दीप शिखा-
आज न्यूयॉर्क टाइम्स ने राहुल गांधी पर एक बहुत बड़ा लेख छापा है। उम्मीद है गोदी मीडिया इस पर भी प्राइमटाइम डिबेट करेगा। जानिये क्या पब्लिश हुआ है…
भारत में राहुल गांधी: राजनीतिक विरासत से आगे अपनी पहचान बनाने की कोशिश
The New York Times
लेखिका: Anupreeta Das, 18 अक्टूबर 2026
इस लेख में राहुल गांधी के राजनीतिक सफर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उनके संघर्ष और देश में बढ़ते युवा आंदोलनों के बीच उनकी बदलती राजनीतिक भूमिका का विश्लेषण किया गया है।
राजनीतिक विरासत से आगे अपनी पहचान
लेख के अनुसार, राहुल गांधी लंबे समय तक अपनी राजनीतिक विरासत की छाया से बाहर निकलकर स्वतंत्र पहचान बनाने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। वे जवाहरलाल नेहरू के पड़पोते, इंदिरा गांधी के पोते और राजीव गांधी के बेटे हैं। उनकी मां सोनिया गांधी भी कांग्रेस की प्रमुख नेता रही हैं।
लेख में कहा गया है कि अब राहुल गांधी अपनी पहचान केवल एक राजनीतिक परिवार के उत्तराधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी सरकार के प्रमुख विपक्षी चेहरे के रूप में बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
युवाओं के आंदोलनों से जुड़ाव
लेख का एक प्रमुख पहलू राहुल गांधी और युवा आंदोलनों के बीच बढ़ता जुड़ाव है। कॉलेज प्रवेश परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और उसके बाद परीक्षा रद्द किए जाने से छात्रों में असंतोष बढ़ा। लेख के मुताबिक, इस विवाद के बाद बड़े छात्र प्रदर्शन हुए और शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
राहुल गांधी ने इन मुद्दों को युवाओं की समस्याओं, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठाया। लेख में यह सवाल भी है कि क्या वे युवाओं के असंतोष को एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल पाएंगे।
राहुल गांधी ने इन मुद्दों को युवाओं की समस्याओं, जवाबदेही और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर उठाया। लेख में यह सवाल भी है कि क्या वे युवाओं के असंतोष को एक व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल पाएंगे।
चुनाव आयोग और मतदाता सूची का विवाद
लेख में मतदाता सूची से लगभग 13 करोड़ नाम हटाए जाने के विवाद का भी उल्लेख है। राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि नाम हटाने के पीछे कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं था। इसलिए यह मुद्दा लेख में राहुल गांधी के आरोपों और आयोग के पक्ष के बीच एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विवाद के रूप में सामने आता है।
भारत जोड़ो यात्रा और राहुल गांधी की छवि
लेख में 2022 में शुरू हुई राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का भी उल्लेख है। लगभग 2,500 मील की इस यात्रा का उद्देश्य देशभर के लोगों से जुड़ना और उनकी उस छवि को बदलना था जिसे विरोधी दल एक विशेषाधिकार प्राप्त राजनीतिक परिवार से जोड़ते रहे हैं।
लेख के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को अपेक्षा से कम सीटें मिलीं और उसे गठबंधन सरकार बनानी पड़ी। राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने। लेख इस घटनाक्रम को उनकी राजनीतिक भूमिका में आए बदलाव के संदर्भ में देखता है।
संविधान, धर्मनिरपेक्षता और विपक्ष की एकजुटता
लेख के मुताबिक, राहुल गांधी भाजपा की हिंदुत्व आधारित राजनीति के मुकाबले संविधान और धर्मनिरपेक्षता को अपनी राजनीतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा बना रहे हैं। वे कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDIA गठबंधन के विभिन्न दलों और युवा आंदोलनों के बीच तालमेल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में मतदाता सूची में बदलाव के विरोध में दिल्ली में सर्वोच्च न्यायालय की ओर निकाले गए मार्च का भी लेख में जिक्र है।
क्या यह राहुल गांधी के लिए निर्णायक मोड़ है?
लेख का केंद्रीय सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस इन आंदोलनों और सरकार के प्रति असंतोष को 2029 के लोकसभा चुनाव तक एक मजबूत राजनीतिक चुनौती में बदल पाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के विचार भी लेख में शामिल हैं। कुछ के अनुसार, सरकार के प्रति असंतोष राहुल गांधी को अधिक अवसर दे रहा है; लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इससे भाजपा को सत्ता से हटाने के लिए पर्याप्त राजनीतिक समर्थन जुट पाएगा या नहीं। भाजपा के नेताओं ने भी राहुल गांधी की रणनीति की आलोचना की है।
राहुल गांधी के सामने चुनौती सिर्फ नरेंद्र मोदी का विरोध करना नहीं, बल्कि युवाओं के असंतोष, लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्षी एकजुटता को एक टिकाऊ राजनीतिक ताकत में बदलना है। यह प्रयास उन्हें नई राजनीतिक भूमिका दे सकता है, लेकिन 2029 में इसका परिणाम क्या होगा, यह अभी अनिश्चित है।



