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मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश की खबरों का साप्ताहिक रोजनामचा- जब नशा उतरा, तब सच उभरा..

मन से सुनी मन की बात…

मंदसौर हाईवे पर भाजपा नेता की ‘चमड़ा कुटाई’ जैसी शर्मनाक घटना ने लोकतंत्र को कलंकित किया। भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा ने कांग्रेसियों को “कुत्ता, सांप, कुकुरमुत्ता” कहकर मर्यादा की सीमा लांघ दी।

अब आलाकमान ने निर्देश जारी किया है— “कम बोलें, बस ‘जय हिंद’ बोलें…”


हरीश मिश्र-

मैं उस साप्ताहिक कालचक्र का मूक गवाह हूं, जिसमें हर घटना मैंने अपनी आंखों से देखी है। इस रोजनामचा में सिर्फ घटनाएं नहीं, बल्कि उनके भीतर धड़कती नब्ज़ दर्ज है—जहां शब्दों से अधिक अर्थ बोलते हैं और शोर से पहले साज़िश सुनाई देती है।

बीते हफ्ते की घटनाएं बताती हैं कि नशा कई प्रकार का होता है—

मंत्री पद का, सत्ता का, शराब का, चमड़ा कुटाई का, जिहाद के नाम पर फैलाई गई नफरत का, लुटेरी दुल्हन के छल का, हाथियों के आतंक का, सर्पदंश का और भ्रष्टाचार का।

नशा जब चढ़ता है, तो इंसान की आंखों पर पर्दा पड़ जाता है। लेकिन हर नशा उतरता भी है। बीते सप्ताह मध्यप्रदेश में कई नशेबाज़ों का नशा उतरता देखा गया।

इस सप्ताह प्रदेश ने सत्ता के नशे में डूबी राजनीति और जनता से कटे शासकों के तमाशे देखे। कहीं राजनीतिक बयानबाज़ी में ज़हर घुला, तो कहीं कर्ज़ में डूबी सरकार ने राजसी ठाट-बाट का प्रदर्शन किया। लेकिन समय की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह हर किसी का लेखा-जोखा रखता है।

आइए, मैं बताता हूं—मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट की और मन की बात को दिल से सुना। वहीं दूसरी ओर, हम एक उत्सवधर्मी समाज हैं—कंगाल होकर भी कर्ज़ लेकर त्योहार मनाते हैं। यह हमारी आदत बन चुकी है। सरकार ने देवी अहिल्याबाई होलकर की नगरी में राजसी उत्सव आयोजित कर यह सिद्ध कर दिया कि हम कर्ज में भी मुस्कुरा सकते हैं।

वर्तमान में मोहन सरकार पर 4.21 लाख करोड़ रुपए का कर्ज़ है, लेकिन उसी सरकार ने निर्णय लिया कि प्रदेश में 3867 करोड़ रुपए के जनकल्याणकारी कार्य होंगे।

2195 करोड़ की लागत से अद्वैत संग्रहालय (लोक) बनाया जाएगा।

‘राहवीर योजना’ के तहत अब सड़क दुर्घटना में घायल की जान बचाने वाले को 25,000 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाएगी (पहले यह राशि 5,000 थी)।

मंत्रिपरिषद की भव्य बैठक में मंत्री विजय शाह अनुपस्थित रहे। बाकी मंत्रियों ने शाही भोज के तहत ‘छप्पन भोग’ का आनंद लिया। परंतु सरकार को यह बात समझनी होगी कि दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं मिटता, बल्कि दिए का अस्तित्व समाप्त हो जाता है। यदि वाकई कर्ज से उबरना है, तो प्रदेश की प्राकृतिक संपदा का सतत उपयोग और युवाओं को रोजगार देना ही सही उत्सव होगा।

मंत्री परिषद की राजसी बैठक

राजनीति जब नग्न होती है तो उसका असली चेहरा सामने आता है। मंदसौर हाईवे पर भाजपा नेता की ‘चमड़ा कुटाई’ जैसी शर्मनाक घटना ने लोकतंत्र को कलंकित किया।

भाजपा विधायक अंबरीश शर्मा ने कांग्रेसियों को “कुत्ता, सांप, कुकुरमुत्ता” कहकर मर्यादा की सीमा लांघ दी। वे भूल गए कि कमलनाथ सरकार जब संकट में थी, तब भी इन्हीं कांग्रेसियों की भूमिका निर्णायक थी। भाजपा ने जब तक गुणवत्ता को महत्व दिया, संगठन मजबूत रहा। लेकिन संख्या बल की राजनीति ने संगठन को खोखला कर दिया है।

अब आलाकमान ने निर्देश जारी किया है—“कम बोलें, बस ‘जय हिंद’ बोलें।”

इंदौर में ‘मोहसिन’ नामक व्यक्ति द्वारा लव जिहाद की फैक्ट्री चलाए जाने का मामला सामने आया।
‘मोहसिन’ का अर्थ भले ही “परोपकारी” हो, लेकिन उसने समाज और ईमानदारी दोनों को शर्मसार किया। अब समय आ गया है कि मुख्यमंत्री मोहन, बंगले से निकलकर मोहसिन जैसे असामाजिक तत्वों की नसबंदी और आर्थिक नाकेबंदी की कठोर कार्यवाही करें। यदि ऐसा नहीं हुआ तो समाज में नैतिकता का ढांचा चरमरा जाएगा।

इस सप्ताह हेराफेरी का नया चेहरा सामने आया—

  • राजस्थान पुलिस ने भोपाल से लुटेरी दुल्हन को गिरफ्तार किया, जो सात महीने में 175 फेरे लेकर लोगों को ठगती रही।
  • शहडोल में जंगली हाथियों ने तीन लोगों को कुचल डाला।
  • सिवनी में सर्पदंश से एक ही व्यक्ति को फाइलों में 30 बार मरवा दिया गया और अधिकारियों ने 11 करोड़ 26 लाख रुपये हजम कर लिए।

यह स्पष्ट करता है कि आज धन का गलत मोह एक बुराई बन चुका है—अधिकारी और कर्मचारी अब चौकीदारों की छत्रछाया में तांत्रिकों की तरह धन वसूली में माहिर हो गए हैं।

लेकिन… हर नशा उतरता है—

  • जब अदालतें जागती हैं,
  • जब समाज सवाल करता है,
  • जब कैमरे सच्चाई को कैद करते हैं,
  • और जब एक पत्रकार अपनी कलम को हथियार बना लेता है।

नशे में डूबे जो थे, तख़्तो-ताज के साथ,
उतर गया जब नशा, तो हकीकत आई हाथ।

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं, संपर्क: 9584815781

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