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बिहार

पटना में जी न्यूज़ के पत्रकार प्रशांत झा से भीड़ ने लप्पड़-थप्पड़ किया, देखें वीडियो

देशभर में पत्रकारों के साथ भीड़ द्वारा मारपीट और नफरत का इजहार करते वीडियो सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं। मेनस्ट्रीम मीडिया ने अपनी ये हालत खुद बनाई है। चैनलों के मालिकों और संपादक एंकरों ने जो सरकारी चरणवंदना का जो मुनाफा कमाया है उसकी भरपाई फील्ड पर उनके रिपोर्टरों को करना पड़ रही है। नीचे वीडियो देखें…


पुष्य मित्र-

हाल के वर्षों में देश में दो तरह के प्रदर्शन देखे हैं। पहला किसान आंदोलन और कमोबेश उसी तर्ज पर हुआ CAA-NRC के खिलाफ आंदोलन। दोनों आंदोलन अहिंसक थे और दोनों सफल रहे।

मगर इस बीच अग्निवीर योजना के खिलाफ भी एक आंदोलन हुआ, जिसमें ट्रेनें जलाई गईं और भीषण हिंसा हुआ। एक तरह का अराजक आंदोलन था। बुरी तरह विफल साबित हुआ।

लोग कहते हैं, मौजूदा सरकार में अहिंसक आंदोलन सफल नहीं होते, मगर हमारे सामने तो दो-दो उदाहरण हैं।

इसलिए अगर आंदोलन को सफल करना है तो आंदोलनकारियों को अहिंसक और अनुशासित होना होगा। वे जरा भी अराजक हुए, देश की सहानुभूति खो देंगे।

ऐसा इसलिए लिख रहा हूं कि कल तक जो लोग इस आंदोलन के साथ सहानुभूति दिखा रहे थे उनमें से कई आज पटना के आंदोलन के बाद उदास हैं। नाराज हैं। उनमें कई मीडिया के साथी हैं, जो किसी भी सूरत में एजेंडा पत्रकारिता नहीं करते। ऐसे पत्रकार साथियों को भी आज हूट किया गया। बुरा व्यवहार किया गया।

सिर्फ जी न्यूज या एबीपी के पत्रकारों के साथ बुरा बर्ताव नहीं हुआ, जिसके भी हाथ में माइक था प्रदर्शनकारी उसके साथ गाली गलौच कर रहे थे। उन्हें बिका हुआ बता रहे थे, उसके कवरेज के दौरान उसे परेशान कर रहे थे। इनमें कई महिला पत्रकार भी थी।

इन पत्रकारों ने साफ कहा कि ऐसे में हम कैसे काम करेंगे..

अब प्रदर्शनकारियों को तय करना है कि वे अहिंसक और अनुशासित रहेंगे या इसी तरह अराजक रहेंगे। ज्यादातर पत्रकारों और आमलोगों की सहानुभूति अब तक इस आंदोलन के साथ है। अगर उन्हें अपना दायरा बढ़ाना है तो विनम्र होना पड़ेगा। नहीं तो अराजकता चुन सकते हैं। यह आपका चयन होगा।


बिहार के वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत झा जी न्यूज से जुड़े हैं प्रिंट मीडिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बिहार के बड़े चेहरे हैं पटना के सड़कों पर प्रशांत झा के साथ बुधवार को जो हुआ वह आप देखिए छात्रों के आंदोलन से हर वह आम आदमी जुड़ा हुआ है जिसे लगता है कि पेपर लीक जैसी चीज नहीं होनी चाहिए पर छात्रों के आंदोलन की आड़ में पत्रकारों को निशाना बनाने वाले कौन लोग हैं।
-अनूप नारायण सिंह

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