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सियासत

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत के अर्थव्यवस्था संबंधी आँकड़ों की विश्वसनीयता को ‘बी’ से गिराकर ‘सी’ श्रेणी में डाल दिया!

डॉ मुकेश कुमार-

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी आईएमएफ ने पिछले तीन दिनों में मोदी सरकार को दूसरा झटका दिया है। पहला झटका तब दिया था जब उसने भारतीय मुद्रा को स्थिर से अस्थिर श्रेणी में डाल दिया था। अब उसने भारत के अर्थव्यवस्था संबंधी आँकड़ों की विश्वसनीयता को बी से गिराकर सी श्रेणी में डाल दिया है। यानी उसने आँकड़ों को पहले की तुलना में और भी कम भरोसे के लायक माना है । आईएमएफ का कहना है कि भारत सरकार द्वारा दिए गए आँकड़ों में विरोधाभास है और पारदर्शिता की भी कमी है।

उसके मुताबिक जीडीपी के आंकड़ों में बार-बार बड़े संशोधन (revisions) होते हैं।

पुराने आधार वर्ष (base year) का इस्तेमाल (2011-12)अभी भी कई जगह हो रहा है।

अनौपचारिक क्षेत्र (informal sector) के आंकड़े कमजोर हैं।

अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच आंकड़ों में विरोधाभास है।

समय पर आंकड़े जारी न होना यानि पारदर्शिता की कमी है ।

उसका ये आकलन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है क्योंकि अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसके आँकड़ों को कोई भी भरोसेमंद नहीं मानेगा। पहले ही उसके आँकड़ों की विश्वसनीयता संदिग्ध है। माना जाता है कि असल में जीडीपी 6.5 प्रतिशत नहीं उसकी आधी है। आईएमएफ के इस क़दम के बाद निवेश बहुत घट सकता है और घरेलू पूँजी का पलायन और तेज़ हो सकता है।


राकेश कायस्थ-

अब मैं मोदीजी के साथ हूँ! सच स्वीकार कर तो दिल हल्का हो जाता है। सत्य का प्रकाश मन का अंधकार हर लेता है। मन का अंधकार मिट चुका है, इसलिए अब मैं तन-मन-धन से मोदीजी के साथ हूं।

कारण बहुत स्पष्ट है। विकास की गाड़ी को मोदीजी इस रफ्तार से भगा रहे हैं कि कोई उसे पकड़ नहीं पाएगा। जरा सोचिये देश की 80 करोड़ जनता को मुफ्त में आटा चावल बांटने के बाद भी अगर देश 8.2 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़े तो यह कितना बड़ा चमत्कार हैं। जो गरीबों को देता है, उसे भगवान भी देता है। पहले बिहार के चुनाव नतीजों में दिया और विकास के आंकड़ों में दे रहा है।

आप ठीक सुन रहे हैं 8.2 प्रतिशत की विकास दर। नवीनतम आंकड़ों में महंगाई की दर घटते-घटते 0.25 प्रतिशत तक आ पहुंची है। मतलब इनफ्लेशन विकसित देशों वाला और जीडीपी ग्रोथ उस रेट से जिसने चीन को आर्थिक महाशक्ति बनाया। अगर आंकड़ों की यही रफ्तार रही तो विकसित भारत बनने के लिए 2047 का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा, ये काम 2027 तक ही हो जाएगा।

देश आगे बढ़ रहा है, इसलिए साजिशों का सिलसिला भी शुरू हो गया है। इसमें भारत की बहुत सी बड़ी कंपनियां शामिल हैं, जो अपनी बिक्री और मुनाफा जानबूझकर कम दिखा रही हैं। जिस तिमाही में जीडीपी ग्रोथ के नंबर छप्पर फाड़ रहे हैं और महंगाई की दर शर्मिंदा होकर पाताल में समाने को तैयार है, उसी तिमाही में देश की सबसे बड़ी साबुन, शैंपू और तेल बेचने यानी एफएमसीजी कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर की बिक्री एक प्रतिशत भी नहीं बढ़ी। मुनाफा भी स्थिर है।

देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक एचडीएफसी के लोन बांटने के आंकड़े में मुश्किल से चार प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यही हाल अर्थव्यस्था की नब्ज कहे जाने वाले स्टेट बैंक के नतीजों का है, जिसमें बहुत मामूली वृद्धि दिख रही है। ऐसे में कॉरपोरेट की दुनिया में खुसर-फुसर चल रहा है कि जब आंकड़ों में इतनी वृद्धि है और बड़ी कंपनियों की टांय-टांय फिस्स है तो माल बेच कौन रहा है और कमा कौन रहा है?

मैं इस निष्कर्ष तक पहुंच चुका हूं कि बड़ी साजिश के तहत मोदीजी को नीचा दिखाने के लिए आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की जा रही है। मैं सरकार से मांग करता हूं कि ऑडिटर बिठवा कर इन कंपनियों की बैलेंस शीट खुलवाई जाये, असली रिजल्ट निकाली जाये और जो असली फायदा हुआ है, वो डिविडेंड के तौर पर शेयर धारकों में बंटवाया जाये।

हद तो तब हो गई जब अडनिया ससुरा भी इस साजिश में शामिल हो गया। समूह की सबसे बड़ी कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज़ अपने कारोबार में 6 प्रतिशत की कमी दिखा रही है। बताइये भला देश की जीडीपी 8.2 प्रतिशत बढ़े और अडानी एंटरप्राइजेज़ की बिक्री कम हो जाये, इससे बड़ी साजिश और क्या हो सकती है।

रात-दिन मोदीजी के जयकारे लगवाने वाली बहुत सी घरेलू कंपनियों की बात छोड़ दीजिये आईएमएफ तक जोर-शोर से साजिश को अंजाम देने में जुटा है। मालूम है, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष उर्फ आईएमएफ ने क्या किया? भारत की रेटिंग B ग्रेट से घटाकर C ग्रेड कर दी। मतलब थर्ड डिवीजन। आईएमएफ की रेटिंग में D ग्रेड सबसे निचला पायदान है, उससे सिर्फ एक दर्जा उपर। क्या कह रहा है चोट्टा आईएमएफ जरा अंग्रेजी में पढ़िये—

What the IMF Said:

  • India’s data is published regularly, timely, and with adequate granularity, meeting international standards for frequency and detail.
  • However, there are methodological weaknesses that “somewhat hamper surveillance” (i.e., the IMF’s ability to monitor economic health). These include
  • Sizeable discrepancies between GDP estimates from the production approach (output-based) and expenditure approach (spending-based), suggesting gaps in coverage of the informal sector and expenditure data.
  • Lack of seasonally adjusted data and room for improvement in statistical techniques for quarterly compilations. (curtesy–GROK)

मतलब भारत से डेटा तो एकदम टाइम पर आता है लेकिन गिनती में मोदीजी ने जो मैथेड इस्तेमाल किये हैं, उसमें झोल है, जांचने-परखने और निगरानी करने में आईएमएफ के छक्के छूट रहे हैं। कुच्छो पल्ले नहीं पड़ रहा। इसलिए D से उपर वाला यानी C ग्रेड ही भारत के लिए बेहतर है।

अब तो मानेंगे ना कि पूरी दुनिया मोदीजी के खिलाफ है। लेकिन राकेश कायस्थ पूरी तरह मोदीजी के साथ है। 0.25 की महंगाई की दर के आधार पर आप सब लोगों का अगला इनक्रीमेंट मुश्किल से 1 परसेंट बनता है। कंपनियां मोदीजी का मान रखते हुए दो-तीन परसेंट तो दे ही देंगी।

मोदीजी गरीबों के दे रहे हैं, इसलिए भगवान उन्हें दे रहा हूं। मैं मांग करता हूं कि अगले बजट में आटा-चावल बांटो योजना के लिए धन जुटाने हेतु सभी करदाताओं पर कम से कम 2 प्रतिशत का सेस लगाया जाये। उम्मीद है, देशभक्त लोग इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में मेरा साथ देंगे।

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