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साहित्य

वरिष्ठ पत्रकार कृष्ण पांडेय की किताब ‘रावण रथि विरथ रघुवीरा’ उनके विचारों की जीवंत स्मृति है, देखें तस्वीरें

कृष्ण कुमार पांडेय जी की अर्धांगिनी

प्रवीण कुमार-

गुरु जी की इच्छा को आकार देने की एक छोटी सी कोशिश की है। मेरे जीवन को एक पत्रकार के तौर पर जिस करीने से उन्होंने गढ़ा, उसमें गुरु के साथ एक पिता का भी अहसास हमेशा महसूस किया।


अमरेंद्र किशोर-

अपने समय के यशस्वी पत्रकार और विचारशील संपादक, श्रद्धेय कृष्ण किशोर पांडेय जी द्वारा लिखे गए सामयिक लेखों का संकलन हाल ही में पुस्तक रूप में प्रकाशित हुआ है– रावण रथि विरथ रघुवीरा यह सिर्फ एक किताब नहीं, बल्कि उनके विचारों, संघर्षों और लेखनी की जीवंत स्मृति है।

इस अमूल्य पुस्तक की एक प्रति उनकी अर्धांगिनी, पूज्य माताजी को आदरपूर्वक समर्पित की गई। इस भावुक क्षण को और भी गरिमा प्रदान करते हुए पुस्तक के संपादक श्री प्रवीण कुमार ने माताजी को एक शॉल और पुष्पगुच्छ भी भेंट किए — जैसे मानो शब्दों ने नम आँखों से श्रद्धा का प्रणाम किया हो।

इस भावभीने अवसर पर पांडेय जी के दोनों सुपुत्र और सुपुत्री भी उपस्थित थे, जिनकी आँखों में गर्व के साथ-साथ उस अपार स्नेह और स्मृति की आभा झलक रही थी, जो किसी पिता की अमर विरासत के रूप में उनके दिलों में जीवित है।

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