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मध्य प्रदेश

मप्र की खबरों का वीकली रोजनामचा- देह में नर्मदा, मूंग में ज़हर, सियासत में शायरी और बेवफ़ा सोनम!

भोपाल में पुलिस ने एक अनोखा गिरोह पकड़ा, जो ‘ठेके पर चोरी’ करता था। मास्टरमाइंड इंजीनियर अभिलाष विश्वकर्मा, जिसने मुथूट फाइनेंस से सोना गिरवी रख कर 1.5 करोड़ का गबन किया। और फिर बैंकाक-थाइलैंड में मस्ती की…

हरीश मिश्र-

मई के आखिरी सप्ताह और जून की पहली दस्तक के साथ मध्यप्रदेश में मौसम ही नहीं, माहौल भी तपने लगा। इस दौरान प्रदेश ने एक संत की देह में नर्मदा की जलधारा देखी, लाखों बकरों की कुर्बानी देखी, एक खानदानी देह को सरेंडर का बयान देते और सोनम की बेवफ़ाई देखी! मेहंदी लगे हाथों से मांग का सिंदूर मिटाते, गाजीपुर में सरेंडर करते देखा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आए, सिंदूर पर शायरी कर गए। राहुल गांधी आए, “नरेंद्र का सरेंडर” वाली ग़ज़ल सुनाकर लौट गए। लोकतंत्र की छांव में दोनों ने सियासत की आहें छोड़ीं और किसानों की छाती पर मूंग दलते हुए निकल लिए।

संत के शरीर में नर्मदा बहती है! बात चौंकाने वाली है—पर है आधिकारिक!

1350 दिन से निराहार व्रत पर बैठे संत दादा गुरु की नसों में मां नर्मदा का प्रवाह वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया। एम्स और मेडिकल कॉलेजों की रिपोर्ट, कैबिनेट की मुहर और वैज्ञानिकों की श्रद्धा—सबने अध्यात्म के सामने सिर झुका दिए। अब ध्यान, उपवास और नदी—all in one body! विज्ञान असहज है, अध्यात्म अभिभूत!

‘नरेंद्र का सरेंडर’ और सियासी शोर

राहुल गांधी के बयान पर राजनीति गरमा गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले—“इसीलिए तो पप्पू कहते हैं।” तो कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पलटवार किया— “11 साल से ‘मुक़द्दर का सिकंदर’ चल रही थी, अब ‘नरेंद्र का सरेंडर’ रिलीज़ हो गई है।” इस जुबानी जंग के बीच किसान कहीं गुम है—परेशान और उपेक्षित!

मूंग में ज़हर या व्यवस्था में?

सरकार ने एलान किया कि मूंग की MSP पर खरीद नहीं होगी, क्योंकि इसमें “मानव शरीर के लिए अनुपयुक्त” पेस्टीसाइड मिला है। पर सवाल बड़ा है—अगर मूंग ज़हरीली है तो खुले बाजार में क्यों बिक रही है? और अगर MSP पर नहीं खरीद सकते, तो MLA कैसे खरीद लेते हैं?

‘ठेके पर चोरी’—सिस्टम के साथ सिस्टम से!

भोपाल में पुलिस ने एक अनोखा गिरोह पकड़ा, जो ‘ठेके पर चोरी’ करता था। मास्टरमाइंड—इंजीनियर अभिलाष विश्वकर्मा, जिसने मुथूट फाइनेंस से सोना गिरवी रख कर 1.5 करोड़ का गबन किया। और फिर बैंकाक-थाइलैंड में मस्ती की। जब सरकार सबकुछ ठेके पर दे सकती है—तो चोर क्यों नहीं?

अब ‘वेलनेस’ पर सरकार की नज़र

आईटी और उद्योग के बाद सरकार ने अब मेडिकल और वेलनेस टूरिज़्म को प्राथमिकता दी है। उज्जैन को “वेलनेस का वाराणसी” बनाने की तैयारी है। 2000 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले हैं।

कहना न होगा—जब अस्पताल ठेके पर हैं, तो ‘वेलनेस’ ही शायद मानसिक संतुलन का टॉनिक बने!

इमेज घोटाला और अदालत की नज़र

जनसंपर्क विभाग के 3200 करोड़ के इमेज घोटाले की जांच अब हाईकोर्ट के रडार पर है। पूछा जाएगा—सरकार की छवि चमकी या जेबें?

संस्कारधानी या ‘कुटाई केंद्र’?

कैलाश विजयवर्गीय बोले—”छोटे कपड़ों में लड़कियां अच्छी नहीं लगतीं” और उन्हीं की पार्टी में कुछ सदस्य ‘छोटी सोच’ के उदाहरण बन गए। जबलपुर में एक भाजपा नेता ने होटल को ही ‘कुटाई केंद्र’ में बदल दिया।

पत्रकार की पिटाई और सुप्रीम कोर्ट की फटकार

  • भिंड में पत्रकार की पिटाई पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया है।
  • सरकार से पूछा गया है—”चौथे स्तंभ को डंडा क्यों?”

जनहानि और घटनाएं

  • झाबुआ-रतलाम मार्ग पर ट्राले की टक्कर से एक ही परिवार के 9 लोग मरे, 2 घायल।
  • मधुमक्खियों के हमले में पुलिस इंस्पेक्टर रमेश धुर्वे की मौत।
  • सोनम अभी भी मेघालय की वादियों में लापता।
  • ट्राले और मधुमक्खी—दोनों ही इस प्रदेश में जानलेवा हैं!

लेखक हरीश मिश्र स्वतंत्र पत्रकार हैं, संपर्क- 958481578

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