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चुनाव खत्म होते ही ‘न्यूज वन इंडिया’ चैनल में छंटनी और इस्तीफे

उत्तर प्रदेश में जब भी विधान सभा चुनाव आते हैं वैसे ही कुछ चुनावी चैनल कुकुरमुत्ते की तरह उग आते हैं। विधान सभा चुनाव में ऐसे ही एक चैनल न्यूज़ वन इंडिया को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी तथा ठेकेदार अर्जुन रावत ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के लिए जनवरी के द्वितीय सप्ताह में राजधानी से लांच किया। आनन फानन में लखनऊ के बटलर पैलेस चौराहे पर आरिफ अपार्टमेंट में ऑफिस भी खोल दिया गया।

उत्तर प्रदेश में जब भी विधान सभा चुनाव आते हैं वैसे ही कुछ चुनावी चैनल कुकुरमुत्ते की तरह उग आते हैं। विधान सभा चुनाव में ऐसे ही एक चैनल न्यूज़ वन इंडिया को उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के करीबी तथा ठेकेदार अर्जुन रावत ने उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड के लिए जनवरी के द्वितीय सप्ताह में राजधानी से लांच किया। आनन फानन में लखनऊ के बटलर पैलेस चौराहे पर आरिफ अपार्टमेंट में ऑफिस भी खोल दिया गया।

चैनल को मात्र टाटा स्काई पर ही लाया गया। लांच करते ही सभी पत्रकारों की मीटिंग बुलाई गई और कहा गया क़ि इस चुनाव में पेड न्यूज़ पर करोड़ों रुपये खर्च होगा, इसलिए चैनल पर अधिक से अधिक पेड न्यूज चलवाएं ताकि चैनल का खर्च निकल सके। इस काम के लिए कुछ पत्रकारों को भेजकर वसूली भी कराई गई। जिन रिपोर्टर ने वसूली करने से मना कर दिया उसको लेकर प्रबंधन ने अपनी भृकुटी भी तान ली।

चैनेल मैनेजमेंट का दबाव था कि प्रत्येक प्रत्याशी से चाहे वह किसी भी दल का हो, उससे हर इंटरव्यू काम से कम 40 हजार रुपये और लाइव पर बैठाने के लिए एक लाख रुपये लिए जाये। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए लखनऊ में एक लंबी फ़ौज उतारी गयी। इनमे से कुछ ऐसे पत्रकार थे जिनको कुछ इल्म ही नहीं था। इतना ही नहीं जब कुछ पत्रकारों ने इस काम को करने से मना किया तो चैयरमैन ने अपने गांव बुलंदशहर से तमाम रिश्तेदारों को बुलाकर पेड न्यूज़ के लिए ओबी वैन के साथ जिलों में उतार दिया।

पेड न्यूज़ के लिए चैयरमैन ने किराये पर चार ओबी वैन नोएडा से स्पेशली मंगा लिया। यह भी कहा गया कि चुनाव बाद सभी नेटवर्क पर चैनेल चलने लगेगा। यह चैनेल जनवरी के द्वितीय सप्ताह में लांच किया गया और जब नयी सरकार उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए गठित हो गयी तो पत्रकारों एवं कर्मचारियों का वेतन देना बंद कर दिया। इसी बीच छंटनी के नाम पर कई पत्रकारों को निकाल दिया गया। वह भी बिना किसी नोटिस के अचानक चार मार्च को 5 पत्रकारों को बर्खास्त कर दिया गया और उनका तीन महीने का कोई हिसाब नहीं किया गया। वे ऑफिस आते रहे। जब उन्हें लगा क़ि उनका तीन महीने का वेतन नहीं मिल पायेगा तो वे पत्रकार चैनेल में रखे चार कैमरे अपने घर लेकर चले गए।

इसकी जानकारी जब चैयरमैन को हुई तो वे 25 मार्च को नॉएडा से लखनऊ पहुंचकर पत्रकारों को तीन महीने का वेतन दिया। पत्रकारों ने वेतन पाते ही कैमरे लौटा दिए। वेतन मिलते ही आधा दर्जन पत्रकारों ने इस्तीफा देकर चैनेल से अलविदा कह दिया। चैयरमैन ने पत्रकारों के इस्तीफे के बाद चैनेल के कार्यालय पर ताला जड़ दिया। अब सुनने में आ रहा है क़ि चैयरमैन राजधानी के कुछ फर्जी पत्रकारों के संपर्क में हैं और जिन्हें पत्रकारिता का ककहरा तक नहीं पता उन्हें पत्रकार बना रहे हैं।

लखनऊ से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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1 Comment

1 Comment

  1. बदनाम पत्रकार

    March 31, 2017 at 3:06 am

    ठीक बात कही। जिन लोगो को राजवीर जी त्रिपाठी जी यश जी और कई नामी पत्रकारों के अनुभव को अपमान करना था। उनके साथ यही होना था।

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