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चैनल 4 की महिला पत्रकार ने मेहदी को इस तरह पकड़ा

आतंकी संगठन आईएस से जुड़े ट्विटर अकाउंट के कथित संचालक मेहदी मसरूर बिस्वास को ब्रिटिश चैनल-4 न्यूज ने बड़ी चालाकी से बेनकाब किया। जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश न्यूज चैनल की तरफ से एक महिला पत्रकार इस ट्विटर अकाउंट से जुड़ी और दोनों तरफ से लगातार ट्वीट्स होने लगे। कुछ महीनों तक यह सिलसिला चलता रहा। फिर बात दोस्ती तक आ पहुंची। दोनों में भरोसा इतना बढ़ा की मेहदी मसरूर बिस्वास ने उस महिला को न सिर्फ अपनी पहचान बताई, बल्कि उसे अपना मोबाइल नंबर भी दिया।

आतंकी संगठन आईएस से जुड़े ट्विटर अकाउंट के कथित संचालक मेहदी मसरूर बिस्वास को ब्रिटिश चैनल-4 न्यूज ने बड़ी चालाकी से बेनकाब किया। जांच एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, ब्रिटिश न्यूज चैनल की तरफ से एक महिला पत्रकार इस ट्विटर अकाउंट से जुड़ी और दोनों तरफ से लगातार ट्वीट्स होने लगे। कुछ महीनों तक यह सिलसिला चलता रहा। फिर बात दोस्ती तक आ पहुंची। दोनों में भरोसा इतना बढ़ा की मेहदी मसरूर बिस्वास ने उस महिला को न सिर्फ अपनी पहचान बताई, बल्कि उसे अपना मोबाइल नंबर भी दिया।

इसी नंबर में उस महिला पत्रकार ने मेहदी मसरूर का इंटरव्यू लिया, जो कि ब्रिटिश न्यूज चैनल पर चला और इसकी बुनियाद पर चैनल ने बताया कि ट्विटर पर @shamiwitness का संचालक भारत के बेंगलुरु शहर में रहता है। यह खबर जैसै ही बेंगलुरु पुलिस को मिली, उसने क्राइम ब्रांच को इसकी जांच में लगा दिया। क्राइम ब्रांच के जॉइंट कमिश्नर हेमंत निम्बालकर और डीसीपी अभिषेक गोयल ने फौरन कमान संभाली। अभिषेक गोयल ने आईआईटी कानपुर से कंप्यूटर सायंस की पढ़ाई की है और साइबर क्राइम में उनकी खासी दिलचस्पी है। क्राइम ब्रांच ने मेहदी मसरूर नाम के उन सभी लोगों से पूछताछ की, जिनके ट्वीटर अकाउंट हैं।

इसी बीच इस टीम को कर्नाटक पुलिस की आंतरिक सुरक्षा प्रकोष्ठ और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों से कुछ अहम सुराग मिले, जिसकी बुनियाद पर शनिवार तड़के करीब तीन बजे क्राइम ब्रांच की टीम शहर के उत्तरपूर्वी इलाके के उस अपार्टमेंट में पहुंची, जहां 24वर्षीय का मेहदी मसरूर बिस्वास रह रहा था। वह पश्चिम बंगाल का रहने वाला है और 2012 से बेंगलुरु में रह रहा है। बतौर इंजिनियर एक मल्टिनैशनल कंपनी के फूड डिवीजन में काम कर रहा था।

कर्नाटक पुलिस के डीजीपी एल पचाओ के अनुसार, मेहदी मसरूर आईएसआईएस के अरबी के ट्वीट्स को अंग्रेजी में अनुवाद कर उन्हें रीट्वीट करता था। पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 125, यूएल (गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम) की धारा 39 और सूचना तकनीक एक्ट की धारा 6 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। मेहदी को जिस अधिकारी ने गिरफ्तार किया है उन्होंने उससे पूछतॉछ के बाद कहा, ‘वह प्रतिभाशाली और धर्मान्धता को लेकर कन्फ्यूज है।’ जॉइंट कमिश्नर हेमनाथ निम्बालकर ने बताया, ‘मेहदी आईएस का पैदल सैनिक नहीं बनना चाहता था। वह स्ट्रैटिजिस्ट बनने की इच्छा रखता था। वह कॉलेज के दिनों में धर्म को लेकर उत्साहित नहीं था लेकिन जल्द ही वह अतिवादी विचारों की जड़ों तक पहुंचने लगा।

मेहदी ने सीरिया, फिलिस्तीन, लेबनान, जॉर्डन, इजरायल और तुर्की के बारे में खूब पढ़ा है। यद्यपि वह इन देशों में कभी नहीं गया है लेकिन इनके बारे में गहरी जानकारी रखता है।’ मेहदी इस्लामिक स्टेट के विचारों से सहमत है। जब उससे पूछा गया कि वह भारत में ही इस तरह की कोशिश क्यों नहीं करता है, तब उसने कहा कि यहां के मुस्लिम जिहाद करने में सक्षम नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के पढ़े लिखे आतंकवादियों के बीच @shamiwitness नाम का ट्विटर अकाउंट लोकप्रिय हुआ, तो एक ब्रिटिश न्यूज़ चैनल इस अकाउंट के तह तक जाने की कोशिश में जुट गया, क्योंकि आईएसआईएस को समर्थन दे रहे करीब 21,000 ट्विटर अकाउंट्स में इसके सबसे ज्यादा फॉलोअर्स थे। इस अकाउंट के बंद होने से पहले इसके फोलोअर्स की तादाद 17,700 के करीब थी।

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