कलकत्ता हाई कोर्ट ने रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के सीनियर एग्जिक्यूटिव एडिटर और एडिटर-इन-चीफ अभिषेक कपूर तथा रिपब्लिक बांग्ला के पत्रकार बिट्टू चौधरी के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही खारिज कर दी है। मामला गायक और गीतकार कबीर सुमन से हुई एक फोन बातचीत से जुड़ा था।
न्यायमूर्ति उदय कुमार की पीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने आरोपियों को समन जारी करने से पहले सीआरपीसी की धारा 202 के तहत जरूरी जांच नहीं की। दोनों आरोपी मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहते थे, इसलिए यह जांच अनिवार्य थी।
कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने धारा 202 की प्रक्रिया का पालन किए बिना जिस तरह मामले को आगे बढ़ाया, वह कानून के उद्देश्य के खिलाफ है। अदालत ने माना कि शिकायत मामले संख्या 1286/2022 को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग और न्याय के साथ अन्याय होगा।
यह मामला 27 जनवरी 2022 की एक फोन कॉल से जुड़ा था। रिपब्लिक बांग्ला के रिपोर्टर बिट्टू चौधरी ने दिवंगत गायिका संध्या मुखर्जी से जुड़ी एक खबर पर प्रतिक्रिया लेने के लिए कबीर सुमन को फोन किया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान कबीर सुमन ने गुस्से में अपशब्दों का इस्तेमाल किया। बाद में उन्होंने फेसबुक पर माफी भी प्रकाशित की थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बिट्टू चौधरी ने बातचीत रिकॉर्ड कर उसे प्रसारित किया। अभिषेक कपूर को भी मामले में आरोपी बनाया गया था। हालांकि, रिकॉर्ड में यह बात स्वीकार की गई कि रिपब्लिक बांग्ला या रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के किसी चैनल पर उस बातचीत या उसकी रिकॉर्डिंग का प्रसारण नहीं हुआ था।
याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 के तहत मानहानि के अपराध के जरूरी तत्व इस मामले में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति द्वारा खुद कही गई बात को रिकॉर्ड करना या उसे सही रूप में दोहराना अपने आप में मानहानि नहीं बनता।
हाई कोर्ट ने मजिस्ट्रेट के समन आदेश में भी गंभीर प्रक्रियात्मक खामियां पाईं। अदालत के मुताबिक, आदेश में आरोपियों की व्यक्तिगत भूमिका और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर पर्याप्त न्यायिक विचार नहीं किया गया था।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ (2016) के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जब आरोपी मजिस्ट्रेट के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर रहता है तो धारा 202 के तहत समन जारी करने से पहले जांच करना या जांच का निर्देश देना जरूरी है।
इन आधारों पर हाई कोर्ट ने दोनों पुनरीक्षण याचिकाएं मंजूर करते हुए अभिषेक कपूर और बिट्टू चौधरी के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को खारिज कर दिया।


