ओम शंकर-
बिहार के मायावी नेता “प्रशांत किशोर पांडे जी” कहते हैं कि बिहार के सभी नेता चोर हैं और वो सिर्फ ईमानदार हैं! पांडे जी जैसे धूर्त व्यक्ति जो अपनी जमीर, ईमान और विचारधारा को पिछले 10 वर्षों में चंद पैसों के लिए, बीसियों बार बाजार में बेचा हो, वो व्यक्ति भला ईमानदार, विचारवान और विश्वसनीय कैसे हो सकता है? बिहार की जनता बेवकूफ नहीं जो इस के सबसे बड़े पलटू नेता पर विश्वास कर ले और इसके झांसे में आ जाए?
पांडे जी, बिहार में पिछले दो सालों से “जन सूरज अभियान और अब पार्टी बनाकर चुनाव लड़ने की फिराक में हैं। इतने बड़े अभियान में सैकड़ों करोड़ रुपए इन्होंने अबतक खर्च किए हैं जिसका आजतक किसी को कोई हिसाब नहीं दिए हैं। मीडिया जब इस बारे में सवाल पूछती है तो बड़ी हीं चालाकी से यह कहकर निकल लेते हैं कि मैं सारे पैसे चेक से लेता हूं और एक – एक पैसों का हिसाब जनता को दूंगा, जो आजतक कभी नहीं दिए।
हर व्यक्ति को अपने आमदनी और खर्च का ब्योरा हर वर्ष इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को देना होता है। ब्योरा नहीं देना बेईमानी और अपराध है। अगर इन्होंने सारे पैसे ईमानदारी से व्हाइट मनी के तौर पर लिए हैं तो इसका ब्यौरा आयकर विभाग को जरूर दिए होंगे। अगर दिए हैं तो पिछले दो सालों में अबतक कभी किसी मीडिया को क्यों नहीं दिखाए और बताए?
मतलब या तो पांडे जी झूठ बोल रहे हैं कि वो सारे डोनेशन व्हाइट मनी के रूप में ले रहे या फिर ये व्यक्ति अपने आय – व्यय का ब्योरा आयकर विभाग से छुपा रहे हैं जो कानूनन अपराध है। अगर इन्होंने आयकर विभाग को ब्यौरा दिए हैं तो इसे इसलिए सार्वजनिक नहीं बता रहे ताकि उनको फंडिंग करनेवाले बीजेपी समर्थित पूंजीपतियों के भेद न खुल जाए। मतलब पांडे जी बिहार की जनता को झूठ बोलकर मुर्ख बना रहे हैं और ये बेईमान हैं।
क्यों इस देश के बीजेपी समर्थित पूंजीपति पांडे जी को अबतक जन सुराज अभियान चलाने और जन सुराज पार्टी बनाने/चुनाव लड़ने के लिए सैकड़ों करोड़ रुपए डोनेशन दिए हैं, किनके कहने पर दिए हैं और सरकार बनने के बाद पांडे जी इन पूंजीपतियों का अहसान किस तरह चुकाएंगे ये भी किसी को नहीं बताते हैं पांडे जी।
चुनावों रणनीतिकार के तौर पर उन्होंने किन- किन पार्टियों से कितने पैसे लिए, क्या वो धन “व्हाइट मनी” के तौर पर लिए अथवा “ब्लैक मनी” के रूप में ये भी कभी नहीं बताते हैं।
चुनावी सलाह के लिए जो धन विभिन्न पार्टियों ने उनको दिए, उसे वो कहां छुपाए हैं?
क्या उस आमदनी पर पांडे जी ने इनकम टैक्स चुकाए, अगर हां तो उसे आम जनता के समक्ष रखें और अगर नहीं तो ईमानदार कैसे हुए?


