रितिका चोपड़ा जी, शानदार रिपोर्ट है आपकी। भारत का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं है इसका एक और प्रमाण। चुनाव आयोग के भीतर क्या हो रहा है इसकी जाँच होनी चाहिए। सारे चुनावी नतीजों की समीक्षा होनी चाहिए। चुनाव जनता के वोट का नतीजा है या जी-प्रिंटर से निकला नतीजा, इसकी जाँच होनी चाहिए।
-रवीश कुमार
उर्मिलेश-
हाल के वर्षों की यह एक महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्ट है, जिसे Indian Express की पत्रकार Ritika Chopra ने ठोस तथ्यों के साथ पेश किया है. महत्पूर्ण सूचना और शोध-आधारित इस खबर के प्रकाशन के बाद देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पास अपने कई ‘एकतरफा और असंवैधानिक फैसलों’ के बचाव में कहने को कुछ भी नहीं बचता!
देश के दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों: एस एस संधू और विवेक जोशी ने किस तरह बीते 10 महीने में 14 मौकों और मुद्दों पर चुनाव आयोग में लिये जा रहे ‘एकतरफ़ा फैसलों’ पर सवाल उठाये; रिपोर्ट में इसका ब्योरा भी दर्ज है!
अब क्या करेंगे CEC ज्ञानेश कुमार?

नरेंद्र नाथ मिश्रा-
आज इंडियन एक्सप्रेस के खुलासे के बाद पहली बात कि ख़ुद ज्ञानेश कुमार को इस्तीफ़ा देकर आयोग को विवाद रहित बनाने की पहल करनी चाहिए।
अगर वे इस्तीफ़ा नहीं देते हैं (जिसकी पूरी संभावना है) तो फिर सुप्रीम कोर्ट को दख़ल देना चाहिए जिससे इतने गंभीर बातों का संज्ञान लेकर चुनाव प्रक्रिया को बचाना चाहिए।
अगर ऐसा भी नहीं होता है तो विपक्षी दलों को गंभीरता पूर्वक इस व्यवस्था में चुनाव में शामिल हो या नहीं इस पर गंभीरता पूर्वक समीक्षा करनी चाहिए।
गोविंद प्रताप सिंह-
चुनाव के दो चुनाव आयुक्तों ने ये 14 आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिसमें उन्होंने कई फाइलों पर भी सवाल खड़े किए थे।
- 28 अक्टूबर 2025 को सुखबीर सिंह संधूने लिखा- आयोग की मंजूरी के बिना चुनाव आयोग के नाम से पत्र और आदेश जारी किए गए।
- 16 अप्रैल 2026 को सुखबीर सिंह संधू ने लिखा- नए IT मॉड्यूल और पोर्टल के बारे में उन्हें मीडिया से जानकारी मिली।
- 16 अप्रैल 2026 को सुखबीर सिंह संधू ने लिखा- आयोग की मंजूरी के बिना संदेश जारी किए गए।
- 16 अप्रैल 2026 को विवेक जोशी ने लिखा- एक साल से अधिक समय से आयोग की बैठकों के बाद मिनट्स जारी किए जा रहे थे लेकिन अगली बैठक का एजेंडा पहले उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था।
- 16 अप्रैल 2026 को विवेक जोशी ने लिखा- आयोग की मंजूरी के बिना अधिकारियों को विदेश यात्राओं पर भेजा जा रहा था।
- 24 अप्रैल 2026 को विवेक जोशी ने दोहराया कि आयोग की मंजूरी के बिना कोई आधिकारिक संदेश जारी नहीं होने चाहिए।
- 16 मई 2026 को विवेक जोशी ने लिखा- सरकार की मंजूरी के बिना नए मतदाताओं के लिए फॉर्म 6 में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। संधू ने 19 मई को इस पर सहमति जताई।
- 29 मई 2026 विवेक जोशी ने चेतावनी दी कि मतदाता सूची के डेटाबेस को केंद्रीकृत किया जा रहा है और इसका ऑडिट जरूरी है।
- 29 जुलाई 2026 को विवेक जोशी ने कैबिनेट सचिव कोलिखा कि एक अधिकारी आयोग की जानकारी के बिना काम का बंटवारा कर रहा था।
- 29 जुलाई 2026 को संधू ने कैबिनेट सचिव को लिखा कि काम के आवंटन से जुड़े मुद्दे को दोहराया और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
- 30 जुलाई 2026 को जोशी और संधू दोनों चुनाव आयुक्तों ने काम के आवंटन से जुड़े एक आदेश को रद्द कर दिया।
- 12 अगस्त 2026 को सुखबीर सिंह संधू ने आपत्ति दर्ज कराई कि पश्चिम बंगाल के ट्रिब्यूनल के सामने चुनाव आयोग की ओर से अपील करने की अनुमति किसने दी?
- 13 अगस्त 2026 को सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में बदलाव को ‘अनाधिकृत और गैरकानूनी’ बताया।
- 14 अगस्त 2026 को सुखबीर सिंह संधू ने लिखा कि फील्ड अफसरों को ECINET सिस्टम तक पहुंच नहीं मिल रही थी। डीजी (IT) के पास इसे प्रतिबंधित करने का अधिकार नहीं है।
चुनाव आयुक्तों की ओर से दर्ज कराई गई ये आपत्तियां किसी संवैधानिक संस्था के भीतर चल रहे मतभेदों को साफ तौर पर दिखाती हैं.


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