जमशेदपुर। प्रभात खबर जमशेदपुर संस्करण में लंबे समय से चल रही आंतरिक खींचतान और कथित गुटबाजी के बीच एक और बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। तेज-तर्रार और आक्रामक रिपोर्टिंग के लिए पहचान रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार कुमार आनंद का स्थानांतरण जमशेदपुर से राउरकेला डेस्क कर दिया गया है। इस निर्णय को संस्थान के भीतर चल रहे शक्ति-संतुलन और संपादकीय पुनर्संरचना से जोड़कर देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, प्रधान संपादक के पद पर अंकित शुक्ला की पदस्थापना के बाद समूह के विभिन्न संस्करणों में व्यापक बदलावों का दौर शुरू हुआ है। इसी क्रम में जमशेदपुर यूनिट में भी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण किया गया है। संस्थान के अंदर चर्चा है कि नये संपादक के इर्द-गिर्द बनी एक प्रभावशाली चौकड़ी ने न केवल बीटों का पुनर्बंटवारा कराया, बल्कि संपादकीय निर्णयों पर भी अपना प्रभाव बढ़ाया है।
बताया जाता है कि हाल के महीनों में कई पुराने और अनुभवी पत्रकारों की जिम्मेदारियों में कटौती की गई है। इसी कड़ी में सिटी इंचार्ज संजीव भारद्वाज को पहले ही प्रभावहीन बना दिया गया था। उनके पास मौजूद लगभग सभी प्रमुख बीट वापस ले लिये गये। संस्थान के अंदर यह भी चर्चा है कि उन्हें सेवानिवृत्ति से पहले स्वेच्छा से इस्तीफा देने के लिए अप्रत्यक्ष दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
अब कुमार आनंद के तबादले ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है। लंबे समय से जमशेदपुर में सक्रिय रहे कुमार आनंद को स्थानीय राजनीतिक, प्रशासनिक हलकों की गहरी समझ रखने वाला पत्रकार माना जाता है। उनके अचानक स्थानांतरण को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया की बजाय संस्थान के भीतर चल रहे समीकरणों का हिस्सा माना जा रहा है।
कर्मचारियों के एक वर्ग का आरोप है कि नई व्यवस्था में उन पत्रकारों और कर्मचारियों को व्यवस्थित तरीके से किनारे किया जा रहा है, जिन्होंने संस्थान की पहचान और विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं प्रबंधन से जुड़े लोग इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे संगठनात्मक आवश्यकता और कार्यकुशलता बढ़ाने की प्रक्रिया बता रहे हैं।
प्रभात खबर समूह के अंदर पिछले कुछ समय से लगातार हो रहे तबादलों, जिम्मेदारियों में बदलाव और पुराने कर्मियों की भूमिका सीमित किए जाने को लेकर कर्मचारियों के बीच असंतोष भी देखा जा रहा है। हालांकि संस्थान की ओर से इन घटनाक्रमों पर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है।
मीडिया जगत के जानकारों का मानना है कि किसी भी संस्थान में नेतृत्व परिवर्तन के बाद प्रशासनिक बदलाव स्वाभाविक होते हैं, लेकिन जब बदलावों का असर लगातार एक ही वर्ग या समूह के लोगों पर दिखाई देने लगे तो सवाल उठना भी स्वाभाविक है। कुमार आनंद के स्थानांतरण के बाद जमशेदपुर यूनिट में चल रही चर्चाएं फिलहाल इसी प्रश्न के इर्द-गिर्द केंद्रित हैं कि यह महज एक प्रशासनिक निर्णय है या फिर लंबे समय से चल रही आंतरिक राजनीति का अगला अध्याय।
भड़ास को एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए इनपुट पर आधारित



