नई दिल्ली। दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में शुक्रवार, 18 सितंबर को छह महिला पत्रकारों ने अपने खिलाफ कथित हमलों, धमकियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर आवाज उठाई। कार्यक्रम का आयोजन प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (DUJ) और नेटवर्क ऑफ वुमन इन मीडिया की ओर से किया गया था। DUJ ने महिला पत्रकारों के साथ एकजुटता जताते हुए उनके संघर्ष को समर्थन दिया।
कार्यक्रम में पत्रकार पूजा माथुर ने उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 6 सितंबर को एक मस्जिद के कथित बुलडोजर विध्वंस की रिपोर्टिंग के बाद खुद को निशाना बनाए जाने की बात कही। माथुर के मुताबिक, उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल Red Chili Live पर सबसे पहले मस्जिद गिराए जाने की खबर दी थी। उन्होंने मस्जिद के इमाम से बातचीत की और मलबे का वीडियो बनाया। इसके बाद उन्हें वीडियो हटाने के लिए संदेश भेजे गए और इनकार करने पर धमकियां मिलीं। उन्होंने बताया कि उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
माथुर ने कहा कि वह अपना काम कर रही थीं और इससे डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूट्यूब पर काम करने वाले पत्रकारों को केवल ‘यूट्यूबर’ कहकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, स्वतंत्र डिजिटल पत्रकार गंभीरता से रिपोर्टिंग करते हैं और खबर प्रकाशित करने से पहले शोध करते हैं।
पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 12 सितंबर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछने के बाद कथित तौर पर ट्रोलिंग और धमकियां मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने सवाल नहीं लिए थे और जब उन्होंने उनसे अपना सवाल सुनने की अपील की तो वह वहां से चले गए। दिव्या के मुताबिक, इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें गालियां और धमकियां दी गईं तथा उन पर विपक्षी राजनीतिक दल के इशारे पर सवाल पूछने का आरोप लगाया गया।
उन्होंने कहा कि पत्रकारिता कोई अपराध नहीं है और उन्हें छिपने की जरूरत नहीं है। दिव्या ने यह भी दावा किया कि इस विवाद के बाद उनके चैनल में उनकी नौकरी को लेकर असुरक्षा पैदा हो गई है।
दिल्ली की स्वतंत्र पत्रकार बिंदु रोमि गुर्जर और मोनिका सिंह ने मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी बच्चों की मौतों की रिपोर्टिंग के दौरान सामने आई परिस्थितियों को साझा किया। दोनों अगस्त 2026 में कई बच्चों की मौत की खबर मिलने के बाद बालाघाट पहुंची थीं और उन्होंने बच्चों के परिजनों से बातचीत की।
गुर्जर ने बताया कि इलाके में करीब 25 गांवों के लिए एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है और नजदीकी अस्पताल करीब 130 किलोमीटर दूर है। उनके मुताबिक, एंबुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने दावा किया कि बच्चों की मौत मलेरिया से हुई, जो इलाज योग्य बीमारी है।
मोनिका सिंह ने सरकारी अस्पताल की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि एक-एक बिस्तर पर तीन से चार बच्चों को रखा गया था। दोनों पत्रकारों का दावा है कि उन्होंने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर करीब 30 मौतों का दस्तावेजीकरण किया, जबकि स्थानीय प्रशासन ने आठ मौतें होने की बात कही थी।
पत्रकारों के मुताबिक, रिपोर्टिंग के बाद उन्हें कई दिनों तक निगरानी में रखा गया और धमकियां दी गईं। मोनिका ने दावा किया कि रात करीब दो बजे दो पुलिसकर्मी उनके होटल के कमरे में पहुंचे। इसके बाद सुरक्षा को लेकर आशंका के चलते दोनों पत्रकार रात में ही होटल छोड़कर दिल्ली लौट आईं।
मोनिका ने आरोप लगाया कि 6 सितंबर को बिंदु गुर्जर, लोक सिंह और उनके सोशल मीडिया अकाउंट निलंबित कर दिए गए। उनका अकाउंट अभी भी निलंबित है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र पत्रकारों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट काम का अहम जरिया हैं और अकाउंट बंद होने से उनकी कमाई और काम दोनों प्रभावित होते हैं।
कार्यक्रम में 4PM News की पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान ने भी 3 सितंबर को दिल्ली की साकेत पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की घटना का जिक्र किया। दोनों के मुताबिक, वे गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के मैक्स अस्पताल दौरे की रिपोर्टिंग के लिए सड़क किनारे मौजूद थीं।
नफीसा ने साकेत थाने में कथित हिरासत और मारपीट का विवरण साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला पुलिस अधिकारी ने उनके साथ हाथ और लाठी से मारपीट की। नफीसा ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी को उनके मुस्लिम होने की जानकारी मिलने के बाद कथित तौर पर मारपीट और बढ़ गई। उनके मुताबिक, एसएचओ ने मारपीट का आदेश दिया था और अन्य पुलिसकर्मी भी इसमें शामिल थे।
शाहीन ने कहा कि घटना सार्वजनिक होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने उनसे माफी मांगी और गलती स्वीकार की। हालांकि, उनके मुताबिक बाद में दर्ज एफआईआर में केवल दो पुलिसकर्मियों के नाम शामिल किए गए, जबकि उन्होंने कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ शिकायत दी थी। उन्होंने पत्रकार संगठनों से इस मामले को उठाने और न्याय सुनिश्चित कराने की अपील की।
कार्यक्रम को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की अध्यक्ष संगीता बरुआ पिशारोटी, महासचिव अफजल इमाम, DUJ अध्यक्ष सुजाता माधोक, नेटवर्क ऑफ वुमन जर्नलिस्ट्स इन इंडिया की दिव्या आर्या, पत्रकार खुशबू अख्तर और द कारवां के संपादक हरतोष सिंह बल ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने महिला पत्रकारों के साथ एकजुटता जताई और उनके द्वारा अपने अनुभव सार्वजनिक रूप से साझा करने के साहस की सराहना की।


