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सुख-दुख

नये-नये दारू छोड़े पत्रकार भाइयों के लिए एक संदेश

शराब सिर्फ आज छोड़ी जाती है। आज नहीं पीना है। बस आज।

यशवन्त सिंह-

सुनो पत्रकार भाइयों, शराब छोड़ने का ऐलान नहीं किया जाता। चुपचाप छोड़ दी जाती है। शराब की लत बहुत कुत्ती चीज है। यह आदमी से उसके वादे, उसका आत्मविश्वास, उसकी मेहनत, उसकी ऊर्जा और धीरे-धीरे उसकी जिंदगी तक छीन लेती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि आदमी को लगता रहता है कि वह जब चाहेगा, छोड़ देगा। जबकि सच यह है कि एक बार इसकी गिरफ्त में आने के बाद इससे निकलने के लिए सिर्फ इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि रोज की सजगता, अनुशासन और मदद की भी जरूरत पड़ती है।

इसलिए सबसे पहले बड़ी-बड़ी डींगें हाँकना बंद करो। दुनिया को बताने, अपनी प्रतिज्ञाओं का ढिंढोरा पीटने और हर किसी को अपनी महानता का सबूत देने की जरूरत नहीं है। ख़ुद से पूछ कर ख़ुद में झाँक कर देखो, कितनी बार छोड़ने का वादा किया और फिर गिर गए उसी बोतल में। इसलिए अपनी जिंदगी को थोड़ा विनम्र, शांत और लो-प्रोफाइल बनाओ। ये काम अगर आज नहीं हो पा रहा है तो ऐसा बनने का लक्ष्य रखो। बोलने से ज्यादा जरूरी है करके दिखाना। ऐलान से ज्यादा जरूरी है उस ऐलान पर रोज अमल करना।

याद रखो, शराब छोड़ना कोई तमगा नहीं है जिसे सीने पर लगाकर घूमना है। यह अपने जीवन को बचाने और दोबारा हासिल करने की प्रक्रिया है।

शराब सिर्फ आज छोड़ी जाती है।

कल की चिंता में मत उलझो। पूरी जिंदगी शराब नहीं पीने की कल्पना करके अपने ऊपर पहाड़ मत लादो। बस आज का दिन निकालो। आज शराब नहीं पीनी है। रात तक नहीं पीनी है। और जब रात निकल जाए तो अगले दिन फिर अपने आप से यही कहना है कि आज नहीं पीना है।

रोज एक नया आज आएगा। तुम्हें हर रोज उस आज के सामने खड़े होकर फैसला करना है कि आज शराब को हाथ नहीं लगाऊंगा।

और जब दिन बिना शराब के बीत जाए तो उस दिन के लिए शुक्रगुजार होना सीखो। अपने भीतर, अपने आराध्य के सामने या जिस भी रूप में तुम्हारी आस्था हो, उस शक्ति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करो जिसने तुम्हें आज शराब से दूर रहने में मदद की। रोज प्रार्थना करो—हे प्रभु, चाहे जो हो जाए, आज मुझे पीने से बचाए रखना। मुझे इतनी समझ देना कि मैं अपनी कमजोरी को पहचान सकूं और वक्त रहते मदद मांग सकूं।

यह प्रार्थना किसी चमत्कार का इंतजार नहीं है। यह खुद को रोज याद दिलाने का तरीका है कि तुम्हारी जिंदगी में अब सबसे जरूरी काम क्या है।

एक बात और गांठ बांध लो। शराब की लत से बाहर निकलने का मतलब सिर्फ बोतल से दूर हो जाना नहीं है। इसका मतलब उन आदतों, उन बहानों, उन संगतों और उस मानसिकता से भी बाहर निकलना है जो बार-बार तुम्हें उसी अंधेरे में ले जाती है।

तुम्हारे भीतर कितनी ही संभावनाएं क्यों न हों, कितनी ही प्रतिभा क्यों न हो, शराब तुम्हारी ऊर्जा और समय को चूसकर तुम्हें तुम्हारे ही स्तर से नीचे खींच सकती है। तुम जिस मुकाम पर पहुंच सकते थे, वहां पहुंचने से रोक सकती है। और जो कुछ मेहनत से हासिल किया है, उसे भी खतरे में डाल सकती है।

कई बार आदमी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने के बजाय बार-बार वहीं लौट आता है, जहां से उसने शुरुआत की थी। फिर वह अपने हालात, समाज, दोस्तों, राजनीति, व्यवस्था और किस्मत को दोष देता है। लेकिन उसे यह देखने की फुर्सत नहीं मिलती कि उसकी अपनी कौन-सी आदत उसकी सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।

उम्र भी अब तुम्हारी तेजी से बढ़ती जा रही है, पत्रकार भाइयों। जिंदगी का अच्छा-खासा हिस्सा गुजर चुका है। अब बकबक करने, अपनी योजनाओं का प्रचार करने और दूसरों को अपनी महानता समझाने से ज्यादा जरूरी है अपनी ऊर्जा बचाना। चुपचाप काम करना। अपने भीतर की अव्यवस्था को दुरुस्त करना। अपने काम, अपने व्यक्तित्व और अपनी उपलब्धियों का स्तर बढ़ाना।

अपना प्रोफाइल बड़ा करना है तो पहले अपने जीवन को स्थिर बनाओ। शरीर को संभालो, दिमाग को संभालो, रिश्तों को संभालो और अपने काम पर लौटो। यह मत भूलो कि शराब से बचाया गया हर दिन तुम्हें अपने वास्तविक जीवन के थोड़ा और करीब ले जा सकता है।

लेकिन इस रास्ते पर अपनी ताकत को लेकर अहंकारी मत होना। यह मत सोचना कि अब तो मैं जीत गया, अब एक पैग से क्या होगा! लत की वापसी कई बार इसी आत्मविश्वास के रास्ते आती है। शराब से दूरी को अपनी रोज की जिम्मेदारी समझो, कोई स्थायी विजय-पत्र नहीं।

एक काम और करो। गूगल पर अपने आसपास Alcoholics Anonymous (AA) की मीटिंग या समूह तलाशो। अपने शहर में उपलब्ध मीटिंग का पता लगाओ और वहां जाना शुरू करो। ऐसे लोगों के बीच बैठो जो तुम्हारी समस्या को समझते हैं, क्योंकि वे खुद इस रास्ते से गुजर चुके हैं या गुजर रहे हैं। उनसे बात करो। उनकी सुनो। अपनी बात कहो। मदद मांगने में शर्म मत करो।

अकेले लड़ना कोई बहादुरी की शर्त नहीं है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर, काउंसलर, भरोसेमंद परिजन और सहायता समूह तुम्हारे साथी बन सकते हैं।

पत्रकार भाइयों, जिंदगी अभी भी तुम्हारे पास है। तुम्हारे भीतर अभी भी काम करने, सीखने, आगे बढ़ने और कुछ सार्थक करने की संभावना है। बस अपनी ऊर्जा उस चीज को मत सौंपते रहो जो तुम्हें भीतर से कमजोर करती है।

दुनिया को बताने की जरूरत नहीं कि तुमने शराब छोड़ दी है। अपने आज को इस बात का गवाह बनाओ कि तुमने नहीं पी।

फिर कल आएगा। उस दिन भी यही करना।

शराब सिर्फ आज छोड़ी जाती है। आज नहीं पीना है। बस आज।


उपरोक्त पोस्ट लिखने की वजह है मनीष दुबे की ये पोस्ट-

Close-up of a man wearing dark sunglasses and a mustache, looking at the camera.

विजयदशमी की रात जैसे ही रावण जला, आपका भाई भी जीत गया… हाँ, इस बीच बुखार भी आया। विजयदशमी से पहले लगातार तीन रात। हल्की सर्दी लगती और शरीर कांपने लगता। एसी पंखा सब बंद। तीन चादरें ओढ़कर सोया। नींद न आए।

लेकिन रावण जलने की रात जैसे मैं भी जीत गया। उस रात शरीर में कोई तपन नहीं हुई। और अब तक नहीं ही हुई। मेरी बुरी आदत पर जैसे मेरे मन ने काबू पा लिया। अब तो पाँच बजे सुबह को पांच किमी वॉक शुरू है।

दो अक्तूबर से शराब एक बार फिर बंद कर दिया हूँ। लगा यार बस अब नहीं… बहुत डकार लिए। बहुत खाली कांच बिकवा दिया कैंटीनों, ढाबों और दुकानों से। तमाम कांच घर में खाली करके फेंका।

यकीन जानिए बड़े भाई के आकस्मिक निधन के बाद ऐसा कोई दिन नहीं गया होगा जिस दिन शराब पीकर न सोया होऊं। नींद ही नहीं आती थी। हां कभी कभार कहीं गया या कोई अपवाद भरा दिन छूटा हो तो अलग बात है।

ठीक ठीक याद करूं तो मैंने 2007-8 में शराब पीना शुरू किया था। यदा कदा। 2009 में दिल्ली गया तो वहां हर दो चार दिन में होने लगा।

यहां तक की दारू ही वो वजह रही जिसके चलते मेरे वास्ते तिहाड़ का रास्ता खुला था। कहानी दर्ज है जेल जर्नलिज्म के रूप में। गूगल सर्च कर लीजिए।

शराब से आजतक वही पनप सका है जो इसका व्यापार करता है। रोज-रोज पीने वाले सिवाय एडिक्ट होने के जिंदगी में कुछ हासिल थोड़े ही नहीं कर पाते। वैसे भी शराब इसके लिए नहीं होती कि सरकार का राजस्व बढ़वाते-बढ़वाते एक दिन आप खुद आंकड़ों में दर्ज हो जाओ।

पियक्कड़ लोग जो होते हैं, उनके जीवन में शराब किसी महबूबा की तरह हो जाती है। हर एक शराबी बस यही सोचता है कि आज पी लें.. साला अब कल से न पिएंगे।

बस, यहीं वह मात खाता जाता है। और रोज-ब-रोज यही दुहराता रहता है। इसलिए जो लोग इसे छोड़ना चाहते हैं, मन पर कंट्रोल कर फौरन तौबा कर लें।

एक जरूरी बात, शराब छोड़ने के बाद कुछ दिन जरूर प्रॉब्लम होती है। आपको, जैसे ही पीने की चुल्ल उठे, पेट भर लें। रोटी चार की जगह पांच खा लें। जब जगह ही न बचेगी पेट में तब घंटा कुछ लेने की इच्छा ही न सिर उठाएगी। आजमाया नुस्खा है।

और इससे भी बड़ी बात, जिसने अपने मन पर काबू पा लिया उसके लिए कुछ भी करना पाना छोड़ना आसान हो लेता है।

जै महाकाल।।

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