मुंबई/नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उन्हें E20 ईंधन कार्यक्रम से जुड़े कथित मानहानिकारक पोस्ट और एआई (AI) से तैयार डीपफेक कंटेंट के मामले में Meta, Google, X, YouTube समेत कई डिजिटल प्लेटफॉर्म के खिलाफ दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति अभय आहूजा ने गडकरी को हाईकोर्ट की मूल दीवानी पीठ में मुकदमा दायर करने की इजाजत दी। चूंकि विवादित सामग्री अदालत के क्षेत्राधिकार के भीतर और बाहर दोनों जगह उपलब्ध थी, इसलिए इसके लिए अदालत की अनुमति आवश्यक थी।
गडकरी ने लगाए गंभीर आरोप
याचिका में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर कुछ अज्ञात लोगों ने पोस्ट, रील और वीडियो साझा कर गडकरी को व्यक्तिगत रूप से E20 ईंधन नीति का जिम्मेदार बताया। कुछ पोस्ट में यह भी आरोप लगाया गया कि इस नीति से गडकरी और उनके परिवार को आर्थिक लाभ हुआ।
गडकरी ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम और E20 नीति का संचालन पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय करता है, न कि उनका मंत्रालय।
डीपफेक और AI के दुरुपयोग का आरोप
याचिका में दावा किया गया है कि एआई तकनीक का इस्तेमाल कर गडकरी की तस्वीर, चेहरे और आवाज की नकल करते हुए भ्रामक वीडियो और ऑडियो तैयार किए गए। इनका उद्देश्य उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना और यह गलत धारणा बनाना था कि उन्होंने सार्वजनिक पद का निजी आर्थिक लाभ के लिए दुरुपयोग किया।
गडकरी का कहना है कि यह मामला केवल आलोचना तक सीमित नहीं है, बल्कि झूठे आरोपों, अपमानजनक भाषा और एआई आधारित छेड़छाड़ वाले कंटेंट के जरिए उनकी छवि खराब करने का प्रयास किया गया।
11 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग
गडकरी ने अदालत से विवादित सामग्री के प्रकाशन और प्रसार पर स्थायी रोक (Permanent Injunction) लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने 11 करोड़ रुपये के हर्जाने की भी मांग की है।
इस मुकदमे में Meta (Facebook और Instagram), Google, YouTube, X Corp के अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) और दूरसंचार विभाग (DoT) को भी पक्षकार बनाया गया है। वहीं, विवादित सामग्री बनाने और फैलाने वाले अज्ञात लोगों को ‘जॉन डो’ (John Doe) प्रतिवादी के रूप में शामिल किया गया है।
आलोचना नहीं, फर्जी कंटेंट पर कार्रवाई की मांग
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि यह मुकदमा सरकार या मंत्री की निष्पक्ष आलोचना को रोकने के लिए नहीं है। इसका उद्देश्य केवल कथित रूप से झूठे, दुर्भावनापूर्ण, मानहानिकारक और एआई से छेड़छाड़ कर तैयार किए गए कंटेंट के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना है।
मामले की नियमित सुनवाई अब न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर की पीठ के समक्ष होने की संभावना है।


