अफ़सोस! देश के जाने माने पत्रकार सैयदेन ज़ैदी भाई का इंतक़ाल हो गया। एक शानदार प्रोफेशनल और एक जानदार इंसान। 2004 में उन्होंने India TV जॉइन किया था। सैयदेन ज़ैदी कई साल मुंबई में इंडिया टीवी के रेज़िडेंट एडिटर रहे। बाद में उन्होंने लहरें टीवी को लीड किया। साल 2019 में वो न्यूजबीन नाम से एक डिजिटल प्लेटफार्म लेकर आए। अलविदा सैयदेन भाई। इन्ना लिल्लाहि वा इना इल्लाहे राजेउन। अल्लाह मरहूम की मगफिरत करे और उनको जवारे मासूमीन में जगह इनायत फ़रमाए।
-तनसीम हैदर
उमेश चतुर्वेदी-
इंडिया टीवी में हमारे साथी रहे सैयदेन जैदी के न रहने का समाचार मर्माहत करने वाला है। उनका निधन लखनऊ में हुआ है। वजह क्या रही..पता नहीं चला। जीवंत इंसान थे। हमने इंडिया टीवी में कई अनुशासनों को चुपके से तोड़ा था, उनमें से एक अनुशासन था- न्यूजरूम में कुछ नहीं खाना..लेकिन सुबह की शिफ्ट में जैदी के साथ हमने इसे चुपके से तोड़ा।
जैदी शिफ्ट इंचार्ज होते थे और मैं कॉपी इंचार्ज…एक बार Rajat Sharma जी ने देख लिया। चुपके से हमने उनको भी मुट्ठी में नमकीन पकड़ा दिया। वे भी थके थे..नमकीन फांक पानी पीकर मुझसे धीरे से बोले, आपने नियम तोड़ा भी और तुड़वाया भी। लंबी कहानी है।
तब जैदी कनखियों से मुसकाते रहे थे..हमारी आखिरी मुलाकात कई साल पहले हुई थी..शायद प्रेस क्लब के बाहर…इंडिया टीवी के साथी धनंजय के बाद जैदी का जाना…उफ्फ। जैदी जी जहां भी रहो..जीवंत बने रहना। मस्ती में डूबे रहना। दबंगई दिखाते रहना..
डॉ संजय कुमार सिंह-
जैदी सर, आप आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन आपकी उपस्थिति हर पल महसूस होती है। आपने संघर्ष और घटनाओं को देखने-समझने की जो दृष्टि दी, वह मेरा मार्गदर्शन करती है।
आप केवल एक मार्गदर्शक नहीं थे, बल्कि जीवन को समझने की प्रेरणा थे। ऊपर वाले का आभार है कि मुझे आपके सान्निध्य का सौभाग्य मिला। आपका जाना मेरे लिए एक व्यक्तिगत क्षति है।
कुछ रिक्तियाँ कभी नहीं भरतीं—आप उनमें से एक हैं। विनम्र श्रद्धांजलि।
अश्विनी शर्मा-
Syedain Zaidi साहब से पहली मुलाक़ात मुंबई में साल 2006 में हुई थी.. तब आप इंडिया टीवी के महाराष्ट्र एडिटर थे.. उसी समय सबसे महंगी बार बाला तरन्नुम की स्टोरी बेहद चर्चा में थी.. मैं चार बंगला अंधेरी वेस्ट से पैदल ही गुज़र रहा था.. इंडिया टीवी में इस ख़बर पर ज़ैदी साहब लाइव दे रहे थे.. मैं उनके धारा प्रवाह लाइव का मुरीद हो गया था.. मैंने उनसे बात की और भाई वाहिद अली खान को इंडिया टीवी मुंबई में क्राइम बीट की ज़िम्मेदारी देने के लिए भी शुक्रिया अदा किया.. Waahiid Ali Khan भाई ने साल 2001-2002 में तहलका टीवी मुंबई में बतौर न्यूज़ एंकर मुझे मौका दिया था.. ज़ैदी साहब कमाल का ज्ञान रखते थे.. जब भी वो किसी ख़बर पर लाइव रहते.. सुनते ही रहने का दिल करता था.. मईं 2006 में माहिम के हिंदुजा अस्पताल में दिग्गज बीजेपी नेता प्रमोद महाजन ने आखिरी सांस लीं थी.. मैं भी मौके पर था.. तब भी ज़ैदी साहब महाजन जी के योगदान पर अनवरत बोलते रहे..टीवी पत्रकार तो बहुत रहें हें लेकिन ज़ैदी साहब की तरह गहरी समझ वाले मीडिया प्रोफेशनल मुश्किल से ही मिले.. उनके असमय निधन की ख़बर वाकई दिल तोड़ने वाली है.. ज़ैदी साहब को विनम्र श्रद्धांजलि.. परिवार को विपदा सहने की हिम्मत मिले!
आज़ाद खालिद-
Sayyedain zaidi…. Alvida!
सहारा के कार्यकाल में एक बंदा सभी के लिए बेहद हंसमुख और मिलनसार. लेकिन एक दिन मुझसे कहने लगा कि ख़ालिद साब आप मेरे लिए बेहद ख़ास हैं. मैंने कहा कि जनाब मैं तो आपके प्रेम और सम्मान को समझता और महसूस करता हूं, आपको बताने की ज़रूरत नहीं, मैं आपकी मोहब्बत का शुक्रगुज़ार हूं जनाब।
उन्होंने कहा कि मियां आज़ाद साहब यूं तो हम लखनऊ के हो गये और लखनऊ वाले ही हैं मगर दरअसल आपके ही ज़िले के जानसठ के रहने वाले हैं, बस इसीलिए आप मेरे लिए बेहद ख़ास हैं। मैंने कहा ज़ैदी भाई अब और भी एहतराम बढ़ गया आपका मेरे दिल में, क्योंकि हमारी तहसील भी जानसठ ही है। अपने मख़सूस अंदाज में खुलकर हंस कर बोले, लेकिन एक बात और हमारे ज़िले के ख़ासतौर से जानसठ के लठैत बडे़ मशहूर हैं, और ख़ालिद साहब आप कुछ कुछ शरीफ़ दिखते हैं. मैंने पूछा ज़ैदी साहब मेरे लिए कंपलीमेंट है या मेरा मज़ाक़। गले लगा लिया और बस। ऐसे थे हमारे सय्यदैन ज़ैदी साहब।
आज सोशल मीडिया से जानकारी मिली के वो दुनिया ए फानी को अलविदा कह कर मालिक ए हक़ीक़ी की जनाब में जा पहुंचे। इन्नालिल्लाही व इन्नाइलयहीराजिऊन। ख़ुदा की उनके परिवार को सब्र अता फरमाए। अच्छे साथी बिछड़ते नहीं यादों के दरीचों में क़याम कर लेते हैं। अलविदा ज़ैदी भाई।



