नागेंद्र प्रताप-

अभी अभी सूचना मिली कि इस वर्ष का 15वां ‘अयोध्या प्रसाद खत्री स्मृति सम्मान’ नवीन जोशी के नये उपन्यास ‘देवभूमि डेवलपर्स’ को देने की घोषणा हुई है। यह उपन्यास विकास के नाम पर जल, जंगल, जमीन पर कॉर्पोरेट्स द्वारा नेताओं, ठेकेदारों और दलालों से साठ-गांठ कर उत्तराखंड की भूमि पर कब्जा जमाने की कहानी कहने के साथ ही उसके प्रतिरोध में उठने वाले जन-आंदोलनों और संगठनों के अंतर्विरोधों का भी मुखर बयान करता है। उपन्यास एक नये राज्य के स्वप्न और उसके यथार्थ के बीच के अंतर्विरोधों को प्रभावशाली ढंग से उजागर करता है। जन-आंदोलनों को चित्रित करने वाले उपन्यासों का शिल्प कैसा हो, यह उसका भी एक सफल उदाहरण है।
पहाड़ की माटी में रचे-बसे और उसे शिद्दत से जीने वाले नवीन जोशी ने जब चिपको आन्दोलन के भटकाव पर आधारित अपना पहला उपन्यास ‘दावानल’ लिखा तब उसकी भी खूब चर्चा हुई थी। ‘टिकटशुदा रुक्का’, ‘बाधैन’, ‘अपने मोर्चे पर’, ‘राजधानी की शिकार कथा’, ‘ये चिराग जल रहे हैं’, ‘लखनऊ का उत्तराखंड’ उनकी चर्चित कृतियां हैं।
नवीन जोशी इधर लगातार उत्तराखंड भ्रमण करते हुए जिस तरह उसकी पीड़ा का बयान कर रहे हैं, उसमें उनके अगले किसी महत्वपूर्ण उपन्यास की आहट साफ सुनाई दे रही है, जिसका इंतज़ार रहेगा।
नवीन जोशी को यह सम्मान नवंबर माह में आयोजित सम्मान समारोह में प्रदान किया जायेगा।
बधाई नवीन जी इस नई उपलब्धि के लिए। अलग बात कि पुरस्कार या सम्मान कभी किसी कृति का अंतिम मूल्यांकन नहीं होते। असल मूल्यांकन तो वह चर्चा है जो आपके उपन्यासों पर लगातार जारी है और पाठक ने उसे हाथो हाथ लिया है।
अब तक किस-किस को मिला यह सम्मान?
कृष्ण बलदेव वैद (2008), पत्रिका : ‘तद्भव’, सं. अखिलेश (2009), शेखर जोशी (2010), डॉ. तुलसी राम (2011), डॉ. रोज केरकेट्टा (2012), अनिल यादव (2013), सुधीर विद्यार्थी (2014), डॉ. विनय कुमार (2015), पत्रिका: ‘समयांतर’, सं. पंकज बिष्ट (2016), वाल्टर भेंगरा ‘तरुण’ (2017), निदा नवाज़ (2018), डॉ. जोराम यालाम (2019), सुरेन्द्र मनन (2022) तथा डॉ. कमलेश वर्मा एवं सुचिता वर्मा (2023) को प्रदान किया जा चुका है।



