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छत्तीसगढ़

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि पैसा लेकर दे रहा पत्रकारिता की डिग्री!

रायपुर : छात्र- सर…सप्लीमेंट्री आई है पास होने का कितना चार्ज लगेगा?

बाबू- नम्बर के हिसाब से 3 हजार में पास हो जाओगे…

चौंक गये न?  यह कनवर्सेशन है छत्तीसगढ़ रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के बाबू सुरेन्द्र यादव और सप्लीमेंट्री लाये एक छात्र की। इस स्टिंग में बाबू ने पास होने का तरीका और जितने नम्बर बढ़ाने हैं उसका चार्ज भी बताया है। दरअसल रिजल्ट से छेड़छाड़ की यह पहली घटना नहीं है। विवि द्वारा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना आम बात है। नेताओं के संरक्षण में चल रही इस यूनिवर्सिटी के मोटी चमड़ी वाला स्टाफ हद से ज्यादा भ्रष्ट है।

रायपुर : छात्र- सर…सप्लीमेंट्री आई है पास होने का कितना चार्ज लगेगा?

बाबू- नम्बर के हिसाब से 3 हजार में पास हो जाओगे…

चौंक गये न?  यह कनवर्सेशन है छत्तीसगढ़ रायपुर के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विवि के बाबू सुरेन्द्र यादव और सप्लीमेंट्री लाये एक छात्र की। इस स्टिंग में बाबू ने पास होने का तरीका और जितने नम्बर बढ़ाने हैं उसका चार्ज भी बताया है। दरअसल रिजल्ट से छेड़छाड़ की यह पहली घटना नहीं है। विवि द्वारा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करना आम बात है। नेताओं के संरक्षण में चल रही इस यूनिवर्सिटी के मोटी चमड़ी वाला स्टाफ हद से ज्यादा भ्रष्ट है।

इसके पहले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया डिपार्टमेंट के HOD नरेंद्र त्रिपाठी का भी स्टिंग हो चुका है जिसमें वह अपने उन चहेते छात्रों को एग्जाम में बैठने का तरीका बता रहा था जिनकी बेहद शॉर्ट अटेंडेंस थी। यानी नियमानुसार वे एग्जाम में बैठने के पात्र ही नहीं थे। लेकिन त्रिपाठी ने अटेंडेंस में हेरफेर करके उनको एग्जाम में बैठा दिया था। जो छात्र किसी चैनल / अखबार में काम कर रहे होते हैं, स्टाफ रिजल्ट बिगाड़ने या एग्जाम में न बैठने देने का डर दिखा उनसे एंटी खबर रुकवाने और फेवर में खबर लगवाने का भी काम करता है।

विवि के पूर्व वीसी सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में घोटालों और शिक्षा की दलाली का सिलसिला शुरू हुआ। अपने खास शिक्षकों की टीम बनाकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ और उच्च पद का भरपूर फायदा उठाया था जोशी ने। यही नहीं, नरेंद्र त्रिपाठी पर स्टिंग और अख़बार में खबर आने के बाद उसने एक छात्र पर स्टिंग का आरोप मढ़ बिना कोई रीजन बताये एग्जाम में बैठने से रोक दिया था। साथ ही खबर का फॉलोअप रुकवाने का काम भी किया। फ़िलहाल बिलासपुर हाईकोर्ट में विवि प्रशासन के विरुद्ध केस चल है।

विवि में पढ़ने वाले अधिकतर छात्र पिछड़े इलाकों से आते हैं। जो बस डिग्री करना चाहते हैं ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके। इसी बात का फायदा प्रबन्धन उठाता है और रिजल्ट से छेड़छाड़ कर पैसे बनाता है। प्लेसमेंट की बात करें तो जो छात्र मेहनती और काबिल हैं वो खुद से जॉब पा लेते हैं। बाकी डिग्री लिए काम की तलाश में ही भटकते रहते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो यहां पढ़ने वाले छात्र कैम्पस और प्लेसमेंट जानते ही नहीं। बहरहाल, बड़ा सवाल यही कि स्टिंग हो रहे थे, हो रहे हैं और आगे भी होंगे लेकिन क्या नेताओं के संरक्षण में चल रहे इस विवि के भ्रष्ट अधिकारियों पर कभी कोई कर्रवाई होगी? क्या कभी उन छात्रों को इन्साफ मिल पायेगा जिनका करियर शिक्षा के इन दलालों की वजह से बर्बाद हो गया?

आशीष चौकसे
पत्रकार
[email protected]

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