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उत्तराखंड

34 विधायकों को चाय पानी के लिए 20-25 लाख रुपये खर्चा देने वाले हरीश रावत प्रदेश की सवा करोड़ जनता को भी कुछ देंगे?

Shiv Prasad Sati : हरीश रावत जी इन 34 विधायकों को तो आप चाय पानी का खर्चा, 20-25 लाख रुपए देकर संतुष्ट कर देंगे लेकिन प्रदेश की सवा करोड़ जनता किससे चाय पानी का खर्चा मागेंगी, यह भी साफ-साफ कर दीजिए जिस तरह उत्तराखंड को पहले हांक रहे थे, क्या उसी तरह आगे की कार्यवाही भी चलेगी। जब यह सुना कि आप विधायकों को चाय पानी के लिए 20-25 लाख रुपए चाय पानी के लिए दे सकते हैं तो खाने-पीने के लिए कितना देंगे, कैसे देंगे, कब देंगे। आप विधायकों को मैनेज करते रहो, जनता तड़पती रहेगी।

Shiv Prasad Sati : हरीश रावत जी इन 34 विधायकों को तो आप चाय पानी का खर्चा, 20-25 लाख रुपए देकर संतुष्ट कर देंगे लेकिन प्रदेश की सवा करोड़ जनता किससे चाय पानी का खर्चा मागेंगी, यह भी साफ-साफ कर दीजिए जिस तरह उत्तराखंड को पहले हांक रहे थे, क्या उसी तरह आगे की कार्यवाही भी चलेगी। जब यह सुना कि आप विधायकों को चाय पानी के लिए 20-25 लाख रुपए चाय पानी के लिए दे सकते हैं तो खाने-पीने के लिए कितना देंगे, कैसे देंगे, कब देंगे। आप विधायकों को मैनेज करते रहो, जनता तड़पती रहेगी।

आप तो डेनिस बेचकर, खनन कर इधर-उधर कर कमा लेंगे लेकिन जनता बेचारी क्या करेगी यह भी बता देना? जनता को चाय पानी का 20-25 लाख रुपया कब मिलेगा जनता भी आपके पास आने को आतुर है। आप तो बड़े पुराने घाघ राजनीतिज्ञ हैं। झूठ बोलने में आप बड़े माहिर हैं। चलो विधानसभा में आपने कुछ विधायकों को चाय पानी का खर्चा देकर मैंनेज कर लिया। लेकिन अब आने वाला समय उत्तराखंड के लिए काफी कठिन है। खर्चा पानी से अगर प्रदेश चलता है तो मैं आपकी सोच को सलाम करता हूं, लेकिन उत्तराखंड राज्य आज भी अपने अभागे राजनीतिक दिशा के लिए रो रहा है। सोचा था कि हरीश रावत जैसे राजनीतिज्ञ आएंगे और उत्तराखंड का बेड़ा पार होगा लेकिन यहां तो नंगे, नंगों को नोच रहे हैं आपके विधायक ही आपको ब्लैकमेल कर रहे हैं जनता की क्या हिम्मत वह आपके सामने कुछ गिड़गिड़ांए। 46 सलाहकार रखने वाले आप जैसे अनुभवी और राजनीतिज्ञ आप समझ सकते हैं कि 46 लोगों का महीने का खर्चा क्या होगा? चलिए जनता सब जानती है, लेकिन फिर भी आप प्रदेश के मुखिया क्योंकि जो सरकारी राजकोष है वह जनता और हमारे दिए हुए टैक्स से ही चलता है।

यह कब तक चलता रहेगा! जिस तरह से 2 – 2 स्टिंग यहाँ की जनता ने देखे कि कैसे कांग्रेस के मुख्यमंत्री और विधायक साफ साफ नेताओं को खरीदने की लाखों की बोलियाँ लगा रहे थे,, तो क्या देश की न्यायपालिकाओं ने इस तथ्यों को दरकिनार करके ही सारे फैसले किये ?? और एक बार भ्रष्टाचारियो को फिर से राज्य को लूटने का सुनहरा मौका दे दिया !! खैर ,, माननीय न्यायालय ने तो जो भी किया उसके आगे सब बेबस हो सकते हैं ! लेकिन , क्या उत्तराखंड की जनता आगामी चुनावों में ये सब भूल जायेगी ?? या फिर से कांग्रेस के जाल में फंस जायेगी?

उत्तराखण्ड की जनता को फिर से बेवकूफ बनाकर पैसा देकर वोट खरीदकर ,, वो सत्ता हासिल कर ही लेगी ! आखिर इतना कमाया किस काम आएगा ?? जीत गए तो फिर से लूट लेंगे उत्तराखंड को !! सारे माफिया उनके इशारों पर नाचते हैं ,, प्रशासन उनकी मुट्ठी में रहती है !!उत्तराखंड में जिस तरह से हरीश रावत और मदन बिष्ट के स्टिंग ने यह साफ जाहिर कर दिया था कि विधायकों का मोल-भाव हो रहा है, इधर भाजपा ने कांग्रेस के 10 विधायक तोड़े और उधर कांग्रेस ने भाजपा के भीमलाल को।

लेकिन सवाल यह तैरता रहा कि विधायकों की खरीद-फरोख्त हो रही है, इस पर राज्य की जांच एजेंसियां और राज्यपाल की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लेकिन जिस तरह से विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने हरीश रावत के लिए संवैधानिक मर्यादाओं को तार-तार किया वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है। उत्तराखंड में नियम-कानून को जिस तरह से धत्ता बताते हुए सारे सवाल खड़े हो चले हैं उससे लगता है कि लोकतंत्र की हत्या हुई है और विपक्ष भी लोकतंत्र बचाओं के नाम पर जिस तरह से रैलियां निकाल रहा था और अंतिम क्षणों तक विधायकों को समेटने में नाकाम रहा वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है।

आखिर सवाल उठता है कि कुछ चंद विधायकों को हरीश रावत कब तक 20-25 लाख रुपए खर्चा देकर अपनी सरकार चलाते रहेंगे सोशल मीडिया में कुछ लोगों का कहना है कि उत्तराखंड में जंगलराज का पार्ट-2 शुरु हो चुका है लेकिन लोकतंत्र में जनता के चुने हुए विधायक को मुख्यमंत्री से खर्चा पानी लेकर काम चला रही है और उत्तराखंड की जनता जाएगी तो जाएगी कहां? लेकिन प्रदेश के मुखिया पहले भी विवादों में विवादित रहे और अब उन पर स्टिंग और सीबीआई जांच भी चल रही है लेकिन हरीश रावत फिरकी देने में माहिर हैं जलेबी जैसी बातें उनके लिए आम है उनके लिए सिर्फ कुर्सी ही लोकप्रिय है।

उत्तराखंड की जनता आज भी अपने को असुरिक्षत महसूस कर रही है उत्तराखंड में अब देखना है कि हरीश रावत पार्ट-2 में बदले हुए नजर आते हैं या पिछली सरकार की तरह धन लुटाते हुए नजर आएंगे। लेकिन मेरी आप से गुजारिश है कि अगर आप अपने पार्ट-2 में कोई बड़े जनहित के फैसले लें तो यह जरूर सोचना कि यह आम लोगों के टैक्स के पैसे हैं, सरकारी खजाने को लुटाना नहीं बल्कि जनहित के कार्यों पर सोच-समझ कर लगाना। हम आपसे उम्मीद करते हैं कि आप पार्ट-2 में अच्छा काम करेंगे।

उत्तराखंड के पत्रकार शिव प्रसाद सती के फेसबुक वॉल से.

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