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सुख-दुख

दो-दो सुसाइड, दो-दो लेटर में नाम, फिर भी बच गया कांडा, बीजेपी की कृपा से!

गिरीश मालवीय-

कहा जाता है कि “मरता हुआ व्यक्ति झूठ नहीं बोलता”। यहाँ गीतिका शर्मा का सुसाईड नोट दे रहे हैं जिसमें साफ़ साफ़ नाम लिखे हैं, प्रताड़ना के कई सुबूत भी हैं लेकिन उसके बावजूद गोपाल कांडा बच गया।

अच्छी तरह से याद है कि जब गीतिका सुसाइड केस सामने आया था तो बहुत हंगामा मचा था बीजेपी ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। उसी समय की ये एक तस्वीर देखिए।

तब हरियाणा सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अगुवाई में कांग्रेस सरकार बनी थी। गोपाल कांडा ने निर्दलीयों के साथ मिलकर हुड्डा सरकार को अपना समर्थन दिया था। बदले में हुड्डा सरकार ने उन्हें गृह मंत्री का पद सौंपा था।

गीतिका की मृत्यु के छह महीने बाद, उनकी मां अनुराधा शर्मा ने 16 फरवरी, 2013 को आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने भी एक सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें कांडा और चड्ढा पर उनकी बेटी को यह कदम उठाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया गया था.

दो दो मौते हुई लेकिन उसके बाद भी गोपाल कांडा का बाल भी बांका नहीं हुआ। आख़िर बीजेपी के गठबंधन में शामिल जो हो गये। कमाल ही है।

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