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आज के अखबार : नंदीग्राम उपचुनाव जीतने की भाजपा की ‘तैयारियों’ पर चार हिन्दी अखबारों के अलग रूप

Hindi newspaper front page with bold headline about Mamata's support for Congress and related political storylines

खबरों से नहीं लगता है कि भाजपा और चुनाव आयोग ने मिलकर उपचुनाव को मजाक बना रखा है और जहां भाजपा मुकाबले में होती है वहां जबरदस्ती होती है।

संजय कुमार सिंह

देश की कुल पांच विधानसभा क्षेत्रों और असम की एक, नौगांव लोकसभा सीट पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होने हैं। भिन्न कारणों से पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम का उपचुनाव पश्चिम बंगाल के ही रेजीनगर के मुकाबले काफी महत्वपूर्ण है। आज अंग्रेजी के मेरे छह में से पांच अखबारों में यह खबर लीड है। छठे, द हिन्दू में सेकेंड लीड। हिन्दी के मेरे अखबारों, देशबन्धु और नवोदय टाइम्स में तो खबर पहले पन्ने पर है लीड है। लेकिन नवोदय टाइम्स की खबर से लगता है कि भाजपा की चालों के आगे ममता बनर्जी लुट-पिट गईं जबकि चालें भाजपा की कम, चुनाव आयोग या सत्ता की ज्यादा हैं। देशबन्धु से मामले की जानकारी भर मिलती है लेकिन अंग्रेजी अखबारों में लीड और सेकेंड लीड होने से मामले की गंभीरता समझ में आती है।

इसके बावजूद, अमर उजाला और दैनिक भास्कर में यह खबर पहले पन्ने पर हीं है। अमर उजाला में अंदर खबर होने की सूचना है लेकिन दैनिक भास्कर में वह भी नहीं है। नवोदय टाइम्स ने पूर्व मुख्य मंत्री ममता बनर्जी की स्थिति का मजाक उड़ाते हुए शीर्षक बनाया है, “ममता के पास न मानुष, न पार्टी”। इसे स्पष्ट करने वाला शीर्षक है, नंदीग्राम : उम्मीदवार पीछे हटीं ममता का कांग्रेस को समर्थन कांग्रेस बोली प्रत्याशी गिरफ्तार। आप समझ सकते हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ना कितना मुश्किल है। पहले की खबरें हैं हीं। दिलचस्प यह भी कि भाजपा तृणमूल पर हिंसा का आरोप लगाती है और उन्हें पार्टी में भी लेती है। अभी तृणमूल वालों के खिलाफ जो हिंसा चल रही है वह भी रिकार्ड है।

ऐसे में आज देशबन्धु ने बंगाल की मुख्य खबर को ही लीड बनाया है। शीर्षक है, ममता को मिला नया चुनाव चिन्ह। उपशीर्षक है, टीएमसी के नाम व चुनाव चिन्ह पर रोक के फैसले पर विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरा। इसके साथ दो और शीर्षक है, इंडिया गठबंधन की एकजुटता हुई और मजबूत तथा नंदीग्राम के कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान गिरफ्तार। अमर उजाला की खबर बहुत सीधी सरल है जबकि राहुल गांधी का आरोप उनकी फोटो के साथ छपा है। राहुल गांधी ने कहा है – वोट चोरी, सरकार चोरी अब पार्टी की ही चोरी। राहुल गांधी ने जो कहा है वह पर्याप्त गंभीर है। लोकतंत्र का मामला है इसलिए आज यह खबर सभी अखबारों में पहले पन्ने पर हो सकती थी।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में लिखा है, यह केवल ममता बनर्जी की नहीं, निष्पक्ष चुनाव चाहने वाले हर दल की लड़ाई है। पहले शिवसेना फिर एनसीपी और अब टीएमसी हर बार एक ही तरीका। भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं फिर उसका चुनाव चिन्ह चुरा लिया जाता है, आयोग उस पर रोक लगाता है। नवोदय टाइम्स ने उम्मीदवार के पीछे हटने की खबर को बहुत सामान्य ढंग से प्रकाशित किया है जबकि यह एक ट्रेंड है और कई बार हो चुका है। दैनिक भास्कर में खबर अंदर है, छोटी है लेकिन शीर्षक में बहुत सारी बातें हैं। आप ऊपर खबर की शुरुआत देख सकते हैं। 

स्पष्ट है कि नंदीग्राम उपचुनाव से संबंधित घटनाएं चुनाव चोरी की भाजपाई कोशिशों का नमूना है। इस कारण आज यह बड़ी खबर होनी ही थी। उपचुनाव तमिलनाडु की दो और पुडुचेरी की एक विधानसभा सीटों के लिए भी आयोजित किए जा रहे हैं। फिर भी नंदी ग्राम चुनाव से संबंधित खबरें पहले पन्ने पर है तो इस लिए कि यहां भाजपा टक्कर में है। पश्चिम बंगाल का मामला है तो द टेलीग्राफ में इस खबर को होना ही था। शुरुआत उसी से करता हूं। टेलीग्राफ में यह पांच कॉलम की लीड है। फ्लैग शीर्षक पांच कॉलम में है और इसके नीचे तीन कॉलम की एक और दो कॉलम की दूसरी खबर है। फ्लैग शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद दीदी की उम्मीदवार ने  (चुनाव) मैदान छोड़ा। उन्होंने कांग्रेस के जिस उम्मीदवार का समर्थन किया उसे गिरफ्तार कर लिया गया है। इसलिए मुख्य शीर्षक नंदीग्राम की जगह है, “नंदीगॉन : 1 बाहर, 1 जेल में”। नंदीगॉन का मतलब मोटे तौर पर यही है कि नंदीग्राम हाथ से गया। दूसरी खबर का शीर्षक है, (लोकतांत्रिक इतिहास का) काला दिन, लड़ूंगी : ममता।

दि एशियन एज में भी यह खबर लीड है और चार कॉलम में छपी है। शीर्षक है, नंदीग्राम के लिए चुनी उम्मीदवार ने टीएमसी को दगा दिया, कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार। मुख्य खबर के साथ नए चुनाव निशान और उम्मीदवार के दगा देने पर ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया भी है। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर चार कॉलम में लीड है। शीर्षक है, ममता बनर्जी ने उपचुनाव के लिए जिसे चुना उसने पर्चा वापस लिया; (कांग्रेस को समर्थन दिया तो) उम्मीदवार गिरफ्तार। टाइम्स ऑफ इंडिया में चार कॉलम की लीड का शीर्षक है, ममता की नंदीग्राम उम्मीदवार ने साथ छोड़ा, कांग्रेस उम्मीदवार गिरफ्तार।

दि इंडियन एक्सप्रेस में यह दो कॉलम की लीड है। फ्लैग शीर्षक है, टीएमसी के भिन्न गुटों के लिए नए नाम, नए चुनाव निशान। चुनाव निशान छिन गया तो ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन किया; उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। द हिन्दू में यह खबर सेकेंड लीड है। यहां शीर्षक है, ममता समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार नंदीग्राम में गिरफ्तार। दि हिन्दू की लीड ऐसी खबर है जो अब नहीं छपती है, वरना मुझे शीर्षक इसी को लगाना चाहिए था। नंदीग्राम में जो हुआ, भाजपा ने किया, चुनाव आयोग ने होने दिया तो इसमें नया क्या है।

चुनाव जीतने के लिए भारतीय जनता पार्टी के प्रयासों की प्रशंसा की जाती रही है। मुझे लगता है कि कुछ पत्रकार मित्र भाजपा की ऐसी तारीफ करके निष्पक्ष दिखने की कोशिश करते रहे हैं। इसमें कांग्रेस और राहुल गांधी की आलोचना का सुख भी मिलता रहा होगा। अब जब राहुल गांधी बहुत आगे निकल गए हैं और भाजपा के शर्मनाक कारनामों के खुलासों के बावजूद उसपर कोई असर नहीं हुआ है तो भाजपा की चुनावी तैयारियों की तारीफ करने वाले पत्रकार/रिपोर्टर अब उसकी तैयारियों की रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं तो यही भाजपा की राजनीति है। मुद्दा नंदीग्राम में होने वाला उपचुनाव है जो नियमानुसार अपने समय से हो रहा है। दिलचस्प यह है कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुवेन्दू अधिकारी ने दो चुनाव क्षेत्रों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह से जीत गए थे। बाद में उन्होंने नंदीग्राम की सीट छोड़ने का फैसला किया।

आप जानते हैं कि एसआईआर और सत्ता की ताकत पर राज्य में पहली बार भाजपा की सरकार बनी है। मुख्यमंत्री सुवेन्दू अधिकारी जीत प्रति आश्वस्त होने के बावजूद दो विधानसभा क्षेत्रों – नंदीग्राम और भवानीपुर से लड़कर जीते थे। नंदीग्राम सीट से इस्तीफा देकर भवानीपुर सीट अपने पास रखी है जहां उपचुनाव होना है। ऐसी जगह से भाजपा किसी कारण से हार गई तो उसके भिन्न मायने होंगे और यही राजनीति है। भाजपा की राजनीति ऐसी नहीं है। वह चुनाव लड़ती है तो चाहती है कि जीत उसी की हो और इसके लिए हर संभव उपाय किए जाते हैं। भले हार जाने पर कहा जाता है कि ईवीएम गड़बड़ होती, चुनाव में गड़बड़ी संभव होती तो हारते? (जारी)

लेखक संजय कुमार सिंह से [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है।

अगली किस्त पढ़ें – आज के अखबार (दो) : नंदीग्राम उपचुनाव जीतने की ‘तैयारियों’ में टाटा संस को बर्बाद करने की कोशिशें!

यह रहा लिंक – https://www.bhadas4media.com/nandigram-kee-taiyariyon-mein-tatasons/

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