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अब मेटा की कैंची: दिल्ली पुलिस की जबरदस्ती दिखाने वाले वीडियो और पत्रकारों के अकाउंट भारत में बैन

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को सड़क पर हिरासत झेलनी पड़ी, और अब उनकी रिपोर्टें सोशल मीडिया पर भी रुक रही हैं। पुलिस की ज़्यादती दिखाने वाले कई वीडियो मेटा ने रोक दिए और कुछ प्रोफ़ाइल भारत में ब्लॉक कर दी गईं।

‘ऑब्ज़र्वर पोस्ट हिंदी’ की 11 अक्टूबर की एक वीडियो रिपोर्ट फ़ेसबुक पर रोकी गई। नोटिस में कहा गया कि एक ‘ऑटोमेटेड सिस्टम’ ने भारत के IT नियमों का पालन न होने के आधार पर इसे रोका। यह वीडियो एक्स (X) पर अब भी मौजूद है।

मातृभूमि इंग्लिश की एक इंस्टाग्राम रील, जिसमें पुलिस से बचने के लिए एक महिला प्रदर्शनकारी खंभे से लिपटी दिखती है, रोक दी गई। हटाए जाने से पहले इसे एक करोड़ से ज़्यादा बार देखा जा चुका था, और नोटिस में ‘भारत सरकार/क़ानून प्रवर्तन’ के नोटिस का ज़िक्र था।

22 साल की स्वतंत्र पत्रकार शुभांगी दासगुप्ता का करीब 38 हज़ार फ़ॉलोअर वाला अकाउंट 12 अक्टूबर को भारत में अस्थायी तौर पर रोका गया, और अगले दिन उनके बैकअप अकाउंट पर एक महीने तक मैसेज भेजने की पाबंदी का नोटिस आया। स्वतंत्र पत्रकार मुस्कान अग्रवाल की एक रील भी रोकी गई।

‘जर्नो मिरर’ का इंस्टाग्राम पेज 13 अक्टूबर को भारत में रोका गया; इसके सह-संस्थापक और संपादक मोहम्मद अली के मुताबिक मेटा की ओर से कोई कारण बताने वाला नोटिस नहीं मिला। ‘मोलिटिक्स इंडिया’ का इंस्टाग्राम अकाउंट 10 अक्टूबर से भारत में बंद है; इसके संपादक नीरज झा ने एक वीडियो बयान में इसे ज़मीनी सच्चाई दिखाने की सज़ा बताया।

जब कैमरा सड़क पर छीना जाए और वीडियो प्लेटफ़ॉर्म पर, तो जनता तक सच्चाई पहुंचे कैसे? जिन पत्रकारों का पूरा काम और कमाई इन्हीं अकाउंट्स पर टिकी है, उनके लिए बिना कारण बताए लगी यह रोक रोज़ी-रोटी का भी मसला है।

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