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उत्तर प्रदेश

बदलती सियासत: इतिहास के आईने से तैयार हो रही मिशन यूपी 2027 की पटकथा!

कैलाश सिंह-

लखनऊ/दिल्ली | इतिहास कभी उसे माफ़ नहीं करता जो उसे छेड़ता है, वह भविष्य का आईना बनकर राजतंत्र रहा हो या वर्तमान का लोकतंत्र, उसकी पटकथा की पृष्टिभूमि की राह का निर्माण करता है। ऐसी ही परिस्थिति एक बार फ़िर यूपी की सियासत में पैदा हो गई है, जिसकी चपेट में राजस्थान समेत देश के अन्य राज्य भी आयेंगे लेकिन उतर प्रदेश तो करणी सेना और अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा युवा के मैदान में आने से कुरुक्षेत्र बन गया है।

जिसके चलते इनके निशाने पर सपा सांसद रामजी लाल सुमन और पार्टी मुखिया अखिलेश यादव हैं। ऐसी ही हरकत राजपूतों को लेकर लोकसभा चुनाव के दौरान गुजरात में भाजपा प्रत्याशी व केंद्रीय मंत्री रहे रूपाला ने की थी जिसका खामियाजा पार्टी को राजस्थान और खासकर यूपी में अधिक भुगतना पड़ा था।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सपा सांसद रामजी लाल सुमन द्वारा देश के महानायक रहे राणा सांगा को गद्दार कहना, पार्टी मुखिया अखिलेश यादव का ‘शह’ देना और कांग्रेस खासकर राहुल गाँधी की चुप्पी ने उन्हें मिशन यूपी 2027 के लिए लिखी जा रही सियासत की पटकथा के चक्रव्यूह में फंसा दिया है। दोनों दलों के लिए यूपी और राजस्थान के विधान सभा चुनाव गठबंधन से हों या अकेले मैदान में आना भारी पड़ सकता है।

दरअसल सांसद सुमन के बयान के बाद सपा द्वारा उन्हें दलित नेता के रूप में प्रोजेक्ट करके जो दलित कार्ड खेलने की कोशिश हुई उसकी हवा बसपा सुप्रीमों सुश्री मायावती के बयान- ‘रामजी लाल सुमन समाजवादी पार्टी के सांसद हैं, उनका दलित नेता के रूप में कोई लेना देना नहीं है।’ मायावती का यह बयान उन्हें फ़िर राष्ट्रवादी नेता की श्रेणी बनाये रखा और दलित वोटबैंक को भटकाव से भी बचा लिया।

अब दलितों पर बीते लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरह संविधान व आरक्षण को लेकर कांग्रेस और सपा द्वारा चलाये गए मुद्दे के विमर्श जैसा असर नहीं होने वाला है।

बीते आठ साल से सीएम की कुर्सी से दूर सपा मुखिया अखिलेश यादव दरअसल 37 संसदीय सीटें जीतने के बाद से सातवें आसमान से गुलाटी मार रहे हैं, अपने पिता मुलायम सिंह यादव के दौर से इन्होंने अधिक सीटें नि:संदेह हासिल की हैं लेकिन लोकसभा में जो हैसियत मुलायम सिंह की थी वह दर्जा अखिलेश यादव नहीं हासिल कर सके हैं।

यूपी में मुख्यमंत्री की कुर्सी उनके लिए हसीन सपने सरीखी बनी हुई है। राणा सांगा पर अपमानजनक टिप्पणी ने दो साल बाद होने वाले विधान सभा चुनाव की पटकथा लिखनी शुरू कर दी है। अब उन्हें कांग्रेस से गठबंधन को लेकर भी न उगलते बनेगा और न निगलते।

इस कड़ी में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा ‘युवा’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुंवर अवनीश सिंह के नेतृव में संगठन के तमाम पदाधिकारी अगले महीने सपा सांसद रामजी लाल सुमन का दिल्ली में घेराव करने का अल्टीमेटम दे चुके हैं। राणा सांगा पर की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर सांसद और पार्टी मुखिया के खिलाफ याचिका भी दायर कर दिया है।

लेखक तहलका न्यूज नेटवर्क के पॉलिटिकल एडिटर हैं।

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