पाठयक्रम तैयार करने वाली संस्था झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (JCERT) कॉपीराइट उल्लंघन के एक बड़े विवाद में घिर गई है।

हिंदी के जाने-माने लेखक और पत्रकार अभिरंजन कुमार ने आरोप लगाया है कि JCERT ने उनकी एक चर्चित बाल कविता “बन गया खाना” को झारखंड राज्य में कक्षा पांच की हिंदी पाठ्य पुस्तक में पिछले लगभग एक दशकों से शामिल कर रखा है, लेकिन इसके लिए न तो उसने उनसे औपचारिक अनुमति ली, न ही उन्हें इसकी जानकारी दी, न ही इसके लिए उन्हें कोई रॉयल्टी दी, और हद तो यह कि कविता के साथ उनका नाम तक नहीं छापा, जिससे उनके सम्मान और अधिकारों का गंभीर रूप से हनन हुआ है।

आपको बता दें कि JCERT द्वारा तैयार पाठ्य पुस्तकों को राज्य के सभी सरकारी और अर्ध सरकारी विद्यालयों में पढ़ाया जाता है, लेकिन कक्षा पांच की हिंदी पाठ्य पुस्तक “भाषांजलि” में अभिरंजन कुमार की कविता “बन गया खाना” को शामिल करने के बावजूद उसने पूरी किताब में कहीं भी लेखक को क्रेडिट तक नहीं दिया है।

अभिरंजन कुमार

अभिरंजन कुमार ने बताया कि JCERT ने उनकी जिस कविता “बन गया खाना” को बिना उनकी अनुमति के और बिना उनका नाम दिए कक्षा पांच की हिंदी पाठ्य पुस्तक में छापा है, वह कविता न केवल उनके चर्चित बाल कविता संग्रह “बचपन की पचपन कविताएं” में संगृहित है, बल्कि एक अन्य प्रतिष्ठित प्रकाशक द्वारा प्रकाशित पांचवीं कक्षा की ही हिंदी पाठ्य पुस्तक के माध्यम से देश के अनेक निजी विद्यालयों में भी पढ़ाई जाती है। यह कविता “बच्चों के सर्वश्रेष्ठ गीत” नामक एक महत्वपूर्ण बाल गीत संग्रह में भी शामिल की गई है, और 27 साल पहले एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अखबार में भी प्रकाशित हो चुकी है।

अभिरंजन कुमार ने कहा कि इतने वर्षों में इतनी सारी जगहों पर उनके नाम से प्रकाशित हो चुकी कविता को JCERT द्वारा उन्हें बिना क्रेडिट दिए छापे जाने से वे इसलिए भी आहत, हतप्रभ और हैरान हैं, क्योंकि JCERT की पाठ्य पुस्तक निर्माण समिति में बड़े-बड़े आईएएस अधिकारी और शिक्षाविद मौजूद हैं, जिन्हें लेखक के कॉपीराइट अधिकारों के बारे में जानकारी न हो, यह असंभव है। ऐसे में एक दशक से ज़्यादा समय से लगातार उनके कॉपीराइट अधिकारों का उल्लंघन होते चले आना केवल एक मामूली लापरवाही नहीं कही जा सकती।

अभिरंजन कुमार ने बताया कि चूंकि अपनी विशिष्ट शैली, विषय वस्तु एवं गेयता के कारण उनकी यह कविता समूचे झारखंड के बच्चों एवं शिक्षकों के बीच विशेष रूप से लोकप्रिय है, इसलिए राज्य के अनेक स्कूलों के शिक्षकों और बच्चों ने इस गीत पर परफॉर्म करके अपने-अपने वीडियो यूट्यूब पर प्रकाशित किए हैं, जिनपर इंटरनेट सर्फिंग के दौरान एक दिन उनकी नज़र पड़ गई, जिससे उन्हें अपने कॉपीराइट अधिकारों के एक दशक से भी ज्यादा समय से होते चले आ रहे हनन की जानकारी मिली।

अभिरंजन कुमार के मुताबिक, इस पाठ्यपुत्तक में न केवल उन्हें, बल्कि अन्य लेखकों को भी क्रेडिट देने में संकोच साफ़-साफ झलकता है, क्योंकि पुस्तक की विषय सूची और रचनाओं के साथ किसी भी लेखक का नाम नहीं लिखा गया है, जबकि स्थापित और मान्य तरीका यही है कि लेखकों के नाम विषय सूची में रचनाओं के शीर्षक के सामने ही, और फिर जहां रचना प्रकाशित होती है, वहां उसके शीर्षक के साथ अथवा रचना खत्म होने पर उसके नीचे लिख दिए जाते हैं, ताकि सभी पाठकों को रचना पढ़ते समय ही यह अच्छी तरह से पता हो कि यह किनकी रचना है। लेकिन इस किताब में लेखकों के नाम पूरी किताब खत्म हो जाने के बाद आखिरी पन्ने पर डाले गए हैं। इसपर भी उनके साथ ज्यादती यह हुई है कि उनका नाम उनकी रचना के साथ इस आखिरी पन्ने पर भी नहीं डाला गया है।

अभिरंजन कुमार ने कहा कि कायदे से उनके लिए यह खुशी और गौरव की बात होनी चाहिए थी कि पाठ्य पुस्तक में प्रेमचन्द, मैथिली शरण गुप्त और रवींद्र नाथ टैगोर जैसे महान एवं कालजयी साहित्यकारों के साथ उनकी रचना भी पढ़ाई जा रही है, और राज्य के लाखों बच्चे इसे न केवल बेहद चाव, भाव और लगाव से पढ़ रहे हैं, बल्कि इस पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां भी दे रहे हैं, लेकिन JCERT के इस रवैये के कारण यह सुखद पल भी उनके लिए पीड़ादायक बन गया है।

अभिरंजन कुमार ने कहा कि JCERT के इस व्यवहार से न केवल उनके लेखकीय अधिकार और सम्मान को ठेस पहुंची है, बल्कि यह खतरा भी उत्पन्न हो गया है कि अन्य कोई भी प्रकाशक इस कविता को बिना उनके नाम के ही, या केवल JCERT पुस्तक का हवाला देकर या फिर रचनाकार के नाम की जगह “अज्ञात” लिखकर छाप दे। ऐसे तमाम आशंकित मामलों का एक तो पता चल पाना बहुत मुश्किल हो जाएगा, और यदि पता चल भी जाए, तो जवाब-तलब किए जाने पर वह प्रकाशक आसानी से यह कहकर बच निकलेगा कि उन्हें तो रचना के लेखक के बारे में पता ही नहीं था, क्योंकि उन्होंने इसे जिस JCERT पुस्तक से लिया था, वहाँ लेखक का नाम लिखा हुआ नहीं था।

यह पूछे जाने पर कि क्या वे JCERT के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई करेंगे, अभिरंजन कुमार ने कहा कि यह अंतिम विकल्प हो सकता है, यदि JCERT ने अविलंब भूल सुधार कर उनके सम्मान और अधिकारों के हनन के लिए क्षति पूर्ति नहीं की तो। हालांकि उन्होंने कहा कि कोई भी कदम उठाते समय अपनी तरफ से वह सुनिश्चित करेंगे कि झारखंड के प्यारे बच्चों की पढ़ाई में कोई व्यवधान उत्पन्न न हो।

आपको बता दें कि अभिरंजन कुमार एक वरिष्ठ पत्रकार होने के साथ ही हिंदी के एक प्रतिष्ठित साहित्यकार भी हैं, जिनके अब तक तीन कविता संग्रह देश के बड़े प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित हैं। खासकर बाल साहित्य के क्षेत्र में वो किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं, क्योंकि पिछले तीन दशकों में उनकी सैकड़ों बाल कविताएं देश के महत्वपूर्ण अखबारों, पत्रिकाओं और बाल कविता संग्रहों में प्रकाशित हो चुकी हैं, एवं हिंदी बाल साहित्य के इतिहास की अनेक पुस्तकों में भी उनके योगदान को सराहा गया है।


Hindi newspaper clipping reporting on a poem 'Ban Gaya Khana' by a Jharkhand author, with two illustrated book covers.
Two-column Hindi newspaper page with the header 'फैक्ट के टीज़' and dense body text, framed by a light border and small colored dots at the bottom.

क्या आप सोच सकते हैं कि किसी किताब में लेखक से बिना अनुमति लिये, बिना कोई रॉयल्टी दिये, हद तो यह कि बिना उसका नाम छापे कोई रचना छापी जा सकती है? राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की तर्ज पर बनाई गई झारखंड सरकार की संस्था झारखंड शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद JCERT ने कक्षा 5 की हिंदी पाठ्य पुस्तक में मेरी कविता “बन गया खाना” और मेरे साथ ऐसा ही गंभीर और अक्षम्य अपराध किया है।
यह कविता झारखंड के सभी सरकारी एवं अर्द्धसरकारी स्कूलों में पिछले कम से कम 11 वर्षों से पढ़ाई जा रही है, लेकिन इन लोगों को अपनी गलती का अहसास इतने वर्षों में भी नहीं हुआ। वह तो भला हो झारखंड के तमाम स्कूलों के मेरे प्यारे-प्यारे बच्चों और शिक्षकों का, जिन्हें यह कविता इतनी अच्छी लगती है कि वे आए दिन इसे गाते-गुनगुनाते हुए, इस पर डांस परफॉरमेंस देते हुए इसके वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करते रहते हैं। संयोगवश ऐसे ही एक प्यारे से वीडियो पर मेरी नज़र पड़ गई, और JCERT द्वारा किये जा रहे इस पाप की पोल खुल गई।
अब जबकि अपराध उजागर हो गया है, तो जवाबदेही और सज़ा भी तय करानी ही होगी। धन्यवाद।
-अभिरंजन कुमार, वरिष्ठ पत्रकार और लेखक

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