
दयानंद पांडेय-
हमारे एक चचेरे बड़े भाई हैं। उन दिनों हम दोनों ही दिल्ली में रहते थे। अस्सी के दशक की शुरुआत थी। उन का विवाह तय हुआ तो मारे ख़ुशी के उन्हों ने यह सूचना मुझे दी। हम ने कहा कि होने वाली भाभी की फ़ोटो तो देख लेते कम से कम और हमें भी दिखा देते। उन्हों ने बड़ी हिम्मत कर के गोरखपुर घर में चिट्ठी लिख कर फ़ोटो के बारे में कहा। चिट्ठी में ही उन्हें जवाब मिला और बताया गया कि फ़ोटो, शादी के बाद मिल जाएगी।
यह सूचना भी उन्हों ने मुझे बहुत ख़ुश हो कर दी। तब हम ने उन्हें बताया कि इस का मतलब है कि गौना होगा। गौना सुन कर वह उदास हो गए। विवाह के बाद फ़ोटो मिली। साल भर बाद गौना हुआ।
दिल्ली में भी लगभग यही हो गया है। दिल्ली प्रदेश के मुख्य मंत्री पद के शपथ ग्रहण का कार्यक्रम, आज दिन में इस का कार्ड पहले वितरित हो गया। सार्वजनिक हो गया। सरकार बनाने का दावा कार्ड बंट जाने के बाद आज देर शाम पेश किया गया है। ग़जबेस्ट पार्टी है भारतीय जनता पार्टी भी।
लखनऊ के एक पत्रकार मित्र के बेटे का विवाह हुआ। दिव्य व्यवस्था थी। विवाह समारोह में बहू पेट से दिखी। जयमाल आदि के समय तो कोई कुछ नहीं बोला। पर बाद में रसरंजन के समय सब के लब खुलने लगे। अचानक वह पत्रकार मित्र रसरंजन सभा में आ गए। सब की बात सुन ली थी। हंसते हुए बोले, घबराने की कोई बात नहीं है। सब कुछ ठीक है। बस विवाह करने में हम से थोड़ी देरी हो गई है। विवाह के लिए बच्चा थोड़े रुका रहेगा। सब कुछ अपने बेटे का ही है। तुम लोग इंज्वाय करो!
हुआ यह था कि बेटा जिस लड़की से विवाह करना चाहता था, पत्रकार मित्र सहमत नहीं थे। बाद में विवश हो कर सहमत होना पड़ा। क्यों कि बेटे, बहू ने सरप्राइज दे दिया था। राजनीति में भी मोदी का खेल इसी तरह कुछ ज़्यादा सरप्राइजिंग हो गया है।
इतना सरप्राइजिंग होना भी गुड बात नहीं है, मोदी जी! इस तरह फेंट-फांट कर ताश की गड्डी बना दिया है, सूबे के सूबेदारों को। सर्वशक्तिमान होने का यह प्रतिमान कुछ ज़्यादा ऊंचा हो गया है। बचिए इस से। इस सर्वशक्तिमान होने की प्रवंचना से।



