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दिल्ली

अरविंद केजरीवाल और गोपाल राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग क्यों उठने लगी? जानिये विस्तार से

दिल्ली में दिहाड़ी मजदूरों के निर्माण शेष में बड़ा घोटाला

नयी दिल्ली, 30 दिसंबर। भाजपा के संस्थापक सदस्य, पूर्व सांसद डॉ आर के सिन्हा ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार पर दिहाड़ी निर्माण मजदूरों का करोड़ों रुपया हड़पने का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और श्रम मंत्री गोपाल राय के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है।

आज यहां कांस्टीट्यूशन क्लब में भीड़ भरे संवाददाता सम्मेलन में पूर्व सांसद डॉ सिन्हा ने कहा कि दिल्ली सरकार के श्रम विभाग में कई शिकायतें लंबित पड़ी हैं, लेकिन उनकी जांच नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं को फर्जी निर्माण मजदूर बनाकर असली मजदूरों के हक पर डाका डाला। उन्होंने सरकार से इस मामले की जांच सीबीआई से जांच कराने की मांग की है।

भाजपा के पूर्व सांसद ने कहा कि बिहार, उड़ीसा और अन्य राज्यों से आए मजदूरों का पंजीकरण न करके ईमानदारी की दुहाई देने वाली सरकार ने अपने लोगों का पंजीकरण कराया। जबकि उसका सत्यापन भी नहीं कराया गया।

श्री सिन्हा ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अपने स्तर पर यूनियनों का गठन करके उसके मनमाने सदस्य बनाए और उन्हें कैडर के रूप में इस्तेमाल किया।

पूर्व सांसद ने दावा किया कि 2014 से चल रहा यह घोटाला इस समय भी चल रहा है। यदि केंद्र सरकार ने अंधाधुंध तरीके से बांटी जा रही राशि पर रोक नहीं लगाई तो यह 45 सौ करोड़ तक पहुँच जाएगी।

उन्होंने कहा कि जालसाजी से किये गए पंजीकरण की सीबीआई जांच कराई जाए। श्री सिन्हा ने केंद्र सरकार से मांग की है कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करके मुकदमा चलाया जाए।

उन्होंने बताया कि पाक्षिक पत्रिका ‘यथावत’ ने फरवरी 2018 में इस घपले को जोर शोर से उठाया था। बाद में एंटी करप्शन ब्यूरो में मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन मामला आप सरकार की सेटिंग और लालफीताशाही में उलझ गया।

संवाददाता सम्मेलन में मौजूद रहे पत्रिका ‘यथावत’ के समूह संपादक, वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री राम बहादुर राय ने बताया कि बिना जांच के दिल्ली सरकार ने जो पैसा बांटा वह असल मजदूर को नहीं मिला। सरकार ने मनमानी करते हुए पार्टी समर्थकों को फायदा पहुंचाया।

इस अवसर पर पूर्व संयुक्त श्रम आयुक्त मुनीष गौड़ ने दिल्ली सरकार द्वारा किये जा रहे फर्जीवाड़े का पूरा चिट्ठा खोला। उन्होंने बताया कि 2005 में दिल्ली में पांच से छह मजदूर यूनियन हुआ करती थी। सरकार ने घपला करते हुए इनकी संख्या 90 से 100 पहुँचा दी है। इसमें सरकार के विधायक भी संलिप्त हैं।

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