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उत्तर प्रदेश

बाबा कीनाराम महोत्सव में लगा पत्रकारों का जमावड़ा

“बाबा कीनाराम अघोरपीठ”, रामशाला, रामगढ़, चन्दौली के तत्त्वाधान में  अघोर-परम्परा के आधुनिक स्वरुप के जनक माने कहे जाने वाले विश्व-विख्यात महान संत, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम का 3 दिवसीय 417 वां जन्म-समारोह, पूजा-पाठ, विचार-गोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम के ज़रिये, लाखों लोगों की मौज़ूदगी में, विशाल पैमाने पर मनाया गया !  बाबा कीनाराम जी के जन्मस्थान, रामगढ़, चन्दौली में 31 अगस्त से 2 सितंबर तक मनाये गये इस समारोह में, देश-दुनिया के, कई गणमान्य व्यक्तियों और नामी-कलाकारों ने हिस्सा लिया!

“बाबा कीनाराम अघोरपीठ”, रामशाला, रामगढ़, चन्दौली के तत्त्वाधान में  अघोर-परम्परा के आधुनिक स्वरुप के जनक माने कहे जाने वाले विश्व-विख्यात महान संत, अघोराचार्य महाराजश्री बाबा कीनाराम का 3 दिवसीय 417 वां जन्म-समारोह, पूजा-पाठ, विचार-गोष्ठी, सांस्कृतिक कार्यक्रम के ज़रिये, लाखों लोगों की मौज़ूदगी में, विशाल पैमाने पर मनाया गया !  बाबा कीनाराम जी के जन्मस्थान, रामगढ़, चन्दौली में 31 अगस्त से 2 सितंबर तक मनाये गये इस समारोह में, देश-दुनिया के, कई गणमान्य व्यक्तियों और नामी-कलाकारों ने हिस्सा लिया!

31 अगस्त को, “बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड” वाराणसी व “बाबा कीनाराम अघोरपीठ”, रामशाला, रामगढ़, चन्दौली के पीठाधीश्वर  अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम द्वारा आरती-पूजन के पश्चात 3 दिवसीय कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ ! तीनों दिन, सुंदर-काण्ड पाठ व भजन-गायन के बाद दोपहर पश्चात विचार-गोष्ठी व तदुपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रम चला ! इस महोत्सव के अंतिम दिन (2 सितंबर को) , पीठाधीश्वर अघोराचार्य बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के आशीर्वचन के बाद इस महोत्सव का समापन हुआ!

सभी देवी-देवताओं को नमन करते हुए अपने आशीर्वचन में बाबा ने कहा … “बंधुओं! जिस विषम-परिस्थितियों में यह देश चल रहा है, जिसमें बहुत तरह की बुराइयां-बहुत तरह की अच्छाइयां सब हैं ! इस बदलते परिप्रेक्ष्य में आप को भी अपने अन्दर बदलाव लाना होगा, तभी, अच्छे समाज, एक अच्छा-राष्ट्र, एक अच्छा गाँव बन सकता है ! अगर,आप, अपने अन्दर बदलाव नहीं लायेंगें, तो फिर, न आप का कुछ कल्याण होगा, न इस देश का होगा, न समाज का होगा ! सब बहती गंगा की तरह बह जायेंगें ! आप में मलिन संस्कार आ जायेंगे !  तो, बंधुओं ! इस घड़ी में, आपको, अपने अन्दर बदलाव लाके, एक अच्छे समाज-एक अच्छे राष्ट्र की परिकल्पना करनी ही होगी”!

“बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड” वाराणसी व “बाबा कीनाराम अघोरपीठ” रामशाला, रामगढ़, चन्दौली के पीठाधीश्वर के तौर पर उपस्थित आम जन-मानस को अपना आशीर्वाद व कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए सभी का आभार मानते हुए बाबा गौतम राम ने उम्मीद जतलाई….. ” आने वाले कुछ वर्षों में , इस पीठ के तहत, संकल्पित सुन्दर व्यवस्था के ज़रिये परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा और एक नयी चेतना का संचार होगा”!

इससे पहले “बाबा कीनाराम जी व अघोर परम्परा तथा इसका सामाजिक एवं आध्यात्मिक सरोक़ार” के विषय पर चली विचार-गोष्ठी में, तीनों दिन, देश के प्रख्यात विद्तजनों-गणमान्य नागरिकों ने बाबा कीनाराम की अदभुत-औलौकिक, आध्यात्मिक-सामाजिक चेतना का बखान किया ! साथ ही कई शोध-कर्ताओं ने अपने शोध के ज़रिये निचोड़ का ज़िक्र करते हुए ये ख़ुलासा किया,कि, वर्तमान पीठाधीश्वर अघोराचार्य महाराजश्री बाबा सिद्धार्थ गौतम राम के रूप में बाबा कीनाराम जी का स्वयं दुबारा आगमन हुआ है!

वाराणसी के जाने-माने अघोर-शोधकर्ता डा. गया सिंह ने कहा कि…. “बाबा कीनाराम जी का प्राकट्य कोई एक आध्यात्मिक घटना-मात्र नहीं, बल्कि,  बल्कि भगवान शिव का मानव-तन में आगमन था ! बाबा कीनाराम की आध्यात्मिक चेतना जितनी प्रबल थी , उससे कहीं ज़्यादा उनमें मानव-मात्र की सेवा का भाव था ! 1771 में, अपनी समाधि के वक़्त, बाबा कीनाराम जी ने बाल-रूप में पुनः “बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड” के 11वें पीठाधीश्वर के तौर पर आने की आकाशवाणी की थी ” ! गौरतलब है, कि , वर्तमान में, अघोर-परम्परा के  विश्व-विख्यात केन्द्र-बिन्दु (“बाबा कीनाराम स्थल, क्रीं-कुण्ड”) के मुखिया, 11वें (वर्तमान ) पीठाधीश्वर बाबा सिद्धार्थ गौतम राम , बाल-रूप (मात्र नौ वर्ष की अवस्था) में अघोर-परम्परा की सर्वोच्च गद्दी पर आसीन हुए ! “बिलासपुर (छत्तीसगढ़) हाई-कोर्ट” के जस्टिस माननीय श्री चन्द्र-भूषण वाजपेई ने अघोर परम्परा को आध्यात्मिक व्यवस्था की सर्वोच्च इकाई क़रार देते हुए आव्हान किया….. “आज हमें बाबा कीनाराम जी के आदर्शों पर चलने की ज़रुरत है और उनके पुनर्गामित शिव-स्वरुप बाबा सिद्धार्थ गौतम जी के मार्ग-निर्देशन में, समाज व राष्ट्र हेतु , यथासंभव अपना योगदान देने की आवश्यकता है ! आध्यात्म में मंत्र और सेवा का जाप ही प्रमुख है ” ! “राजस्थान-पत्रिका” के सम्पादक राजेश गहरवार ने अघोर-परम्परा को सेवा से सीधा जोड़ते हुए कहा, कि, “आध्यात्म और समाज एक दुसरे के पूरक हैं और इन्हें अलग कर नहीं देखा जा सकता” ! अघोर-परम्परा को आध्यात्म और समाज की एक शानदार विरासत बतलाते हुए श्री राजेश ने कहा “संत-महात्माओं के बताये रास्ते पर चल-सीख कर ही मानवता की सेवा की जा सकती है “!

देशबंधु न्यूज़पेपर (नई दिल्ली) के सम्पादक श्री जयशंकर गुप्ता ने कहा कि “ये देश अध्यात्म और सेवा का देश था, है और रहेगा ! ये देश आध्यात्म के नाम पर ठगी करने वालों का नहीं, बल्कि, सेवा और अदभुत आध्यात्मिक विभूति संजोये बाबा कीनाराम और बाबा सिद्धार्थ गौतम राम का है” ! गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय समाचार न्यूज़-चैनल “APN News” (नोएडा) के प्रबंध-सम्पादक श्री विनय राय ने बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी से आग्रह किया कि ” आप दुर्लभ संत-महात्मा की अगुवाई में ही राष्ट्र व समाज हित को गति दी जा सकती है” ! अपनी बात को आगे बढाते हुए विनय राय ने इस बात पर ख़ासा जोर दिया कि…” आज अघोर की आध्यात्मिक व मानवीय उपलब्धियों को विभिन्न संचार तंत्रों के ज़रिये प्रकाशित-प्रसारित करने की ज़रुरत है ” ! “आउटलुक” (नई-दिल्ली) पत्रिका के विशेष संवाददाता श्री कुमार पंकज ने अघोर परम्परा का उल्लेख करते हुए कहा कि …”ये परम्परा आध्यात्म की सर्वोच्च अवस्था है जिसका आध्यात्मिक सरोक़ार अगर शीर्ष पर है तो नैतिक व सामाजिक समाजिक कर्तव्य भी अनुकरणीय है” !”काशी-हिन्दू विश्व-विघालय” के वाइस-चांसलर गिरीश चन्द्र त्रिपाठी ने कथनी-करनी में समानता की बात पर बल देते हुए कहा, कि, ….” आज शहरों को गाँव में लाने की बजाय, गांवों के नैतिक मूल्यों को शहर में ले जाने की ज़रुरत है” ! गाँवों के नवयुवकों को ऊर्जा से भरपूर क़रार देते हुए श्री त्रिपाठी ने आव्हान किया….”गाँव के युवकों को अगर हम सही दिशा और शिक्षा दे सकें तो इसका लाभ पूरे देश को मिल सकता है “! 

चर्चा को आगे बढ़ाते हुए “दैनिक जागरण” (नई दिल्ली) के डिप्टी ब्यूरो चीफ़ श्री एस.पी.सिंह ने कहा कि “आज राष्ट्र व समाज में कई विसंगतियां-समस्याएँ है, जिसे सुलझाने में राजनीतिक-प्रशासनिक तंत्र काफ़ी हद तक असफल रहा है ! ऐसे में बाबा कीनाराम जी व बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी के आदर्शों-सिद्धांतों के पर चलने की ज़रुरत है”! दैनिक भास्कर व नई दुनिया सहित कई अखबारों के पूर्व सम्पादक मुंबई के जाने-माने वरिष्ठ पत्रकार श्री ओमप्रकाश सिंह  ने अघोर परम्परा की शानदार विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि आज बाबा सिद्धार्थ गौतम राम जी का रूप धर कर बाबा कीनाराम जी , स्वयं, अपनी मात्रभूमि रामगढ़ में पधारे हैं ! ये जन्म-महोत्सव न सिर्फ रामगढ़ के लिए अपितु पूरी मानव-जाति के लिए प्रेरणा-स्त्रोत बनेगा!

सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के वाइस-चांसलर श्री यदुनाथ दुबे ने बाबा कीनाराम व अघोर परम्परा पर प्रकाश डालते हुए बहुत गूढ़ जानकारी देते हुए कहा कि “बाबा कीनाराम जी की सिद्धांत और आदर्श आज लोगों के लिए प्रेरणा का काम कर सकते है, बशर्ते, लोग इस परम्परा के विशाल आध्यात्मिक तथा मानवीय पहलुओं को समझने की कोशिश करें! मानव-जाति के उत्थान में ये बहुत मददगार साबित होगा” ! गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त करते हुए “गुरू घासीदास विश्व-विघालय” (छत्तीसगढ़) के पूर्व-कुलपति व “योजना आयोग” के पूर्व-सदस्य डा. दीनानाथ तिवारी ने कहा कि “प्रकृति हो या समाज, आज सबके संरक्षण की ज़रुरत है! आज अपनी पुरानी थातियों को खंगालने से हमें बहुत कुछ हासिल हो सकता है!”

गोष्ठी में कई जाने-माने लोगों ने बाबा कीनाराम और अघोर परम्परा व वर्तमान में बाबा सिद्धार्थ गौतम राम की अगुवाई में समाज-राष्ट्र व सम्पूर्ण संसार में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद जतलाई! उधर कार्यक्रम में लाखों लोगों की मौज़ूदगी व संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत भारत के जाने-माने कलाकारों की उपस्थिति ने पुलिस-प्रशासन को बेहद चौकन्ना कर रखा था ! आयोजन समिति के अध्यक्ष अजित कुमार सिंह की अगुवाई और वरिष्ठ अधिकारियों की लगातार विज़िट से स्वयं-सेवक तथा पुलिस-कर्मी काफ़ी मुस्तैद दिखे ! हर जगह प्रशासन ने बेहतर तरीके से अपने काम को अंजाम दिया! कार्यक्रम का शानदार संचालन धनंजय सिंह, सूर्यनाथ सिंह और राजेन्द्र पाण्डेय ने किया!

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