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मध्य प्रदेश

मध्यप्रदेश में 36-36 हजार रुपये में खरीदे गये LED बल्ब, मोहन सरकार के बाबुओं की जेब के हवाले 250 करोड़ रुपये, टीवी अखबारों में छाई चुप्पी!

Speaker addressing a conference in a hall as attendees listen; a bold Hindi banner about government funds misuse is visible at the top.

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में सरकारी खरीद में हुई घपलेबाजी का मुद्दा तूल पकड़ रहा है। बता दें कि 1100 करोड़ के खर्च में 250 करोड़ के अंतर का दावा किया जा रहा है। मतलब 250 करोड़ रुपये ज्यादा बढ़ाकर बिल बनवा लिया गया और रुपये महकमे के ही अफसर डकार गए। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा मध्य प्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MPSEDC) के अतिरिक्त प्रबंध निदेशक अंशुमान राज के प्रेजेंटेशन में हुआ है। जिसका कल एक वीडियो सामने आया था।

पत्रकार और यूट्यूबर अजीत अंजुम ने मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार के नगरीय विकास विभाग में सरकारी खरीद को लेकर प्रमुखता से सवाल उठाए हैं। अजीत अंजुम ने ही अंशुमान राज का वीडियो साझा किया है, जिसमें सरकारी खरीद में कथित अनियमितताओं और वस्तुओं की कीमतों में बड़े अंतर का मुद्दा उठाया गया है।

वीडियो में दावा किया गया है कि करीब 1100 करोड़ रुपये की सरकारी खरीद में लगभग 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च सामने आया है। इसे कुल खरीद का करीब 22 प्रतिशत बताया गया है। आरोप है कि सरकारी खरीद में बाजार भाव से काफी अधिक कीमत चुकाई गई। उदाहरण के तौर पर, वीडियो में एलईडी बल्ब की कीमत 350 रुपये से लेकर 36 हजार रुपये तक होने का उल्लेख किया गया है।

अंजुम ने इस मामले को आम जनता के टैक्स के पैसे के इस्तेमाल और सरकारी खर्च में पारदर्शिता से जोड़ते हुए सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि नगरीय विकास विभाग में हुई खरीद का ब्योरा सामने आने के बाद यह जांचना जरूरी है कि किन वस्तुओं की खरीद की गई, उन्हें किससे और कितनी कीमत पर खरीदा गया तथा उनका इस्तेमाल कहां हुआ।

वीडियो में सरकारी खरीद से जुड़े आंकड़ों और कीमतों के अंतर को लेकर कमीशनखोरी की आशंका भी जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना जरूरी है।

अजीत अंजुम ने अपने वीडियो में सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच खर्च की पारदर्शिता का सवाल उठाया है। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी खरीद में कथित गड़बड़ियों जैसे मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं होती।

यह मामला सरकारी खरीद की प्रक्रिया, कीमतों के निर्धारण और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल की जांच की जरूरत को सामने लाता है।


कुल 1100 करोड़ की सरकारी खरीद में 250 करोड़ की दलाली। यानी 22%. यह सीधे सरकारी बाबुओं की जेब में जा रही है। जहां पार्टी फंड की बात हो, वहां प्रोजेक्ट भी बड़ा और भूख भी बड़ी।
यह मोहन यादव का मुर्दा प्रदेश है। इस प्रदेश की रिवायत है कि पहले गोदी कुकुर मीडिया के सामने पकवान परोसकर उन्हें बताया जाता है कि सत्ता क्या खरीदेगी, कितना विकास होगा।
फिर गोदी कुकुर विकास का ऐसा तिलस्मी मकड़जाल बुनते हैं कि सब फंस जाएं और सत्ता की जय बोलें। यह मैं नहीं, यादव सत्ता के बाबू खुद कह रहे हैं। मामला है अर्बन डेवलपमेंट का।
किसी ने 350 रुपए में एलईडी बल्ब खरीदा तो कोई उसे 36 हज़ार रुपए में खरीद रहा। आम जनता के टैक्स का पैसा मनमाने फूंका जा रहा है। उधर, सत्ता गले तक कर्ज़ में डूबी है।
सबको पता है कि किस चीज़ का बाज़ार भाव कितना है। लेकिन, ज़्यादा ऊंचे दाम से जो पैसा आता है–वह 22% दलाली ऊपर से नीचे तक बंटती है।
अब विभाग के बड़े बाबू को यह सब AI बता रहा है। किसके क्या खरीदा, किससे खरीदा, कितने में खरीदा और उसका क्या किया।
इसलिए, जब आप अखबारों की सुर्खियों में यह हेडलाइन देखें–कुछ महीने में जगमग होगी सड़कें–तो समझ जाएं कि दलाली की रसीद फाड़ी जा चुकी है।
बीजेपी के न खाऊंगा, न खाने दूंगा, वाले राज में ऐसे ही विकास का ऐलान नरेंद्र मोदी वोट चोरी के सबसे बड़े उत्सव चुनाव से पहले करते हैं।
वह विकास, जिसमें सता ख़ुद दलालों, चोरों और करप्ट बाबुओं के साथ बराबर की हिस्सेदार हो।
इसीलिए गोदी मीडिया और यूट्यूबर्स ऐसी खबरों पर काम नहीं करते। अजीत अंजुम ने यह वीडियो शेयर किया है।
-सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार

मूल खबर…

मोहन यादव सरकार में 1100 करोड़ की सरकारी खरीद में बनाया 250 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बिल, MPSEDC में तैनात IAS ने खोला खेल, देखें वीडियो

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