लखनऊ। उत्तर प्रदेश सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने प्रदेश के सभी मंडलीय और जिला सूचना कार्यालयों से मान्यता प्राप्त पत्रकारों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी तलब की है। 27 जुलाई 2026 को जारी एक पत्र में निर्देश दिया गया है कि 28 जुलाई 2026 को शाम 5 बजे तक हर हाल में यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
अपर निदेशक अरविंद कुमार मिश्र की ओर से जारी पत्र में तीन बिंदुओं पर वर्षवार विवरण मांगा गया है।
पहला, वर्ष 2008 से 2025 तक कितने जिला मुख्यालय के मान्यता प्राप्त मीडिया प्रतिनिधियों की मान्यता एक संस्थान से दूसरे संस्थान में स्थानांतरित की गई।
दूसरा, वर्ष 2009 से 2025 तक जिला स्तर पर मान्यता प्राप्त पत्रकारों के खिलाफ कितने आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए। इसकी भी वर्षवार जानकारी मांगी गई है।
तीसरा, वर्ष 2016 से अब तक जिला मुख्यालय के मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज होने के कारण कितनी मान्यताएं निरस्त की गईं, इसका भी विवरण तलब किया गया है।
पत्र में स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि यह सूचना “प्रत्येक दशा में” 28 जुलाई की शाम 5 बजे तक ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाए।
हालांकि इस आदेश के बाद एक बड़ा सवाल भी उठ रहा है। यदि सूचना विभाग जिला मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों और उनकी मान्यता निरस्त होने का पूरा रिकॉर्ड एकत्र कर रहा है, तो क्या राज्य मुख्यालय (लखनऊ) से मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर दर्ज आपराधिक मुकदमों का भी ऐसा ही डेटा सार्वजनिक किया जाएगा?
पत्रकार संगठनों और मीडिया जगत में अब यह चर्चा शुरू हो गई है कि पारदर्शिता का सिद्धांत यदि लागू किया जा रहा है, तो उसका दायरा केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। राज्य मुख्यालय से मान्यता प्राप्त पत्रकारों पर दर्ज मुकदमों, उनके निस्तारण और यदि किसी की मान्यता निरस्त हुई है तो उसका रिकॉर्ड भी सार्वजनिक होना चाहिए। तभी सूचना विभाग की यह कवायद निष्पक्ष और समान मानदंडों पर आधारित मानी जाएगी।


