‘आप’ के पंजाब में जीतने के चार प्रमुख कारण ये रहे!

सुरेश चिपलूनकर-

कुछ मित्रों ने पोस्ट किया है कि पंजाब में “आप” क्यों और कैसे आई?? मेरा मानना है कि केजरीवाल बड़े ही सधे हुए क़दमों से धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं… उनकी जीत के चार “तात्कालिक” कारण जो मुझे दिखाई दिए, वे इस प्रकार हैं…

१) पंजाब की जनता “एक ही थैली के चट्टे-बट्टे उचक्कों” से त्रस्त हो चुकी थी…

२) “आप” ने उसके सामने कई फ्रेश चेहरे रखे, जिनका कोई काला इतिहास नहीं था…

३) केजरीवाल ने लगभग तीन वर्षों से नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला नहीं किया, ना ही मोदी के प्रति “व्यक्तिगत” विरोध वाला कोई अटपटा फालतू बयान दिया… उसने केवल दिल्ली में अपने काम से काम रखा… वहां पर जीत हासिल की…

४) केजरीवाल को उनके विरोधी भले ही मुफ्तखोरी की योजनाएं चलाने वाला कहते हों (और खुद की पार्टी वाली मुफ्तखोरी योजनाओं को नजरअंदाज करके दोगलापन दिखाते हों)… लेकिन केजरीवाल की मुफ्तखोरी वाली योजनाओं की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे योजनाएं जाति-धर्म-आय आदि से ऊपर उठकर सभी को फायदा देने वाली होती हैं… इन योजनाओं में ऐसा नहीं कि मुफ्तखोरी की योजना बनाते समय किसी एक या दो समुदायों को अपना “दामाद” बना लिया जाए…

हो सकता है, इन कारणों से आप असहमत हों…

नोट :- मेरा ऐसा अनुमान है कि जिन राज्यों में कई वर्षों से दो पार्टियों का “अदला-बदली” वाला वर्चस्व कायम है, वहां पर “आप” के उज्जवल भविष्य की संभावना है… हालांकि इसमें काफी समय लगेगा, लेकिन पंजाब की सत्ता हासिल करने में भी तो केजरीवाल को मेहनत करते-करते पंद्रह साल लग ही गए…



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