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सुख-दुख

क्या भारत की जीडीपी माइनस में है और हमारी इकॉनमी लुट चुकी है?

कृष्णन अय्यर-

IMF ने भारतीय जीडीपी के डेटा को “C केटेगरी” और इन्फ्लेशन डेटा को “B केटेगरी” बताया है.. इस बात का सीधा मतलब है कि भारत ख़ुद की इकॉनमी पर दुनिया को झूठ बोल रहा है..इससे बड़ी फ़ज़ीहत और कुछ नहीं हो सकती है..

2016 की नोटबन्दी के बाद से हर बार मैं लिखता था कि मुझे जीडीपी और इन्फ्लेशन के डेटा फ़र्ज़ी लगते हैं.. मैं तो छोटा इंसान हूं..दुनिया भर के बड़े बड़े इकोनॉमिस्ट ने लिखा था और अब तक लिख रहे हैं कि भारत के डेटा समझ से बाहर हैं..4 लाख करोड़ तक के फ़र्ज़ीवाड़े को अख़बारों ने लिखा था..

7% की जीडीपी और लगभग 0% इन्फ्लेशन..मगर डॉलर 90 और 80 करोड़ भारतीयों को मुफ़्त राशन..ये बातें ही फ़र्ज़ीवाड़ा समझने के लिए काफ़ी है..

मैंने लिखा था कि फ़र्ज़ी डेटा का असर यह होगा कि भारत में विदेशी इन्वेस्टमेंट ख़त्म होगा..और देशी उद्योगपति ख़ुद का पैसा बाहर पार्क करेंगे..नौकरी और इंडस्ट्री तो भूल जाइए..

मेरी बातें लगभग सच साबित हुई है..मैंने सिर्फ़ कॉमन सेंस इस्तेमाल किया था..

अगर डॉ मनमोहन सिंह साहब के वक़्त के फॉर्मूले पर आज की जीडीपी निकाली जाए तो शायद जीडीपी माइनस में होगी और इन्फ्लेशन के लिए किसी फॉर्मूले की ज़रूरत नहीं है..इन्फ्लेशन आप ख़ुद समझ सकते हैं..वैसे रियल लाइफ इन्फ्लेशन 10% से भी ऊपर है.. भारत की इकॉनमी लुट चुकी है..इस वक़्त हम एक “ब्लैक होल” में रह रहे हैं..कोई भी एक्सपर्ट जीडीपी का पक्का हिसाब नहीं बता सकता है

इसे ऐसे भी समझिए कि भारत के ख़ज़ानों में कितना बचा है ये कोई नहीं बता सकता है..RBI के डेटा पर तो मुझे 1 पैसे का भी यक़ीन नहीं है..

2026 में IMF भारत के डेटा को “D केटेगरी” में डाल सकता है..मोदी बहुत जल्दबाज़ी में है और इंडस्ट्री में चारों ओर एक घुटन भरी ख़ामोशी है..

कुछ तो है जो मोदी और मीडिया के कंट्रोल में नहीं है..कुछ तो सामने आएगा.

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