
कमला नेहरू कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) के हिंदी विभाग द्वारा आयोजित ‘हिंदी उत्सव’ 2024 में इस बार एक खास आकर्षण थे वरिष्ठ पत्रकार और तकनीकी विशेषज्ञ राहुल पाण्डेय। हिंदी दिवस (14 सितंबर) के अवसर पर नव संगोष्ठी कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में, जहां एक ओर हिंदी के साहित्यिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर चर्चा हुई, वहीं राहुल पाण्डेय ने हिंदी और वैश्विक भाषाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे छात्रों का ध्यान पूरी तरह से आधुनिक तकनीक की तरफ खींचा गया।
राहुल पाण्डेय, जो कई प्रमुख समाचार पत्रों और वेबसाइटों में पत्रकारिता के साथ-साथ संस्थानों को नई तकनीकों का प्रयोग सिखाते रहे हैं, ने इस अवसर पर हिंदी भाषा को नए जमाने की तकनीक के साथ जोड़ने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को न केवल हिंदी में, बल्कि अन्य वैश्विक भाषाओं में भी विस्तार से समझाया। उनके व्याख्यान का सबसे प्रभावशाली पहलू तब आया जब उन्होंने AI का लाइव डेमो प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने यह दिखाया कि AI किस प्रकार भाषा की शिक्षा में एक सहायक साधन बन सकता है।
राहुल पाण्डेय ने छात्रों को हिंदी के डिजिटल भविष्य की झलक दिखाते हुए बताया कि कैसे AI की मदद से हिंदी पढ़ने-पढ़ाने के तरीके को बदला जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से यह समझाया कि AI का उपयोग भाषा के शिक्षण और उसके प्रसार में किस प्रकार किया जा सकता है, जिससे हिंदी को एक वैश्विक मंच पर और सशक्त किया जा सके। उनके व्यावहारिक उदाहरणों ने विद्यार्थियों को गहरी समझ दी और AI के प्रति उत्साह भी जगाया।
राहुल पाण्डेय का हिंदी और तकनीक से गहरा नाता रहा है। वो आईआईएमसी सहित कई संस्थानों में छात्रों और शिक्षकों को एआई तकनीक के प्रयोग के बारे में बताते रहे हैं। खास बात यह है कि वे यह प्रशिक्षण अवैतनिक रूप से देते हैं, जिससे तकनीक को लेकर उनका जुनून और सामाजिक योगदान की भावना साफ झलकती है।
कार्यक्रम में, राहुल पाण्डेय के अलावा, भारतीय भाषा केंद्र (जेएनयू) के प्रो. सुधीर प्रताप सिंह ने हिंदी और भारतीय भाषाओं के सह-संबंध पर रोशनी डाली। उन्होंने द्रविड़ और आर्य भाषा परिवारों के बीच सामंजस्य की बात की और हिंदी की बोलियों की ताकत को रेखांकित किया।

लोकप्रिय कवि गजेन्द्र सोलंकी ने अपनी ओजस्वी कविताओं और वक्तृता से कार्यक्रम में उत्साह का संचार किया। उनकी कविताओं और वक्तव्यों ने श्रोताओं को भावनाओं की लहर पर बहा दिया। उनकी पंक्तियाँ, “हिंदी अगर मेरी मां है तो अन्य भारतीय भाषाएं मेरी मौसियां हैं,” ने भारतीय भाषाओं के प्रति उनके प्रेम को और गहराई से प्रकट किया।
कॉलेज की प्राचार्या प्रो. पवित्रा भारद्वाज ने हिंदी को राष्ट्र की एकता का प्रतीक बताते हुए छात्रों को हिंदी के महत्व से परिचित कराया। उन्होंने हिंदी में कार्य करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करने की बात की और हिंदी को भविष्य में और अधिक सशक्त करने के लिए आधारभूत सुविधाओं का वादा किया।
इस कार्यक्रम में एक पुस्तक प्रदर्शनी और आशुभाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसमें राजकमल प्रकाशन, सेतु प्रकाशन, और अन्य प्रमुख प्रकाशकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी विभाग की डॉ. साधना अग्रवाल ने किया, और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. रजत रानी ‘आर्य’ ने दिया।



