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पकौड़े बेचने वालों के लिए फ़िल्म सिटी में कर्फ्यू…

Prabhakar Mishra : फ़िल्म सिटी में कर्फ्यू …. मोदी जी ने अपने ऐतिहासिक साक्षात्कार में फ़िल्म सिटी में न्यूज़ चैनल के बाहर पकौड़ा बेचने वाले जिस व्यक्ति के रोजगार का ज़िक्र किया था वह साहनी बेरोजगार हो गए। केवल साहनी ही नहीं, फ़िल्म सिटी में चाय का खोखा झारिस्ता वाले झा जी, ऑमलेट वाले गुप्ता जी, जैसे छोटी छोटी दुकान वाले, खोमचा लगाने वाले, रेहड़ी पटरी वाले सैकडों बेरोजगार हो गए।

कोई चर्चा नहीं , कोई शोर नहीं। न न्यूज़ चैनल वालों का और न ही बेरोजगारी को मुद्दा बनाने वाले विपक्ष का। दो हफ्ते से बेरोजगारी की मार झेल रहे छोटे छोटे गरीब दुकानदारों ने क्षेत्र के युवा विधायक पंकज सिंह (सुपुत्र श्री राजनाथ सिंह जी, गृहमंत्री, भारत सरकार) से गुहार भी लगाई। लेकिन अभी तक गुहार अनसुनी है।

नोएडा सेक्टर 16-ए फ़िल्म सिटी जहाँ तमाम न्यूज़ चैनल्स का हेडक्वार्टर है वहाँ आजकल अघोषित कर्फ्यू लगा है। चाय-पकौड़े की दुकानें बंद हैं, छोले कुलचे वालों को फ़िल्म सिटी में खड़ा होने पर पाबंदी लगा दी गयी है। मतलब कि वो सारी छोटी छोटी दुकानें, खोमचे बंद कर दिए गए जहाँ आभिजात्य मीडिया के दलित कर्मचारी दस- बीस रुपये में कुछ खा पी सकते थे।

आजकल गरीब छोटे मोटे पत्रकार बेचारे एक कप चाय के लिए तरस गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस ‘कर्फ्यू’ के पीछे किसी संपादक का हाथ बताया जा रहा है, लेकिन सूत्र कभी कभी गलत भी होते हैं !

फ़िल्म सिटी में लगभग 25 से 30 हज़ार लोग काम करते हैं। 5 से 7 हज़ार लोग रोजाना काम काज के सिलसिले में बाहर से आते हैं। सेक्टर का सर्किल रेट लाखों में होगा। इस फ़िल्म सिटी में प्राधिकरण द्वारा न तो एक सिंगल टॉयलेट बनवाया गया और न ही एक कियोस्क हैं। अगर ये होते हो शाम की चाय पानी का कोई आधिकारिक जुगाड़ हो पाता और प्राधिकरण को राजस्व की कमाई भी। लेकिन परवाह किसी को नहीं।

विडंबना देखिए कि दुनिया भर की समस्याओं पर छाती पीटने वाले टीवी चैनल के ‘दलित -लाचार’ पत्रकार अपनी इस व्यथा को किसी से कहने की हालत में नहीं!

अगर आप को फ़िल्म सिटी के इस ‘बंद’ के पीछे की वजह पता हो तो जरूर बताइये। अगर आप पत्रकार हैं और पंकज सिंह जी या प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंच हो तो यहां के छोटे छोटे बेरोजगार दुकानदारों और छोटे छोटे ‘दलित’ गरीब पत्रकारों की समस्याओं से रूबरू जरूर कराएं, बड़ी कृपा होगी।

न्यूज24 के पत्रकार प्रभाकर मिश्रा की एफबी वॉल से.

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