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हिंदी और चिंकी!

रंगनाथ सिंह-

थीसिस वही है कि अमेरिका-यूरोप को समझ में आ गया है कि भारत के पब्लिक-स्फीयर को इंडियन इंग्लिश के दम पर कंट्रोल-मैनिपुलेट करना अब मुमकिन नहीं है।


चिंकी सिन्हा जब से आउटलुक की सम्पादक बनी हैं तब से वहाँ हिन्दी की पूछ बढ़ गयी है। बीबीसी हिन्दी के कहने पर कथित भूल-सुधार छापने का प्रसंग छोड़ दें तो चिंकी जी के नेतृत्व में आउटलुक इंग्लिश सराहनीय हिन्दी सेवा कर रही है। यही कारण है कि कई जगहों पर छपी इस अहम खबर का स्क्रीनशॉट लेने के लिए आउटलुक को मौका दिया गया।

यह तस्वीर साझा करने का केवल इतना मकसद है कि कुछ दिन पहले हिन्दी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को लेकर जो स्थापना दी थी उसे और पुख्ता किया जा सके। सुब्रत राय वाले सहारा चैनल के प्रधान सम्पादक उपेंद्र राय ने हाउस ऑफ लॉर्डस वालों के बीच हिन्दी में भाषण दिया। ब्रिटिश राज्यसभा सदस्यों ने उनकी पत्रकारिता की सराहना की। उपेंद्र राय यूपी के गाजीपुर के रहने वाले हैं।

थीसिस वही है कि अमेरिका-यूरोप को समझ में आ गया है कि भारत के पब्लिक-स्फीयर को इंडियन इंग्लिश के दम पर कंट्रोल-मैनिपुलेट करना अब मुमकिन नहीं है। अब भारतीय भाषा के बुद्धिजीवियों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त बुद्धिजीवी बनाना होगा।

मुझे यह अन्देशा भी हो रहा है कि अगले कुछ सालों में कहीं स्टालिन हिन्दी के मुद्दे पर यूटर्न न ले लें। उनके द्वारा द्रमुक की कमान अपने पुत्र विधायक उदयनिधि के हाथों में सौंपने तक भाजपा तमिलनाडु में काफी मजबूत हो चुकी होगी। अनुपात के आधार पर भारत से ज्यादा हिन्दू तमिलनाडु में हैं। भारत में करीब 79 प्रतिशत हिन्दू हैं तो तमिलनाडु में लगभग 87 प्रतिशत।

उत्तर भारत में राम नाम ने भाजपा को भवसागर पार कराया तो दक्षिण भारत में बाबा भोलेनाथ हिन्दी-द्वेष का गरल कण्ठ में धारण करके द्रविड़ लोक में चल रहे सागर-मंथन की दिशा बदल सकते हैं।

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