Connect with us

Hi, what are you looking for?

सुख-दुख

हजारों खबरें लिखने वाला ‘राजनीतिक संवाददाता’ गुमनामी की मौत मर गया, आखिरी समय परिवार का कोई अपना भी नहीं आया!

Worn Hindi ID card with a portrait on the right, a circular emblem in the center, and Hindi text details.

अमन कबीर-

जिस पत्रकार ने न जाने कितने लोगों की कहानियाँ लिखीं… आज उनकी आखिरी कहानी लिखने वाला कोई अपना नहीं था।

आज सुबह अमन यादव जी, शीरगोवर्धन का फोन आया। उन्होंने कहा— “भैया, एक व्यक्ति का निधन हो गया है। परिवार का कोई नहीं है, आप मदद कर दीजिए।”

हम मौके पर पहुँचे तो पता चला कि मृतक विजय शंकर यादव जी थे। वे लंबे समय तक पत्रकारिता से जुड़े रहे और लगभग दो वर्षों से सेवानिवृत्त होकर शीरगोवर्धन स्थित एक मकान में रह रहे थे।

Indian government ID card showing a portrait photo, name Vijayshankar, DOB 08/06/1966, male, with a QR code and card number 8708 0538 9693; has ₹ emblem and text in Hindi/English at top.

उनके पास एक आधार कार्ड और एक पत्रकार पहचान-पत्र मिला, जिस पर “राजनीतिक संवाददाता” लिखा था। आधार कार्ड में पता संस्कृत विश्वविद्यालय, संपूर्णानंद, C-27/65, जगतगंज दर्ज था, लेकिन वह मकान अब बिक चुका है।

परिवार से संपर्क करने का प्रयास किया गया। उनकी पत्नी से भी लोगों ने बात की, जिन्होंने बताया कि उनका तलाक हो चुका है। अन्य रिश्तेदारों से भी संपर्क किया गया, लेकिन दुख की बात है कि उनके अंतिम समय में कोई अपना उनके पास नहीं आया।

पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई।

सोचिए… जो व्यक्ति अपनी कलम से न जाने कितने लोगों की आवाज बना होगा, कितनी खबरें लिखी होंगी, कितनी कहानियाँ दुनिया तक पहुँचाई होंगी… आज उसी पत्रकार की अपनी आखिरी कहानी में कोई अपना किरदार निभाने नहीं आया।

काशी की धरती पर फिर एक बार हमें यही समझ आया कि रिश्ते केवल खून से नहीं होते, इंसानियत से भी होते हैं।

Two men walk down a narrow street in India, carrying a large load on a pole while a goat leads the way ahead of them.
Four men stand among charred logs and rubble outside a smoke-filled, damaged building.

अंततः अमन कबीर सेवा न्यास ने उन्हें अपना मानकर, उनके बेटे और भाई का धर्म निभाते हुए हरिश्चंद्र घाट पर हिंदू रीति-रिवाज एवं विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार और मुखाग्नि दी।

उस समय मन में सिर्फ एक ही बात थी— “जब अपने नहीं आए, तो हम उनके अपने बनकर खड़े रहेंगे।”

आज विजय शंकर यादव जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी अंतिम यात्रा में कुछ ऐसे लोग जरूर खड़े रहे, जिनका उनसे खून का रिश्ता नहीं था…

फिर भी उन्होंने उन्हें बेगाना नहीं, अपना समझा।

उन सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद, जिन्होंने उनके अंतिम समय में इंसानियत का साथ दिया और एक अनजान व्यक्ति को सम्मान के साथ अंतिम विदाई देने के लिए आगे आए।

ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें। ॐ शांति।

अमन कबीर सेवा न्यास “जब अपने नहीं आते, तब हम अपने बनकर खड़े होते हैं।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन