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सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच भ्रष्ट है : सुभाष चंद्रा

ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। सुभाष चंद्रा ने कहा- “मुझे विश्वास है कि सेबी की चेयरपर्सन भ्रष्ट हैं, क्योंकि उनके और उनके पति की संयुक्त आय, जो पहले सालाना लगभग 1 करोड़ रुपये थी, अब 40-50 करोड़ रुपये प्रति वर्ष हो गई है। इस मामले की जांच मीडिया और जांच एजेंसियों द्वारा की जानी चाहिए, जिसमें सेटल और कम्पाउंड किए गए मामलों और कंपनियों द्वारा दी गई कंसल्टेशन फीस का विश्लेषण शामिल हो। ये कई तरीके हैं जिनसे वह और उनके पति कंपनियों और शेयर बाजार के भ्रष्ट ऑपरेटरों और फंड मैनेजरों से पैसे उगाही करते हैं।”

सुभाष चंद्रा ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर, बुच को “भारी रकम” दे रही थीं और वे दोनों हर दिन कम से कम 20 बार फोन पर बात करते थे। सुभाष चंद्रा ने सेबी में भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए इसकी जांच की मांग की।

सुभाष चंद्रा ने आरोप लगाया कि एक बैंक के चेयरपर्सन द्वारा सुझाए गए व्यक्ति मंजीत सिंह ने फरवरी में उनसे मिलकर सेबी के सभी पेंडिंग मुद्दों को “कीमत” के दम पर सुलझाने की पेशकश की। ज्ञात हो कि सुभाष चंद्रा पर सेबी द्वारा 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के फंड डायवर्जन के मामले की जांच चल रही है।

सेबी की जांच में पता चला है कि zee से फंड डायवर्जन पहले के अनुमान से कहीं अधिक है और नियामक sebi सुभाष चंद्रा और उनके बेटे पुनीत गोयनका को नए कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया में है।

सेबी ने अगस्त 2023 में सुभाष चंद्रा और उनके बेटे पुनीत गोयनका को चार ग्रुप कंपनियों में महत्वपूर्ण पदों पर रहने से रोक दिया था। जून 2023 में, सेबी ने शिरपुर गोल्ड रिफाइनरी, जो कि एस्सेल ग्रुप की एक कंपनी है, के प्रमोटर्स पर धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन का भी आरोप लगाया था।

सेबी की कार्रवाई के चलते ज़ी और जापान की सोनी की भारतीय इकाई के बीच 10 बिलियन डॉलर का विलय रद्द हो गया। चंद्रा ने कहा कि ज़ी-सोनी का विलय अच्छी तरह से आगे बढ़ रहा था और उसे स्टॉक एक्सचेंज से मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन सेबी ने बीएसई/एनएसई को NCLT की कार्यवाही में हस्तक्षेप करने और सोनी को डराने के लिए कहा, जिसके कारण सोनी ने आखिरकार इस विलय को रद्द कर दिया। इससे छोटे शेयरधारकों को भारी नुकसान हुआ।

उन्होंने सेबी द्वारा उन दो म्यूचुअल फंड हाउसों पर जुर्माना लगाने का विरोध किया, जिन्होंने समूह में निवेश किया था।

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