सुरेश चिपलुनकर-
आपके पास भी लैपटॉप, स्मार्टफोन, स्मार्ट होम डिवाइस, और लिथियम बैटरी वाले इन्वर्टर, पेसमेकर, स्मार्ट TV, घर में रखा हुआ कम्प्यूटर जैसा बहुत कुछ सामान है… जो आपके घर में है… आपकी जेब में है… आपकी टेबल पर है… इसलिए इजरायल द्वारा पेजर उपकरण को हैक करके उसमें विस्फोट करने को लेकर अधिक खुश होने की जरूरत नहीं है… हम सभी हमेशा एक बम साथ में लिए घूम रहे हैं…
जिस दिन चीन, रूस या अमेरिका और इजरायल जैसी एकाध दो तकनीकी शक्तियां हैकिंग हमला करके निपटाने की सोच लेंगे,,, तो बचना इतना भी सरल नहीं होगा… किसी भी मुगालते में न रहें कि कोई महामानव हमें बचा लेगा… अथवा पेजर फटने से तो पश्चिमी देशों के M ही मरे हैं, हमें कभी कुछ नहीं होगा… (SC)
सनद रहे, अब युद्ध बड़े ही अनोखे तरीकों और आधुनिक तकनीक से लड़ा जाएगा, जो आपकी जमीन पर आकर नहीं, दूर से ही लड़ा जाएगा…
कुछ सोशल मीडिया पर पढ़ा कि चीन भारत में ऐसी हरकत कर ही नहीं सकता, क्योंकि भारत के 90% मोबाईल Made in India हैं… अब इस पर हँसू या रोऊँ.. कोई ये न सोचे कि चीन कभी भी भारत में ऐसा नहीं कर सकता… क्योंकि भारत के अधिकांश मोबाईल Made in India हैं… ऐसे मुगालताग्रस्त लोगों को अरबों रूपए देकर हर साल चीन से आयात किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों एवं माइक्रो चिप्स तथा अन्य हार्डवेयर की जानकारी पढनी चाहिए…
साथ ही उन्हें यह भी पढना चाहिए कि Huawei नाम की कम्पनी कितनी विशाल दैत्य है और भारत के सरकारी संस्थानों में इस कम्पनी की कितनी घुसपैठ है…
सौमित्र रॉय-
यह वही पेजर है, जो लेबनान में फटा। ताइवान की कंपनी के बनाए इस पेजर में 2 आउंस बेहद खतरनाक PATN विस्फोटक बैटरी के ठीक बगल में रखा था, साथ में ट्रिगर भी।


ये पेजर हिजबुल्ला ने 5 महीने पहले ऑर्डर किए थे। ताइवान में तमाम आईटी कंपनियां अमेरिका संचालित करता है।
लेबनान के समय पर कल दोपहर 3.30 बजे पेजर्स पर एक मैसेज आया। लोगों ने समझा कि यह हेजबुल्ला के सेंट्रल कमांड से आया है।
लेकिन यह एक ड्रोन हैक था। फटने से पहले पेजर्स में बार–बार बीप सुनाई पड़ा और PATN विस्फोटक ने जिस्म के चीथड़े उड़ा दिए।
भारत के लिए क्या सबक है?
- इजरायल, अमेरिका और यूरोप से आया हर सामान सुरक्षित है–यह मानना एक भ्रम है।
- दो देशों की जंग अब ऐसे हमलों पर आ चुकी है, एक इलाके में इंसानों को सीधे निशाना बनाया जा सकता है।
- इसके साथ ही साइबर हैकिंग और हमले का भी खतरा है, क्योंकि पश्चिमी दुनिया कोडिंग, नैनो टेक्नोलॉजी और कंप्यूटर क्षमता के मामले में हमसे 25 साल आगे है।
लेकिन, भारत के पास इसका क्या जवाब है?
5 किलो फोकट के अनाज के अलावा बाबाओं के चरण पकड़ना। गोबर में से गेहूं बीनना और मोदी पर यकीन रखना कि वे एस्टेरॉयड की तरह मिसाइलों को रोक देंगे।
फटेगा तो संभलेगा इंडिया। तब तक खेलें डांडिया।


