Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

54 साल के इस चर्चित योगाचार्य की साइलेंट हार्ट अटैक से मौत!

यशवन्त सिंह-

इतना सब करने का क्या फायदा! न ठीक से सोना, न ठीक से खाना! वैसे साइलेंट हार्ट अटैक तो ठीक से खाने सोने वालों को भी आ रहा है। अभी कल परसों ही एक वीडियो देख रहा था किसी युवक की खड़े खड़े हार्ट अटैक से मौत की।

नरपत सिंह– मृत्यु के बाद नकारात्मक टिप्पणी उचित नहीं, फिर भी हम सभी को इनसे सीख लेनी चाहिए। ये नाम के योगाचार्य लग रहे, 54 की उम्र है और फोटो में 70 के लग रहे। इन्होंने शरीर के साथ अति की। रात एक बजे उठकर स्नान करना, योग पूजा करना एक तरह से निशाचरी कर्म ही कहलाएगा। ये अपनी सहज प्राकृतिक नींद भी पूरी नहीं कर पाते होंगे। नासमझ हठी इसी गति को प्राप्त होते है। किसी भी व्यक्ति को शरीर के साथ जबरदस्ती नहीं करना चाहिए। कम से कम 4 बजे तक सोना अनिवार्य है क्योंकि 1 बजे से 4 बजे तक की नींद बहुत ज़रूरी नींद होती है। खान-पान भी सही लेना चाहिए। आजकल वो देशी खान-पान नहीं मिल रहा है और न वो हवा पानी‌। जीवन का कोई ठिकाना नहीं। डॉक्टर वैद्य भी अचानक टें बोल जाते हैं।

जैनेंद्र मोहन- एक दिन सब ने किसी न किसी बहाने जाना है, योगाचार्य की आत्मा को शांति मिले.. इससे हमें यह सीख मिलती है कि – जीवन में योग और भोग के लिये किसी आचार्य की सलाह मत लो, अपने शरीर के हिसाब से स्वयं के शरीर को उपचारित करो। शरीर और दिमाग से जबरदस्ती ही रोग का कारण बनती है। मुझे लगता है अति हर चीज की खराब होती है शायद यह उसी के दुष्परिणाम है।

अम्बर पांडेय- लगता है सोडियम कम हो गया था। वैसे मुँह देखकर अपनी उमर से बहुत ज़्यादा भी दिख रहे है। सत्तर के आसपास दिख रहे है योगाचार्य जी। नमक और चीनी न लेना यानि दिमाग और खून में ग्लूकोस और सोडियम की कमी। हार्ट अटैक होना स्वाभाविक रहा होगा। एक महीने से नमक बंद कर दिया था। एक बजे उठना रातों को भागते फिरना, तरह तरह के रिकॉर्ड क़ायम करना यह बिल्कुल स्वस्थ जीवनशैली नहीं है। रात में 1 बजे उठना ही असंगत लगता है। इस तरह की योगिक दिनचर्या से जब 54 साल में प्रयाण कर गए, तब खाते-पीते, एंज्वाय करते, भरपूर नींद में साइलेंट जाना ज्यादा बेहतर।

मुकेश पंत- शक्कर, नमक नहीं खाना, सिर्फ नींबू पानी लेना। फल भी बंद कर देना। सिर्फ पांच घंटे ही सोना। ठंड में भी गरम कपड़े नहीं पहनना। इतना ज्यादा व्यायाम। ये कोई अच्छी बात नहीं। प्रकृति ने जो मनुष्य के लायक चीजें बनाई है तो उनका नियंत्रित मात्रा में उपभोग अवश्य करना चाहिए। मजबूरी न हो तो आठ घंटे तो अवश्य सोना चाहिए। मनुष्य के शरीर में कपड़ों के आविष्कार के बाद शनै शनै बाल कम हो गए हैं, ठंड में गरम कपड़े इस्तेमाल न करना गलत है। प्रकृति से शरीर नहीं लड़ सकता। इसलिए कहा जाता है कि अगर कोई भी दिक्कत है तो मान्यता प्राप्त चिकित्सक से ही दिखाए , नियमित जांच कराए और चिकित्सक के सलाह के अनुसार नियमित दवा ले । आज भी बहुत सारे लोग है जो डॉक्टर के बताए दवा लेने के बजाय सिर्फ कसरत और नीम हकीम के बताए हुए आयुर्वेदिक सलाह को ज्यादा तवज्जो देते है । आज कल कोविड के बाद शरीर पहले जैसा नहीं रह गया है ज्यादा कसरत योग या जिम भी शरीर को नुकसान कर रहा है ।

अनिल गहरवार- शरीर पर इस तरह का अत्याचार नही करना चाहिए…. नमक शक्कर का संतुलित प्रयोग एवं अल्प मात्रा में विविध शुध्द खानपान तथा दौड़ने के बजाय पैदल चलना एवं योग को अपनाना चाहिए। वैसे, फिजिकल फिटनेस टिप्स देने के तात्पर्य को मौत रोकने से जोड़ा जाना ही सबसे बड़ी बेवकूफी वाली बात है। प्यास नको भी लगती है जो नदियों के किनारे बसे होते हैं।


CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन