नई दिल्ली। फिल्मों में मादक पदार्थों या साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस के सेवन, इस्तेमाल या तस्करी से जुड़े दृश्य दिखाने पर अब निर्धारित एंटी-ड्रग चेतावनी देना अनिवार्य होगा। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के तहत लागू फिल्म सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस में बदलाव किया है।
मंत्रालय ने 16 सितंबर को सिनेमैटोग्राफ एक्ट के तहत संशोधित फिल्म सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस जारी की हैं। इन नियमों के तहत CBFC को फिल्मों की सार्वजनिक स्क्रीनिंग के लिए प्रमाणन देते समय नए प्रावधानों का पालन करना होगा।
संशोधित नियमों के मुताबिक, नशीले पदार्थों से जुड़े संबंधित दृश्यों के साथ यह चेतावनी दिखानी होगी।
“Illicit Narcotics Destroy Health and Guarantees Imprisonment. Say No to Drugs.”
यानी, “अवैध नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को नष्ट करते हैं और जेल की सजा सुनिश्चित करते हैं। ड्रग्स को ना कहें।”
हालांकि फिल्मों में ड्रग्स से संबंधित सामग्री पहले से ही CBFC के दिशा-निर्देशों के दायरे में थी। पुराने नियमों में ऐसे दृश्यों को रोकने का प्रावधान था, जो नशीली दवाओं की लत को बढ़ावा देते हों, उसे सही ठहराते हों या उसका महिमामंडन करते हों। लेकिन इनमें किसी खास और अनिवार्य ऑन-स्क्रीन चेतावनी का उल्लेख नहीं था।
नए बदलाव के बाद नशीले पदार्थों से जुड़े ऐसे दृश्य वाली फिल्मों को CBFC सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित चेतावनी के प्रावधान का पालन करना होगा।
फिल्म सर्टिफिकेशन के व्यापक दिशा-निर्देशों में हिंसा जैसी असामाजिक गतिविधियों के महिमामंडन या उन्हें सही ठहराने पर भी रोक है। इसके अलावा आपराधिक गतिविधियों, क्रूरता और अन्य कंटेंट से जुड़े प्रावधान भी CBFC के मूल्यांकन का हिस्सा हैं।
मंत्रालय ने हाल के महीनों में स्क्रीन पर नशीली दवाओं से संबंधित चेतावनी को लेकर इसी तरह के कदम OTT प्लेटफॉर्म और निजी सैटेलाइट टीवी चैनलों के लिए भी उठाए हैं। अगस्त में OTT प्लेटफॉर्म को नशीले पदार्थों के सेवन या इस्तेमाल वाले दृश्यों के दौरान प्रमुखता से यही चेतावनी दिखाने को कहा गया था।
फिल्म सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस में इससे पहले भी बदलाव किए गए हैं। मई 2025 में सरकार ने सर्टिफिकेशन व्यवस्था में उम्र के आधार पर U/A 7+, U/A 13+ और U/A 16+ कैटेगरी को शामिल किया था।


